90% जनता को मिल रहा जहरीला पानी: प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने ‘वाटर ऑडिट रिपोर्ट’ जारी कर भाजपा को घेरा
KHULASA FIRST
संवाददाता

झूठी रिपोर्ट से शहर को बदनाम करने की साजिश, सैंपल मानकों के विपरीत
पानी की राह रोकने वाले अतिक्रमण पर चला बुलडोजर
तरसता शहर और पाइप के बजाय सड़कों पर बह रही नर्मदा
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जलसंकट और जहरीला पानी की समस्या अब सियासी घमासान का बड़ा मुद्दा बन गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने प्रेसवार्ता में पार्टी द्वारा कराई गई ‘वाटर ऑडिट’ रिपोर्ट पेश करते हुए दावा किया कि इंदौर की 90 फीसदी आबादी जहरीला पानी पीने को मजबूर है।
पटवारी ने बताया कि कांग्रेस ने शहर की सात विधानसभाओं के 29 वार्डों से 240 सैंपल लेकर दिल्ली की प्रतिष्ठित लैब में जांच करवाई, जिसमें 98 फीसदी सैंपल असुरक्षित और दूषित पाए गए। उन्होंने इसे भाजपा की तथाकथित ट्रिपल इंजन सरकार की बड़ी विफलता करार दिया है।
भागीरथपुरा में हुई मौतों के लिए महापौर और निगम जिम्मेदार
जीतू पटवारी ने कहा कि शहर को नौ विधायक, दो कैबिनेट मंत्री, महापौर और पूरी नगर निगम परिषद भाजपा की देने के बावजूद इंदौर भीषण जलसंकट और गंदे पानी की आपूर्ति का दंश झेल रहा है।
कई इलाकों में सीवरेज मिश्रित काला पानी सप्लाई होने की बात कहते हुए उन्होंने भागीरथपुरा में हुई मौतों के लिए सीधे तौर पर महापौर और भाजपा शासित नगर निगम को जिम्मेदार ठहराया।
‘वाटर प्लस सिटी’ का झूठा दावा
कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि ‘वाटर प्लस सिटी’ का दावा केवल इवेंट मैनेजमेंट और झूठा प्रचार है, जबकि हकीकत में शहर की जनता बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रही है।
उन्होंने इस ऑडिट रिपोर्ट को मुख्यमंत्री, नगरीय प्रशासन मंत्री और स्थानीय जनप्रतिनिधियों को सौंपने की घोषणा की है। साथ ही, उन्होंने पीथमपुर में जहरीला कचरा जलाने से यशवंत सागर के जलस्रोत पर मंडराते खतरों और भूजल रिचार्ज के दावों पर भी तीखे सवाल खड़े किए हैं।
सरकार पर भेदभाव के आरोप
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष पटवारी ने इंदौर मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी के नामकरण और शहर में जारी सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई को लेकर मोहन यादव सरकार पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
पटवारी का कहना है कि इंदौर और उज्जैन संभाग के जिलों को मिलाकर बनाई जा रही इस अथॉरिटी का नाम उज्जैन-इंदौर मेट्रोपॉलिटन अथॉरिटी प्रस्तावित करना इंदौर जैसे प्रमुख व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र की उपेक्षा है।
उन्होंने इसे मां अहिल्या की नगरी और यहां के निवासियों का अपमान करार देते हुए नामकरण पर पुनर्विचार की मांग की है।
टीडीआर और एफएआर के प्रावधानों को लेकर किया जा रहा भ्रमित
शहर में सड़क चौड़ीकरण के नाम पर की जा रही तोड़फोड़ को लेकर भी कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रशासनिक प्रक्रिया पर आपत्ति जताई है।
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना मास्टर प्लान घोषित किए वर्षों से रह रहे नागरिकों के वैध निर्माणों को अतिक्रमण बताकर हटाया जा रहा है और प्रभावितों को किसी प्रकार का मुआवजा भी नहीं दिया जा रहा है।
पटवारी ने उज्जैन और इंदौर के बीच मुआवजे के मामले में हो रहे अंतर पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि टीडीआर और एफएआर के प्रावधानों को लेकर नागरिकों को भ्रमित किया जा रहा है, जिससे आम लोग न केवल बेघर हो रहे हैं, बल्कि उनके सामने आजीविका का संकट भी खड़ा हो गया है।
जनता के अपराधी हैं मेयर
इंदौर में गहराते जलसंकट और बदहाल होते हालातों के बीच प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने कल भाजपा जनप्रतिनिधियों को निशाने पर लिया। पटवारी ने इंदौर के महापौर पुष्यमित्र भार्गव को शहर की दुर्दशा और जलसंकट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए ‘जनता का अपराधी’ करार दिया।
उन्होंने कहा कि भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों और मौजूदा पानी की किल्लत के लिए महापौर पूरी तरह जवाबदेह हैं और उन्हें इसका खामियाजा भुगतना ही होगा।
कांग्रेस की रिपोर्ट पर महापौर पुष्यमित्र भार्गव का पलटवार
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी द्वारा पानी की गुणवत्ता को लेकर जारी की गई रिपोर्ट पर करारा जवाब दिया है। महापौर ने इस रिपोर्ट को पूरी तरह से फेक और सुनियोजित तरीके से शहर की छवि को धूमिल करने की एक साजिश करार दिया है।
महापौर ने रिपोर्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए कहा कि कांग्रेस की इस रिपोर्ट के आखिरी पन्नों में खुद लिखा है कि इसका उद्देश्य राष्ट्रीय स्तर पर मुद्दा बनाकर भाजपा की साख गिराना और मध्यप्रदेश सरकार को बदनाम करना है।
महापौर ने पूछा कि यदि यह रिपोर्ट तीन महीने पुरानी थी, तो कांग्रेस ने इसे अब तक दबाकर क्यों रखा? उन्होंने कहा कि यह केवल राजनीति है और शहर की जनता के साथ किया गया एक भद्दा मजाक है।
रिपोर्ट केवल कागजी और मनगढ़ंत
सैंपलिंग की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए महापौर ने कहा कि कांग्रेस ने जो सैंपल लिए हैं, वे पूरी तरह से मानकों के विपरीत हैं। एनएबीएल और भारत सरकार के नियमों के अनुसार पानी के सैंपल कांच के कंटेनर में लिए जाने चाहिए और उन्हें तय समय में लैब भेजना होता है, जबकि कांग्रेस के लोग प्लास्टिक की बोतलों में सैंपल लेते हुए दिखाई दिए हैं।
यह स्पष्ट करता है कि यह रिपोर्ट केवल कागजी और मनगढ़ंत है। महापौर ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि मात्र 29 वार्डों के सैंपल के आधार पर पूरे शहर के 90 प्रतिशत पानी को जहरीला बताना हास्यास्पद है।
क्या इस 90 प्रतिशत में बिजलपुर और चिंटू चौकसे का क्षेत्र शामिल नहीं है? यदि पानी जहरीला होता, तो पिछले तीन महीनों में वहां के निवासियों की तबीयत खराब क्यों नहीं हुई? चौकसे द्वारा पानी वितरण पर लगाए गए भेदभाव के आरोपों को खारिज करते हुए महापौर ने कहा कि यदि उन्हें लगता है कि पानी नहीं है, तो वे नगर निगम द्वारा दिए गए टैंकर लौटा दें, हम जनता की मांग पर सीधे पानी पहुंचा देंगे।
कांग्रेस के पार्षद हमेशा घर बैठे रहते हैं
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कांग्रेस की निष्क्रियता पर सवाल उठाते हुए कहा कि स्वच्छता सर्वेक्षण हो या जल संरक्षण अभियान, कांग्रेस के पार्षद हमेशा घर बैठे रहते हैं।
उन्होंने जीतू पटवारी और चिंटू चौकसे को चुनौती देते हुए पूछा कि उन्होंने शहर में जल संरक्षण के लिए अब तक कितने वॉटर हार्वेस्टिंग प्लांट या रिचार्ज शाफ्ट बनवाए हैं? सिर्फ राजनीति और विरोध करने से शहर का भला नहीं होगा।
650 टैंकरों के जरिये हर क्षेत्र में पानी पहुंच रहा
महापौर ने जानकारी दी कि नगर निगम 360 एमएलडी से अधिक नर्मदा जल शहर को दे रहा है। भीषण गर्मी के कारण बोरिंग सूखने की समस्या जरूर है, लेकिन निगम 650 से अधिक टैंकरों के जरिए हर क्षेत्र में पानी पहुंचाने का काम कर रहा है।
अंत में महापौर ने स्पष्ट किया कि इंदौर देश का सबसे स्वच्छ शहर है और कांग्रेस अपनी ओछी राजनीति से इसकी साख को नुकसान न पहुंचाए। उन्होंने सभी से आग्रह किया कि राजनीति से ऊपर उठकर जल संरक्षण के काम में सहयोग करें।
निगम की कार्यप्रणाली पर नेता प्रतिपक्ष के सवाल, अपने खर्च से प्यास बुझा रहे कांग्रेसी
चिंटू चौकसे, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष ने प्रेस वार्ता में कहा कि बब्बू यादव, अंकित चौधरी, मुकेश यादव, ऐसे हमारे तमाम लोग हैं, जो अपने खर्चे से टैंकर चला रहे हैं। नगर निगम से सिर्फ हम चूंकि पानी मांग रहे हैं, क्योंकि प्राइवेट हाइड्रेंट्स में पानी नहीं है और प्राइवेट बोरिंगों में पानी नहीं है।
ऐसे में हमारे लोगों की भावना सिर्फ पानी पहुंचाना है। अब कल ऐसा हुआ कि बब्बू यादव के टैंकर जोन पांच से पानी भर रहे थे मगर नगर निगम के लोगों ने भरने नहीं दिया, जबकि वहां नगर निगम के टैंकर पानी बेच रहे हैं।
वो बोलते हैं यह हमारी ड्यूटी है, जबकि ड्यूटी किसकी है? नगर निगम की। लेकिन चूंकि कांग्रेस पार्टी दृढ़संकल्पी है कि हम जितनी सेवा तन, मन, धन से जनता की कर सकते हैं, वो करने का प्रयास कर रहे हैं।
पानी देने पर वे बब्बू यादव की थाने पर रिपोर्ट लिखाने पहुंच गए। ये भाजपा के नेता बार-बार कमिश्नर, महापौर को फोटो-वीडियो भेज रहे हैं, तो ये है भाजपा का असली चाल-चरित्र।
हम लोग अपनी जेब से पैसा खर्च करके पानी पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं, क्योंकि नगर निगम पूरी तरह फेलियर हो चुका है।
नगर निगम पानी तक नहीं दे रहा है, हमारे पास प्राइवेट हाइड्रेंट, प्राइवेट बोरिंग्स में कहीं भी पानी नहीं है। कांग्रेस पार्टी की सजगता कि हम अपनी जेब से पैसा खर्च कर सेवा कर रहे हैं।
नायता मुंडला तालाब का कैचमेंट खाली
नगर निगम ने जल स्रोतों के संरक्षण के प्रति सख्ती दिखाते हुए कल नायता मुंडला तालाब के कैचमेंट क्षेत्र में की जा रही अवैध घेराबंदी पर कार्रवाई की।
तालाब की भराव क्षमता सुनिश्चित करने और वर्षा ऋतु में जल भराव की स्थिति को निर्बाध रखने के उद्देश्य से आयुक्त क्षितिज सिंघल के निर्देश पर जोन-13 की टीम ने मौके पर पहुंचकर अतिक्रमण को हटाया।
कैचमेंट क्षेत्र में रवि शुगनबाई सुनेर और जितेंद्र रायसिंग यादव द्वारा किए जा रहे निर्माण कार्यों से पानी के प्राकृतिक बहाव में बाधा उत्पन्न हो रही थी, जिसे निगम की टीम ने तत्काल प्रभाव से ध्वस्त कर दिया।
आयुक्त सिंघल ने स्पष्ट किया है कि शहर के तालाबों और उनके कैचमेंट एरिया में अतिक्रमण करने वालों के विरुद्ध निरंतर निगरानी रखी जाएगी और किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं होगा।
इस कार्रवाई के दौरान भवन अधिकारी विशाल राठौर और भवन निरीक्षक अतुल श्रीधर सहित निगम का अमला मौजूद रहा।
सरकारी टैंकरों की कालाबाजारी, रात में बेचे जा रहे
अशरफी कॉलोनी व दादा कुतुब चौराहा क्षेत्र में निगम के सरकारी टैंकरों के दुरुपयोग व पानी की बिक्री का बड़ा मामला सामने आया है। स्थानीय रहवासियों ने आरोप लगाया है कि नगर निगम की मशीनरी का इस्तेमाल खुलेआम अपनी जेबें भरने के लिए किया जा रहा है।
रहवासियों ने रात के अंधेरे में रंगे हाथों एक ऐसे टैंकर को पकड़ा है, जिसका नंबर एमपी 09 एसी 7613 है। आरोप है कि यह टैंकर पार्षद रुबीना इकबाल के करीबी माने जाने वाले इमामुद्दीन के कहने पर सरकारी नियमों को ताक पर रखकर रात अंधेरे में कुछ विशेष घरों में पानी पहुंचा रहा था।
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि मोहल्ले में पानी की किल्लत के बावजूद, जो लोग पैसे दे रहे हैं, उन्हें ही रात के सन्नाटे में पानी बेचा जा रहा है। जब रहवासियों ने इस गोरखधंधे का विरोध किया, तो टैंकर ड्राइवर ने यह कहकर चुनौती दी कि वे चाहे जहां शिकायत कर लें, उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
इस पूरी घटना से स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश है। वसीम खान लकी और इसरार खान सहित अन्य निवासियों ने साफ कर दिया है कि यदि सरकारी संसाधनों के इस दुरुपयोग और भ्रष्टाचार को तत्काल नहीं रोका गया, तो मजबूरन उन्हें सड़क पर उतरकर उग्र विरोध प्रदर्शन करना पड़ेगा।
सवाल यह है कि निगम प्रशासन टैंकरों में जीपीएस सिस्टम का दावा करता है, तो यह अवैध धंधा किसकी मिलीभगत से चल रहा है? क्या निगम अधिकारी इससे अनजान हैं, या फिर उनकी मौन सहमति से ही सरकारी पानी की नीलामी हो रही है? रहवासियों ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव को वीडियो साक्ष्य भेजकर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
संकट के बीच कॉरपोरेशन की भारी लापरवाही
पलासिया क्षेत्र स्थित आदर्श सड़क कल दोपहर को एक बहती हुई नदी का मंजर पेश करती नजर आई। जोन क्रमांक 10 के अंतर्गत गणेश केप मार्ट और अपना स्वीट्स के ठीक सामने नर्मदा पाइपलाइन की वाल्व से रिसाव शुरू हो गया, जिससे देखते ही देखते हजारों लीटर पानी सड़क पर बह निकला।
पानी का बहाव इतना तेज था कि वह गिटार चौराहे तक पहुंच गया और सड़कों पर जलजमाव की स्थिति बन गई। एक ओर शहर का बड़ा हिस्सा पानी की किल्लत झेल रहा है, वहीं दूसरी ओर नगर निगम की लचर व्यवस्था के कारण हजारों लीटर पानी व्यर्थ बहकर नाले में समा गया।
इस घटना के बाद मौके पर मौजूद राहगीरों और स्थानीय लोगों में गहरा आक्रोश देखा गया। प्रत्यक्षदर्शी रमेश जायसवाल ने स्पष्ट कहा कि शहर में लोग पीने के पानी की समस्या से जूझ रहे हैं, जबकि नगर निगम और नर्मदा लाइन के कर्मचारियों की लापरवाही के चलते हजारों लीटर पानी यूं ही सड़कों पर बह गया।
लोगों का कहना है कि यह केवल पानी की बर्बादी नहीं, बल्कि शहर की व्यवस्था के प्रति प्रशासन की संवेदनहीनता है। घटनास्थल पर मौजूद दुकानदारों ने नगर निगम के दोहरे रवैये पर कड़े सवाल उठाए।
दुकानदारों का तर्क है कि यदि कोई नागरिक अपनी दुकान के बाहर मामूली पानी फैला दे या गंदगी पाए जाने पर निगम के कर्मचारी तुरंत भारी जुर्माना लगा देते हैं और दुकानों तक को सील कर दिया जाता है, लेकिन जब स्वयं निगम की लापरवाही से पानी की इतनी बड़ी बर्बादी हुई है, तो उन जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई करने वाला कोई नहीं है।
अजीब बात यह रही कि सूचना पाकर मौके पर पहुंचे नगर निगम के स्वच्छता पर्यवेक्षक और अन्य कर्मचारी किसी भी प्रकार की जिम्मेदारी लेने के बजाय सवालों से बचते रहे।
उन्होंने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए अपना नाम बताने तक से इनकार कर दिया और सारा ठीकरा जोन अधिकारी पर फोड़ दिया।
अब देखना यह है कि शहर की इस बदहाल व्यवस्था और पानी की बर्बादी के लिए जिम्मेदार अधिकारियों पर निगम प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।
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