कॉलोनी का रास्ता बनाने के लिए किसान की 6 एकड़ जमीन पर कब्जा: भू-माफिया की दबंगई; नायब तहसीलदार ने कॉलोनाइजर भरत जैन की मनमानी पर कसा शिकंजा
KHULASA FIRST
संवाददाता

अंकित शाह 99264-99912 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
जिले में एक बार फिर भू-माफियाओं और कॉलोनाइजरों की दबंगई का खुलासा हुआ है। आरोप है कि कॉलोनाइजर भरत जैन और उसके पार्टनर करामत पटेल ने 40 एकड़ जमीन पर कॉलोनी विकसित करने के दौरान पड़ोसी किसान की करीब 6 एकड़ जमीन पर कब्जा कर रास्ता बनाने की कोशिश की।
जब नायब नायब तहसीलदार और राजस्व अधिकारियों ने नियमों का हवाला देते हुए इस जमीन को उनके खाते में जोड़ने से मना कर दिया तो कथित रूप से शिकायतें कर उन पर दबाव बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
रात में पेड़ काटे, पुश्तैनी कुआं बंद करने का आरोप
पीड़ित किसान पक्ष का आरोप है कि कॉलोनाइजर के लोगों ने 5 फरवरी 2024 की रात खेत में लगे आम के पेड़ काट दिए और पुश्तैनी कुएं में चार डंपर मुरम डालकर उसे बंद कर दिया। विरोध करने पर गालियां देकर भगा दिया गया और जान से मारने की धमकी दी गई। आरोपियों ने धमकाया कि यदि ज्यादा विरोध किया तो कुएं में डालकर बंद कर देंगे।
40 एकड़ की कॉलोनी, रास्ता चाहिए खेत से
जानकारी के अनुसार किसान अमृत डांगी और उनके भाई कैलाश डांगी के खेत के पास कॉलोनाइजर भरत जैन ने करीब 40 एकड़ जमीन खरीदी और यहां ‘आइरिस तथा वर्धमान’ नाम से कॉलोनी विकसित की। आरोप है कि कॉलोनी के लिए रास्ता बनाने के उद्देश्य से जैन और उसके सहयोगियों ने डांगी बंधु की लगभग 6 एकड़ जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया।
इसके बाद इस जमीन को अपने खाते में दिखाने के लिए नक्शे में तरमीम कराने का दबाव राजस्व विभाग पर बनाया गया, जबकि रिकॉर्ड के अनुसार भरत जैन द्वारा खरीदी गई जमीन करीब 52 आरे ही है, लेकिन रास्ते के नाम पर किसान की कई एकड़ जमीन अपने हिस्से में दिखाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
राजस्व अधिकारियों पर दबाव
बताया जा रहा है कि कब्जाई जमीन को वैध दिखाने के लिए भरत जैन ने नक्शे में तरमीम का आवेदन देकर नायब तहसीलदार पर दबाव बनाने की कोशिश की, ताकि किसान की जमीन भी उसके खाते में जोड़ दी जाए, लेकिन जब नायब तहसीलदार ने राजस्व अभिलेखों की जांच की, तो स्पष्ट हुआ कि विवादित जमीन किसान कैलाश पिता माधवसिंह के नाम दर्ज है और उसका स्वामित्व भरत जैन के खाते में नहीं आता। ऐसे में किसान की जमीन को नक्शे में जोड़ना पूरी तरह अनुचित पाया गया।
बात नहीं बनी तो शुरू हुई शिकायतों की राजनीति
नायब तहसीलदार द्वारा नियमों के विरुद्ध तरमीम करने से साफ मना करने के बाद राजस्व अधिकारियों के खिलाफ शिकायतों का सिलसिला शुरू हो गया। बताया जा रहा है कि कॉलोनाइजर से जुड़े दलाल शिवशंकर द्वारा ईओडब्ल्यू में नायब तहसीलदार की शिकायत तक कर दी गई। यह भी चर्चा है कि मामले में कई प्रभावशाली लोगों के माध्यम से भी अधिकारियों पर दबाव बनाने की कोशिश की गई।
किसान का आरोप- दबाव बनाकर जमीन हड़पने की कोशिश
शिकायतकर्ता कैलाशचंद्र सिकरवार निवासी तिल्लौर ने बताया वह वर्षों से खेती कर परिवार का पालन कर रहा है। कॉलोनाइजर जैन द्वारा पड़ोस का खेत खरीदने के बाद अब उसकी जमीन भी कॉलोनी में शामिल करने के लिए दबाव बनाकर धमकियां दी जा रही हैं। नायब तहसीलदार देवेंद्र कछावा ने स्पष्ट कहा कि राजस्व नियमों के अनुसार ही कार्रवाई होगी।
उन्होंने बताया प्रकरण में टाइटल में दर्ज आरे भूमि की ही नियम अनुसार तरमीम की जाएगी। किसी अन्य भूमि स्वामी के अधिकार प्रभावित न हों, इसके लिए मामला न्यायालय में विचाराधीन है। दबाव या प्रभाव में किसी प्रकार का अवैध कब्जा मान्य नहीं किया जाएगा। किसान द्वारा विधिवत आवेदन दिया गया था, संबंधित पक्ष को भी दावे-आपत्ति का अवसर देकर सुनवाई की गई है और उसी आधार पर आदेश दिया।
नायब तहसीलदार ने ईओडब्ल्यू में की गई शिकायत को लेकर भी सवाल खड़े किए। उनका कहना है कि जिस व्यक्ति ने शिकायत की है वह न तो भूमि स्वामी है, न किसान और न ही इस मामले का अधिकृत प्रतिनिधि। अभी तक विभाग को ईओडब्ल्यू की ओर से कोई आधिकारिक पत्र प्राप्त नहीं हुआ है, लेकिन यदि जांच होती है तो प्रशासन पूरा सहयोग करेगा।
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