यशवंत निवास रोड क्षेत्र में नियमों को ताक में रख बन रहा बहुमंजिला भवन: निगम अफसरों की शह पर जोनल ऑफिस के पास फल-फूल रहा अवैध निर्माण का कारोबार
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संवाददाता

चंचल भारतीय 98936-44317 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
यशवंत निवास रोड जैसे वीआईपी इलाके में नगर निगम के कायदे-कानूनों को सरेआम दफन किया जा रहा है। वार्ड-47 और जोन-9 के अंतर्गत चंद्र किरण भवन (6/7) पर करीब चार महीनों से नियमों की धज्जियां उड़ाकर एक बहुमंजिला मकान का निर्माण हो रहा है। एसबीआई की मुख्य शाखा के ठीक पास स्थित इस निर्माणाधीन बहुमंजिला के लिए नगर निगम से कोई अनुमति नहीं ली गई।
जोनल ऑफिस से एक किलोमीटर से भी कम दूरी पर चल रहे इस बड़े अवैध निर्माण ने निगम के मैदानी अधिकारियों की कार्यप्रणाली और उनकी नीयत पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। मलाईदार इलाके में तैनात होकर चांदी काट रहे जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी इस पूरे मामले में भ्रष्टाचार की स्पष्ट गवाही दे रही है।
इस पूरे खेल में सबसे गंभीर पहलू यह है कि बुधवार को भवन अधिकारी विशाल सिंह स्वयं मौके पर देखे गए, लेकिन उनके वहां होने के बावजूद न तो निर्माण कार्य रोका गया और न ही निगम प्रशासन को इसकी कोई आधिकारिक सूचना दी गई। एक जिम्मेदार पद पर बैठे अधिकारी का अवैध निर्माण स्थल पर खड़ा होना और फिर बिना किसी कार्रवाई के वहां से लौट जाना, सीधे तौर पर कर्त्तव्य के प्रति घोर लापरवाही दर्शाता है।
जोन अधिकारी अभिषेक सिंह और भवन अधिकारी विशाल सिंह की नाक के नीचे महीनों से चल रहा अवैध निर्माण यह साबित करने के लिए काफी है कि यहां रसूखदारों को नियमों से ऊपर रखा जा रहा है।
हैरानी की बात यह कि जब शहर के आम नागरिक अपने मकान में एक छोटा-सा बदलाव भी करते हैं, तो निगम का अमला तुरंत नोटिस और कार्रवाई के लिए पहुंच जाता है, लेकिन यहां महीनों से पूरा का पूरा बहुमंजिला मकान तैयार हो गया और अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी। मिलीभगत कर सरकारी राजस्व को लाखों रुपए का चूना लगाया जा रहा है और शहर के नियोजित विकास के मास्टर प्लान को ठेंगा दिखाया जा रहा है।
अभिषेक सिंह और विशाल सिंह जैसे अधिकारी केवल मलाईदार पोस्टिंग का आनंद लेने और भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने के लिए कुर्सी पर बैठे हैं? बुधवार को विशाल सिंह का मौके पर जाकर भी खामोश रहना मिलीभगत को स्पष्ट करता है।
शहर की जनता अब यह सवाल पूछ रही है कि क्या नगर निगम आयुक्त इस खुली धांधली पर संज्ञान लेंगे और दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे?
नगर निगम प्रशासन से सीधे सवाल, जवाब दें जिम्मेदार
जब जोनल ऑफिस से दूरी एक किलोमीटर भी नहीं है, तो चार महीने से चल रहे इस विशाल निर्माण पर जोन अधिकारी अभिषेक सिंह की नजर क्यों नहीं पड़ी? भवन अधिकारी विशाल सिंह बुधवार को स्वयं मौके पर मौजूद थे, फिर भी उन्होंने निर्माण कार्य क्यों नहीं रुकवाया? क्या उनके मौन का कारण मलाईदार सेटिंग है?
बिना अनुमति बहुमंजिला मकान खड़ा कर देने वाले संबंधित भवन मालिक पर अब तक निगम ने कड़ी कार्रवाई क्यों नहीं की? क्या निगम के नियम केवल गरीबों के झोपड़ों के लिए हैं? रसूखदारों के अवैध निर्माण पर अधिकारी आंखें क्यों मूंद लेते हैं? क्या निगम प्रशासन उन लापरवाह अधिकारियों पर शिकंजा कसेगा, जो इस तरह के अवैध निर्माणों को संरक्षण देकर निगम की छवि धूमिल कर रहे हैं?
आधिकारिक वर्जन…
मैं मीडिया-वीडिया में इस बारे में कुछ नहीं कहूंगा। (मामले में अपना पक्ष रखने और मीडिया के सवालों का जवाब देने से बचते रहे। अभिषेक सिंह, अधिकारी, जोन-9, नगर निगम, इंदौर
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