20 हजार तक में बिकी 1 रुपए के नोट की गड्डी: गांधी हॉल में आयोजित तीन दिवसीय मनी मेले का समापन; शौक के लिए लुटाए लाखों
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अंतिम दिन मनी मेला परिसर किसी बड़े व्यापारिक केंद्र की तरह नजर आया, जहां प्राचीन मुद्राओं और दुर्लभ नोटों की खूब ब्रिकी हुई। इतिहास के शौकीनों ने अपने कलेक्शन को पूरा करने के लिए दिल खोलकर निवेश किया। आलम यह था कि 1 रुपए के पुराने और दुर्लभ नोटों की गड्डी अपनी कंडीशन के आधार पर 2,000 से लेकर 20,000 रुपए तक की ऊंची कीमतों पर बिकी।
मेले में केवल प्रदर्शन ही नहीं हुआ, बल्कि दुर्लभ सिक्कों और नोटों का बड़ा कारोबार भी देखने को मिला, जहां व्यापारियों ने ग्राहकों से पुराने सिक्के खरीदे और दुर्लभ मुद्राओं का विक्रय किया। मेले के अंतिम दिन भार्गव ऑक्शन जैसे प्रमुख स्टॉल्स पर ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ी। यहां प्राचीन सिक्कों एवं नोट के साथ-साथ 1, 2,5 से लेकर 100 रुपए तक के बिल्कुल फ्रेश और कड़क नोटों की गडिडयों की जबरदस्त मांग रही।
व्यापारियों के अनुसार पुराने सिक्कों और नोटों के प्रति लोगों का रुझान निवेश के रूप में भी तेजी से बढ़ रहा है। गांधी हॉल में स्थिति यह थी कि कुछ नोट व्यापारी अपने हाथों में 1 रुपए के नोटों के बंडल लेकर घूम रहे थे, जो मिनटों में बिक गए।
दुर्लभ सिक्कों के शौकीनों ने जहां उदयपुर स्टेट और ब्रिटिश इंडिया के दोस्ती चित्र वाले दुर्लभ सिक्कों की तलाश की, वहीं आम ग्राहकों ने इंदिरा गांधी और नेहरू जी के चित्रों वाले 5 रुपए के पुराने सिक्कों को अपना बनाया। तीन दिन के इस सफल आयोजन ने साबित कर दिया कि इंदौर मुद्रा शास्त्र और ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण का सबसे बड़ा केंद्र बन चुका है।
खरीदी और बिक्री दोनों में दिखा जबरदस्त उछाल
इस बार का मनी मेला बहुत शानदार रहा, खरीदी और बिक्री दोनों में ही जबरदस्त उछाल देखा गया। हमारे पास 1 से लेकर 100 रुपए तक के फ्रेश नोटों की गड्डी उपलब्ध थी। भाव पूरी तरह से नोट की कंडीशन (स्थिति) पर निर्भर करता है। 1 के नोट की गड्डी 2000 से 20,000 रुपए तक में बिकी। हमने 5 रुपए के नोट की गड्डियां 1100-1200 में खरीदी हैं, जिन्हें आगे 1400-1500 में बेचेंगे।
-समीर भार्गव, व्यापारी ऑक्शन 2.50 लाख रुपए के दुर्लभ नोट और सिक्के खरीदे
विशेष रूप से उदयपुर स्टेट और ब्रिटिश इंडिया के उन सिक्कों की तलाश में आया था, जो मित्रता (दोस्ती) के प्रतीक के रूप में राजाओं द्वारा जारी किए गए थे। मेरे कलेक्शन में 7 सिक्के हैं, 2 की कमी थी, जो यहां भी नहीं मिल पाए। अपने व्यक्तिगत कलेक्शन के लिए इस एक्जिबिशन से करीब 2.50 लाख रुपए के दुर्लभ नोट और सिक्के खरीदे हैं। -भूपेंद्र जायसवाल, बड़े खरीदार/संग्राहक
देखते ही देखते सारे नोट बिक गए
बाजार में दुर्लभ नोटों की इतनी डिमांड है कि गड्डियां दुकान पर रखने की जरूरत ही नहीं पड़ी। मैं हाथ में 1 रुपए के नोटों के बंडल लेकर घूम रहा था और देखते ही देखते सब बिक गए। हम ग्राहकों से खरीदते हैं और दुकानदारों को बेचते हैं। 1 रुपए की एक गड्डी हमने 14,500 रुपए में बेची है। यह काम बहुत डिमांड वाला है, क्योंकि इसकी मांग कभी कम नहीं होती। -राजा खान, फ्रेश नोट व्यापारी, सराफा
सस्ते दाम पर अच्छा कलेक्शन मिला
मैं यहां सिक्के देखने आया था और मुझे 5 रुपए के वो बड़े सिक्के मिल गए जिन पर इंदिरा गांधी और नेहरू जी के चित्र बने हैं। हैरानी की बात यह है कि ये सिक्के मुझे मात्र 15 रुपए प्रति नग के हिसाब से मिल गए, जबकि बाजार में इनकी कीमत 30-40 से ऊपर होनी चाहिए थी। सस्ते दाम पर अच्छा कलेक्शन मिलना मेरे लिए बड़ी उपलब्धि है। - मधुसूदन भलीखा (ग्राहक)
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