विश्वविख्यात मंदिर को मिला नेशनल ई-गवर्नेंस अवार्ड: एआई आधारित इस सुरक्षा प्रणाली को राष्ट्रीय स्तर पर मिली पहचान; कलेक्टर ने ग्रहण किया स्वर्ण पुरस्कार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर की अत्याधुनिक एआई आधारित सुरक्षा एवं भीड़ प्रबंधन प्रणाली 'त्रिनेत्र' को राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार-2026 (स्वर्ण पुरस्कार) से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान जयपुर में आयोजित 29वें राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस सम्मेलन के समापन एवं पुरस्कार वितरण समारोह में प्रदान किया गया।
केंद्रीय राज्य मंत्री ने दिया पुरस्कार
समारोह में केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह को यह प्रतिष्ठित पुरस्कार प्रदान किया। इस अवसर पर राजस्थान के सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहे। कार्यक्रम में श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक, पलाश शर्मा, सचिन जैन तथा आईटी टीम भी उपस्थित रही।
एआई तकनीक ने बदली मंदिर की सुरक्षा व्यवस्था
महाकाल मंदिर परिसर एवं महाकाल रुद्रसागर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट एरिया ( एमआरआईडीए) में स्थापित एआई आधारित वीडियो सर्विलांस सिस्टम के लिए यह राष्ट्रीय सम्मान दिया गया है। मंदिर परिसर में 500 से अधिक एआई-सक्षम स्मार्ट कैमरे 24 घंटे निगरानी करते हैं।
यह प्रणाली फेसियल रिकॉग्निशन, ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन ( एएनपीआर ), रियल-टाइम वीडियो एनालिटिक्स, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान तथा भीड़ के वैज्ञानिक विश्लेषण जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस है। लाखों श्रद्धालुओं की आवाजाही के बीच यह सिस्टम सुरक्षा, भीड़ नियंत्रण और व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी करता है।
केंद्र सरकार की ज्यूरी ने किया था तकनीकी मूल्यांकन
राष्ट्रीय ई-गवर्नेंस पुरस्कार के चयन से पहले केंद्र सरकार की विशेषज्ञ टीम ने उज्जैन पहुंचकर पूरे सिस्टम का विस्तृत निरीक्षण किया था। इसके बाद उज्जैन कलेक्टर रोशन कुमार सिंह ने 13 सदस्यीय राष्ट्रीय ज्यूरी के समक्ष 'त्रिनेत्र' परियोजना का प्रस्तुतीकरण दिया। तकनीकी मूल्यांकन एवं प्रेजेंटेशन के बाद इस परियोजना को देश की सर्वश्रेष्ठ डिजिटल गवर्नेंस परियोजनाओं में शामिल किया गया।
'महाकाल की तीसरी आंख' बनी देश के लिए मॉडल
एआई आधारित 'त्रिनेत्र' प्रणाली को महाकाल मंदिर की 'तीसरी आंख' कहा जा रहा है। यह सिस्टम किसी भी आपात स्थिति की तत्काल पहचान कर संबंधित एजेंसियों को अलर्ट करता है, जिससे त्वरित कार्रवाई संभव हो पाती है। भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और श्रद्धालुओं की सुविधा के क्षेत्र में यह देशभर के धार्मिक स्थलों के लिए एक मॉडल बन चुका है।
'त्रिनेत्र' से मिले उल्लेखनीय परिणाम
वार्षिक श्रद्धालुओं की संख्या लगभग 1.5 करोड़ से बढ़कर वर्ष 2025 में 8 करोड़ से अधिक पहुंच गई। प्रतिदिन दर्शनार्थियों की संख्या 20-30 हजार से बढ़कर 2 लाख से अधिक तथा प्रमुख पर्वों पर 8 से 10 लाख तक पहुंचने लगी।
मंदिर का वार्षिक राजस्व 46 करोड़ से बढ़कर 280 करोड़ हुआ
बेहतर भीड़ प्रबंधन के कारण मंदिर का वार्षिक राजस्व 46 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 280 करोड़ रुपये हो गया। 8 से 10 लाख श्रद्धालुओं की भीड़ वाले बड़े धार्मिक आयोजनों का सफल संचालन बिना किसी बड़ी अप्रिय घटना के किया गया।
552 लापता लोगों को उनके परिजनों से मिलाया
पिछले 45 दिनों में फेसियल रिकॉग्निशन तकनीक की मदद से 552 लापता लोगों को उनके परिजनों से मिलाया गया। 53 खोई हुई वस्तुएं उनके वास्तविक मालिकों को लौटाई गईं, 10 चोरी की घटनाओं में आरोपियों को मौके पर पकड़ा गया तथा 7 पुलिस मामलों में वीडियो साक्ष्य उपलब्ध कराए गए। भीड़ का वैज्ञानिक पूर्वानुमान लगने से श्रद्धालुओं के दर्शन का औसत समय घटकर 15 से 20 मिनट रह गया।
प्रतिवर्ष लगभग 8.60 करोड़ रुपये की बचत
निगरानी के लिए अतिरिक्त 150 कर्मचारियों की आवश्यकता कम होने से मंदिर को प्रतिवर्ष लगभग 8.60 करोड़ रुपये की बचत हो रही है। 5.25 करोड़ रुपये की परियोजना लागत मात्र 7 माह में वसूल हो गई, जबकि अगले पांच वर्षों में लगभग 43 करोड़ रुपये की बचत का अनुमान है। पहले भीड़ का अनुमान 30 से 50 प्रतिशत तक त्रुटिपूर्ण होता था, जिसे स्मार्ट काउंटिंग सिस्टम ने घटाकर 5 प्रतिशत से भी कम कर दिया है।
परियोजना का होगा विस्तार
सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए 'त्रिनेत्र' परियोजना का और विस्तार किया जाएगा। इसके तहत लगभग 3,500 स्मार्ट कैमरे, करीब 140 करोड़ रुपये का निवेश, ड्रोन सर्विलांस, एआई आधारित भीड़ पूर्वानुमान और बहुभाषी सूचना प्रणाली विकसित की जाएगी, जिससे विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक आयोजन को अत्याधुनिक तकनीक से संचालित किया जा सकेगा।
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