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लोकलुभावन की बजाय आर्थिक सेहत ठीक करने वाला बजट

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संवाददाता

04 फ़रवरी 2026, 6:25 pm
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लोकलुभावन की बजाय आर्थिक सेहत ठीक करने वाला बजट

उमेश चतुर्वेदी लेखक, वरिष्ठ पत्रकार एवं स्तम्भकार हैं- खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देशी समाचार माध्यमों और समाचार एजेंसियों की नजर में यह बजट एक तरह से क्रांतिकारी है। दुनिया की जानी-मानी आर्थिक समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग का कहना है कि भारत ने अपने बजट में $133 बिलियन का इन्फ्रास्ट्रक्चर दांव लगाया है। इसके जरिए भारत अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सुपरचार्ज करने की तैयारी में है।

अंग्रेजी में एक मुहावरा है, टू रॉब पीटर टू पे पॉल। हिंदी में इसका मतलब होगा, पीटर से लेकर पॉल को देना। दुनिया की हर सरकारों के बजट के लिए इस मुहावरे का बखूबी इस्तेमाल होता है। मीडिया भी हर बजट के दिन एक खबर जरूर बनाता है, रूपया आएगा कहां से और जाएगा कहां।

इसका भी मतलब इस मुहावरे जैसा ही। बजट प्रबंधन में दुनियाभर की सरकारें एक व्यक्ति या स्रोत से लेकर दूसरे को उपलब्ध कराती रही हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि हर बजट ऐसा ही होता है।

लोकसभा में साल 2026-27 के लिए प्रस्तुत बजट को इस मुहावरे से कुछ हद तक दूर रखा जा सकता है। बजट प्रस्तावों की मीमांसा होती रहेगी, लेकिन फौरी तौर पर देखें तो कुछ चीजें साफ होती हैं।

इस बजट के बारे में कह सकते हैं कि यह लोकलुभावन नहीं है।

साल 2024-25 और 2025-26 के बजट को देखें तो उन दिनों मोदी सरकार पर जनता से किए गए वायदों को पूरा करने का दबाव था। इसलिए बीते दोनों बजट में लोकलुभावन घोषणाएं की गईं। वैसे भारतीय राजनीति की रवायत बन चुकी है कि ऐन चुनावों से पहले आने वाले बजट प्रस्तावों में उस राज्य विशेष जहां चुनाव होने हैं, के लिए लुभावनी घोषणाओं की बाढ़ आ जाती है।

कुछ ही महीनों बाद पांच महत्वपूर्ण राज्यों में चुनाव होने वाले हैं। पश्चिम बंगाल पर बीजेपी जहां कब्जे की कोशिश में दिन-रात एक किए हुए हैं, वहीं प्रश्न प्रदेश बने तमिलनाडु में भी अपनी ताकतवर उपस्थिति जताने के लिए जोर लगाए हुई है।

तमिलनाडु के पड़ोसी केंद्र शासित प्रदेश पुद्दुचेरी में भी चुनाव होने हैं। इसी तरह बीजेपी की कोशिश गॉड’स ऑन कंट्री यानी भगवान के अपने घर केरल में कमल का फूल खिलाने की है। जबकि असम में तीसरी बार सत्ता हासिल करने के लिए मुतमइन है।

राजनीतिक रवायत के मुताबिक, मौजूदा बजट प्रस्तावों में इन राज्यों के लिए घोषणाओं की बाढ़ आनी चाहिए थी, लेकिन तमिलनाडु से आने वाली निर्मला सीतारमण ने अपने नौंवे बजट में ऐसा कुछ भी नहीं किया। इस लिहाज से यह बजट भारतीय राजनीति का नया चेहरा प्रस्तुत कर रहा है।

इस बजट के बारे में कहा जा सकता है कि यह लोकलुभावन घोषणाओं की बजाय संरचनात्मक सुधारों, विनिर्माण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई जैसे भविष्य के क्षेत्रों पर केंद्रित है। इस बजट में जिस तरह शी मार्ट के जरिए महिला उद्योगपतियों को प्रोत्साहन देने की बात है, बेकार और अनुपयोगी हो चुके कानूनों को बदलने के लिए समिति बनाने का का प्रस्ताव है या सात हाईस्पीड रेल कॉरीडोर बनाने की बात है या फिर ग्रामीण बजट को बढ़ावा दिया गया है, या फिर मनरेगा की जगह पर आए नए कानून जी राम जी को जबरदस्त प्रोत्साहन दिया गया है, उस वजह से यह बजट अलग स्वरूप लिए हुए दिख रहा है।

शायद यही वजह है कि प्रधानमंत्री ने इसे वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका को सशक्त बनाने वाला बजट बताया है। हालांकि पूर्व वित्त मंत्री और अर्थशास्त्री पी चिदंबरम् मानते हैं कि इस बजट प्रस्ताव में सरकार चीन और अमेरिकी दबाव में दिख रही है।

लेकिन विदेशी समाचार माध्यमों और समाचार एजेंसियों की नजर में यह बजट एक तरह से क्रांतिकारी है। दुनिया की जानी-मानी आर्थिक समाचार एजेंसी ब्लूमबर्ग का कहना है कि भारत ने अपने बजट में $133 बिलियन का इंफ्रास्ट्रक्चर दांव लगाया है।

इसके जरिए भारत अपने मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को सुपरचार्ज करने की तैयारी में है। इसके साथ ही ब्लूमबर्ग ने बजट में 12.2 लाख करोड़ के कैपेक्स को ग्लोबल सप्लाई चेन के लिए बड़ा संकेत माना है। दुनिया की सबसे बड़ी समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इन बजट प्रस्तावों को लेकर कहा है कि भारत के इस बजट में वित्तीय अनुशासन बनाम विकास का द्वंद्व दिख रहा है।

एजेंसी कहती है कि बजट प्रस्ताव में मोदी सरकार ने 4.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य रखा है। इसी तरह उसने बुनियादी ढांचे पर खर्च बढ़ाया। मोदी सरकार के ये कदम नए बदलाव के प्रतीक हैं।

ब्रिटेन से प्रकाशित होने वाले प्रसिद्ध आर्थिक अखबार फाइनेंशियल टाइम्स ने मोदी सरकार के बजट को लेकर कहा है कि यह ग्लोबल अनिश्चितता के बीच भारत का स्थिर कदम है। इस बजट के जरिए भारतीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने निवेश और राजकोषीय विवेक के बीच संतुलन साधने की कोशिश की है।

दुनिया की जानी-मानी पत्रिका फोर्ब्स ने 2026 के बजटको लेकर एक तरह से हैरत जताते हुए सवाल पूछ लिया है कि क्या सेमीकंडक्टर और एआई के क्षेत्र मे निवेश भारत को टेक्निकल दुनिया का सुपरपावर बनाएगा? दुनिया की दूसरी बड़ी समाचार एजेंसी एएफपी ने भारत के बजट में बुनियादी ढांचे के लिए रिकॉर्ड 133 अरब डॉलर देने के वादे का स्वागत किया है।

कुछ ऐसी ही प्रतिक्रियाएं दूसरी संस्थाओं की भी है। मशहूर रेटिंग एजेंसी मूडीज ने इस बजट को ‘टैक्टिकल’ यानी रणनीतिक करार दिया है। मूडीज का मानना है कि यह बजट क्रेडिट प्रोफाइल में तुरंत बदलाव नहीं करेगा, लेकिन भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए अच्छा है। इन प्रतिक्रियाओं में प्रधानमंत्री मोदी की प्रतिक्रिया को भी जोड़ सकते हैं।

भारतीय मध्य वर्ग को हर बार बजट से बड़ी उम्मीद रहती है। देश का सबसे बड़ा आयकर दाता मध्य वर्ग ही है। उसे उम्मीद थी कि इस बार के बजट में आयकर पर किंचित ही सही, छूट मिलेगी। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इससे उसे थोड़ी निराशा तो जरूर हुई है।

बीबीसी और अल जजीरा जैसे चैनलों ने इस मुद्दे को अपनी रवायत के मुताबिक अपनी समीक्षाओं में प्रमुखता दी है। दोनों ही समाचार संस्थानों ने भारतीय विपक्षी नेताओं और आर्थिक-तकनीकी विशेषज्ञों के हवाले से लिखा है कि आयकर स्लैब में बदलाव न होने से मध्यम वर्ग को उतनी राहत नहीं मिली, जितनी उम्मीद थी। सरकारी कर्मचारी उम्मीद कर रहे थे कि आठवें वेतन आयोग को लेकर भी बजट में कोई बड़ी चर्चा या ऐलान हो सकता है। लेकिन निर्मला सीतारमण ने इससे परहेज किया।

इसका यह मतलब नहीं कि बजट में आम आदमी का ध्यान नहीं रखा गया है। बजट में कुछ बेहतरीन घोषणाएं भी हुई हैं। महिला उत्थान और सशक्तीकरण की बात खूब की जाती है, लेकिन गांवों या छोटे शहरों से बड़े शहरों में पढ़ाई या नौकरी के लिए आने वाली लड़कियों की सहूलियतों पर कम ही ध्यान दिया जाता रहा है। लेकिन इस बार बजट में उनका ध्यान रखा है।

बजट में हर जिले में महिला छात्रावास बनाने का प्रस्ताव किया गया है। बजट का यह फैसला लड़कियों को कॉलेज और नौकरियों तक पहुंचाने में बहुत मददगार साबित होगा। मां-बाप भी बिना किसी डर के सरकारी हास्टलों में अपनी बेटियों को उच्च शिक्षा के लिए भेज सकेंगे।

इससे न केवल पढ़ाई बीच में छोड़ने वाली लड़कियों की संख्या कम होगी, बल्कि लड़कियां खुद को ज्यादा सुरक्षित और आत्मनिर्भर महसूस करेंगी। पढ़ाई के साथ-साथ जो अपना छोटा-मोटा काम करने या स्टार्टअप चलाने वाली महिलाओं के लिए भी बजट में घोषणा हुई है।

सरकार ने ‘शी मार्ट्स’ नामक प्लेटफॉर्म शुरू करने का फैसला किया है। ये ऐसे बाजार या प्लेटफॉर्म होंगे, जहां सिर्फ महिला उद्यमी, स्वयं सहायता समूह और महिला कारीगर ही अपना सामान बेच सकेंगी।

इससे महिलाओं को बिचौलियों की जरूरत नहीं रहेगी। इसी तरह कैंसर के इलाज वाली 17 दवाओं के साथ ही शुगर की दवाओं पर कर में कमी की गई है।

साथ ही सात दुर्लभ बीमारियों के इलाज के लिए बाहर से आयात होने वाली दवाओं और स्पेशल फूड पर भी अब कोई टैक्स नहीं लगेगा। इससे उन्हें बड़ी आर्थिक मदद मिलेगी जो इलाज के लिए महंगी विदेशी दवाओं पर निर्भर हैं।

भारत को बायोफार्मा का हब बनाने का भी ऐलान किया गया है। ग्रामीण विकास पर दो लाख 73 हजार 108 करोड़ और कृषि एवं कृषि विकास पर एक लाख 62 हजार 671 करोड़ के बजट का प्रस्ताव ग्रामीण क्षेत्रों की रौनक बढ़ा सकता है।

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