अरबों के खेल का जरिया: दान, देवस्थान और धर्मस्थलों की संपत्तियां बनीं; मंदिरों की जमीन पर माफियाओं का कब्जा, प्रशासन मौन
KHULASA FIRST
संवाददाता

प्रमुख मामलों में जमीनों का विवरण
अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अयोध्या के राम मंदिर, उत्तराखंड देवभूमि के बद्रीनाथ धाम और नलखेड़ा के मां बगलामुखी शक्तिपीठ में दान और संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर उठे विवादों के बीच अब इंदौर में सरकारी मंदिरों की जमीनों पर हुए कथित कब्जों और अवैध बिक्री का मामला फिर सुर्खियों में है।
देशभर में धार्मिक स्थलों पर चढ़ावे और संपत्तियों की जांच की मांग के बीच इंदौर की स्थिति और भी गंभीर दिखाई दे रही है, जहां देवस्थानों की सैकड़ों एकड़ भूमि पर वर्षों से कब्जे, अवैध कॉलोनियां, फर्जी रजिस्ट्रियां और व्यावसायिक उपयोग खुलेआम जारी हैं।
खुलासा फर्स्ट द्वारा पूर्व में सरकारी मंदिरों की जमीनों की बिक्री और कब्जों का मुद्दे का खुलासा किया गया था, लेकिन प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।
1015 सरकारी मंदिर, लेकिन 40 मंदिरों की जमीन पर कब्जा
धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार इंदौर जिले में शासन संधारित मंदिरों की संख्या 1015 है। इनमें से कम से कम 40 सरकारी मंदिरों की जमीनों पर अतिक्रमण और अवैध कब्जों की स्थिति सामने आई है।
इनमें मल्हारगंज तहसील में 19, जूनी इंदौर में 11, बिचौली हप्सी में 4, हातोद और देपालपुर में 2-2 तथा सांवेर और राऊ में एक-एक मंदिर शामिल हैं। इनमें 17 मंदिरों के व्यवस्थापक कलेक्टर, एक मंदिर के व्यवस्थापक कमिश्नर तथा एक के अपर कलेक्टर बताए गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि कलेक्टर और कमिश्नर के प्रत्यक्ष प्रशासनिक नियंत्रण वाले मंदिरों की जमीनें भी सुरक्षित नहीं रह सकीं।
सरकारी जमीनों पर कॉलोनियां, कॉलेज, पेट्रोल पंप और बस डिपो
इन देवस्थानों की भूमि पर मेडिकल कॉलेज, कॉलोनियां, गोशालाएं, महाविद्यालय, गोदाम, पेट्रोल पंप, बैंक, गार्डन, धर्मशालाएं, कारखाने, नगर निगम की पानी की टंकियां, बस डिपो, अहिल्या वन तथा आईडीए की योजनाएं विकसित हो चुकी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इन सभी जमीनों का वर्तमान बाजार मूल्यांकन किया जाए तो यह घोटाला हजारों करोड़ रुपए से कम का नहीं होगा।
पूरा तिलक नगर मंदिर की भूमि पर?
जानकारी के अनुसार श्री कृष्ण मंदिर की 7.578 हेक्टेयर भूमि पर संपूर्ण तिलक नगर क्षेत्र विकसित हो चुका है। यदि यह तथ्य रिकॉर्ड में सही पाया जाता है तो यह प्रदेश के सबसे बड़े देवस्थान भूमि प्रकरणों में से एक माना जा सकता है।
निगम और अन्य एजेंसियां भी घेरे में
श्रीराम मंदिर की 2.247 हेक्टेयर भूमि पर नगर निगम की पानी की टंकी, बस डिपो और अहिल्या वन विकसित किया जाना प्रशासनिक जवाबदेही पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
श्री मुरली मनोहर मंदिर की 12.371 हेक्टेयर भूमि आईडीए की टीपीएस योजना में शामिल है, जबकि टिगरिया बादशाह स्थित महादेव मंदिर की 2.497 हेक्टेयर भूमि भी आईडीए योजना में अधिग्रहित बताई गई है।
कबीरखेड़ी खेड़ापति हनुमान मंदिर
सर्वे नंबर 48, रकबा 0.138 हेक्टेयर
सर्वे नंबर 49, रकबा 1.125 हेक्टेयर
इन जमीनों पर आईडीए की योजना के तहत प्लॉट विकसित किए जाने की बात सामने आई है।
भमोरी दुबे का खेड़ापति हनुमान मंदिर
खसरा नंबर 24/1, रकबा 0.907 हेक्टेयर
खसरा नंबर 25/1, रकबा 0.388 हेक्टेयर
यहां मंदिर भूमि पर अवैध मकानों का निर्माण हो चुका है।
श्री बैजनाथ मंदिर, भंवरासला
खसरा नंबर 13/1
कुल रकबा 2.680 हेक्टेयर
इसमें से लगभग 0.800 हेक्टेयर भूमि पर अरबिंदो मेडिकल कॉलेज की पार्किंग एवं अन्य निर्माण बताए गए हैं।
श्रीराम मंदिर, भंवरासला
सर्वे नंबर 17/1, 27, 114 एवं 151
कुल रकबा लगभग 2.849 हेक्टेयर
आधी से अधिक भूमि पर रिहायशी मकान खड़े हो चुके हैं।
नरवर स्थित मंदिर भूमि
श्री महादेव मंदिर – 2.914 हेक्टेयर
श्रीराम मंदिर – 1.137 हेक्टेयर
दोनों भूमि पर अवैध आवासीय निर्माण होने की जानकारी सामने आई है।
छोटा बांगड़दा का श्रीराम मंदिर
सर्वे नंबर 342/1 एवं 342/2
कुल रकबा 5.115 हेक्टेयर
इसमें से लगभग 4.300 हेक्टेयर भूमि पर अवैध कॉलोनी विकसित कर दी गई, जबकि शेष भूमि पर खेती और एमआर-5 क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियां संचालित हो रही हैं।
सुल्काखेड़ी: मंदिरों की जमीन पर बस गया पूरा नगर
सुल्काखेड़ी में स्थित चार मंदिरों की भूमि पर बड़े पैमाने पर कब्जे सामने आए हैं।
श्री गोवर्धन नाथ मंदिर – 6.481 हेक्टेयर भूमि, जिस पर महेश नगर विकसित हो चुका है।
श्री रणछोड़ मंदिर – 8.737 हेक्टेयर भूमि, जहां गोशाला, कन्या महाविद्यालय, क्लॉथ मार्केट, गोदाम और मकान बने हैं।
श्री महादेव मंदिर– 3.657 हेक्टेयर भूमि पर कब्जा।
श्री गंगा मंदिर–0.227 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण।
सिरपुर क्षेत्र में मंदिर भूमि पर कॉलोनियों का जाल
सिरपुर क्षेत्र के सात मंदिरों की भूमि
भी अतिक्रमण की चपेट में है।
श्री इनामदेव स्थान महादेव मंदिर – 2.248 हेक्टेयर भूमि पर गंगा कॉलोनी।
श्री खेड़ापति एवं मारुति मंदिर – 3.387 हेक्टेयर भूमि पर मारुति पैलेस कॉलोनी।
श्री राम मंदिर –1.104 हेक्टेयर भूमि पर रहवासी बस्ती।
श्री कृष्ण मंदिर – 2.609 हेक्टेयर भूमि पर कॉलोनी विकसित।
अन्य मंदिर भूमि पर गोशाला, धर्मशालाएं संचालित हैं।
धार रोड स्थित लाबरिया भैरू मंदिर की 0.676 हेक्टेयर भूमि के पीछे पेट्रोल पंप, बैंक भवन और गार्डन संचालित होना भी गंभीर सवाल खड़े करता है।
नामजद कब्जाधारी भी सामने
कई मामलों में कथित कब्जाधारियों के नाम भी सामने आए हैं।
अर्चना वैष्णव द्वारा लगभग 4300 वर्गफीट भूमि पर कब्जा, जिसे मिठाई व्यवसायी सुरेंद्र जैन को किराये पर देने का आरोप।
अशोक पिता नंदराम ठाकुर द्वारा 1.007 हेक्टेयर भूमि पर खेती।
जसवंत राजपूत द्वारा हातोद क्षेत्र की मंदिर भूमि पर खेती।
लाखन पिता दुर्जनप्रसाद द्वारा गोरधनधारी मंदिर भूमि पर मकान निर्माण।
राऊ क्षेत्र में श्री कृष्ण मंदिर की 5.309 हेक्टेयर भूमि पर विभिन्न व्यक्तियों द्वारा कब्जे की शिकायत।
सबसे बड़ा सवाल: प्रशासन कार्रवाई क्यों नहीं करता?
सबसे गंभीर प्रश्न यह है कि वर्षों से शिकायतें होने, विधानसभा में मामला उठने और रिकॉर्ड उपलब्ध होने के बावजूद कार्रवाई सीमित क्यों रही? यदि सरकारी रिकॉर्ड में भूमि मंदिरों के नाम दर्ज है तो फिर अवैध कॉलोनियों की अनुमति कैसे मिली? रजिस्ट्रियां कैसे हुईं? नगर निकायों और विकास एजेंसियों ने निर्माण कार्यों को स्वीकृति किस आधार पर दी?
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह केवल भूमाफियाओं का मामला नहीं, बल्कि प्रशासनिक उदासीनता, राजनीतिक संरक्षण और राजस्व तंत्र की विफलता का संगठित मॉडल बन चुका है।
जांच की मांग तेज- देशभर में धार्मिक संपत्तियों और दान के प्रबंधन पर उठ रहे सवालों के बीच अब इंदौर की देवस्थान भूमि की उच्चस्तरीय जांच, विशेष जांच दल (एसआईटी) गठन, सभी रजिस्ट्रियों की समीक्षा और अतिक्रमण हटाने की मांग तेज हो रही है।
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