पवित्र धाम, अपवित्र काम: चढ़ावा चोरी; चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर
KHULASA FIRST
संवाददाता

‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अंतरिम महासचिव बने कृष्ण मोहन...
जेबों और जूतों में छिपाए नोट, 70 बार सीसीटीवी में दिखी चढ़ावा चोरी!
एसआईटी की रिपोर्ट में खुलासा
खुलासा फर्स्ट, अयोध्या।
अयोध्या में भव्य राम मंदिर के निर्माण और उसकी देखरेख करने वाले ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ से इस वक्त की सबसे बड़ी प्रशासनिक उठापटक सामने आ रही है। ट्रस्ट ने एक बेहद नाटकीय घटनाक्रम में अपने महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है।
हाल ही में सामने आए कथित दान चोरी के गंभीर आरोपों और विवादों के बाद इन दोनों दिग्गजों को अपने पदों से हटना पड़ा है। इस बड़े विवाद से उपजे संकट और डैमेज कंट्रोल को संभालने के लिए ट्रस्ट ने भारतीय वन सेवा (IFS) के सेवानिवृत्त अधिकारी कृष्ण मोहन को अपना अंतरिम महासचिव नियुक्त कर दिया है।
अब राम मंदिर की रोजमर्रा की व्यवस्था और पूरे प्रशासनिक कामकाज की कमान सीधे तौर पर कृष्ण मोहन के हाथों में सौंप दी गई है। इसके साथ ही, ट्रस्ट ने इस पूरे विवाद से पैदा हुए हालात से निपटने और अपनी खोई हुई साख को वापस पाने के लिए एक व्यापक प्रशासनिक समीक्षा की भी घोषणा की है, ताकि आने वाले समय में ट्रस्ट की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी तथा मजबूत बनाया जा सके।
कृ ष्ण मोहन, जिन्हें हाल ही में सदस्यों के सर्वसम्मत निर्णय से ट्रस्ट में ट्रस्टी के तौर पर शामिल किया गया है, उत्तर प्रदेश के हरदोई ज़िले की शाहाबाद विधानसभा सीट के अंतर्गत आने वाले चंद्रपुर गांव के रहने वाले हैं। महाराष्ट्र कैडर के पूर्व IFS अधिकारी रहे कृष्ण मोहन सरकारी सेवा से रिटायर होने के बाद से ही सामाजिक कार्यों में सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं और फ़िलहाल हरदोई शहर में रहते हैं। हाल ही में, सदस्यों के सर्वसम्मत निर्णय से उन्हें राम मंदिर ट्रस्ट में ट्रस्टी के तौर पर शामिल किया गया।
रोज़मर्रा के कामकाज की देखरेख...अंतरिम महासचिव के तौर पर नियुक्ति के बाद, वे स्थायी व्यवस्था होने तक ट्रस्ट के रोज़मर्रा के कामकाज की देखरेख करेंगे। कृष्ण मोहन के शामिल होने से ट्रस्ट में दलित प्रतिनिधित्व भी बना रहेगा। वे कामेश्वर चौपाल की जगह लेंगे, जिन्होंने अपनी मृत्यु से पहले ट्रस्ट में दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व किया था।
कृष्ण मोहन की नियुक्ति करके, ट्रस्ट ने अपनी गवर्निंग बॉडी में सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व बनाए रखने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता ज़ाहिर की है। ट्रस्ट ने कृष्ण मोहन को शामिल किए जाने को अपने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने और व्यापक सामाजिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।
जो हुआ उससे बहुत दु:ख हुआ...कार्यभार संभालने के बाद कृष्ण मोहन ने कहा कि उन्हें स्थायी नियुक्ति होने तक कार्यवाहक महासचिव के तौर पर सेवा करने की ज़िम्मेदारी सौंपी गई है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट यह सुनिश्चित करेगा कि चल रहे मामले में दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को कानून और न्याय के अनुसार सज़ा मिले।
उन्होंने कहा, “जो कुछ भी हुआ है, उससे हम सभी को बहुत दुख हुआ है। इन घटनाओं की वजह से भगवान राम के भक्तों को भी दुख पहुंचा है। ट्रस्ट के प्रबंधन और कामकाज के तरीकों में कमियों को मानते हुए कृष्ण मोहन ने कहा कि कुछ कमियों का दूसरों ने फ़ायदा उठाया है।
उन्होंने कहा कि उनकी पहली प्राथमिकता इन कमियों की पहचान करके उन्हें दूर करना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए प्रशासनिक प्रक्रियाओं को मज़बूत करना होगा।
उन्होंने माना कि इस से ट्रस्ट की सार्वजनिक छवि पर बुरा असर पड़ा है और भक्तों तथा आम लोगों का भरोसा कम हुआ है। कृष्ण मोहन ने कहा कि ट्रस्ट लोगों का भरोसा बहाल करने, पारदर्शिता बढ़ाने और विश्वास को फिर से कायम करने के लिए सभी ज़रूरी कदम उठाएगा।
22 जुलाई को फिर बैठक होगी...दो घंटे से ज़्यादा चली बैठक के बाद, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज ने कहा कि SIT की अंतिम रिपोर्ट पर चर्चा करने के लिए 22 जुलाई को एक और बैठक होगी। उन्होंने कहा हम सभी इससे आहत और दुखी हैं।
चोरी कितनी बड़ी या छोटी थी, यह गौण बात है; हमें मुख्य रूप से इस बात का दुख है कि यहाँ ऐसा माहौल बनने दिया गया। हालांकि, सच्चाई हमारे सामने है और उस पर विचार करना हमारा कर्तव्य है। इसलिए, तय तारीख से पहले ही, हम आज गहरे चिंतन और दुख की स्थिति में इकट्ठा हुए।
मौजूदा हालात को देखते हुए एक गंभीर स्थिति पैदा हो गई: हमारे महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल जी मिश्रा ने इस्तीफ़ा दे दिया। महासचिव के तौर पर काम कर रहे चंपत राय बहुत दुखी थे; उन्हें लगा कि जब तक पूरी तरह से न्याय नहीं हो जाता यानी दोषियों को पकड़ा नहीं जाता और उन्हें उचित सज़ा नहीं मिलती तब तक अपने पद पर बने रहना ठीक नहीं है।
इसी भावना से प्रेरित होकर उन्होंने अपना इस्तीफ़ा सौंपा यह ऐसा मामला नहीं था जिसे हम बस स्वीकार या अस्वीकार कर सकें। ट्रस्ट के संविधान के अनुसार, इस्तीफ़ा सौंपते ही उसे स्वीकार मान लिया जाता है।
श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की गिनती के दौरान कथित चोरी और गबन के मामले में गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है।
उत्तर प्रदेश शासन ने 25 जून 2026 को इस रिपोर्ट की प्रति श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को भेजते हुए तथ्यों से अवगत कराया है।
ए सआईटी की जांच के अनुसार, 27 अप्रैल 2026 से 5 जून 2026 के बीच उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज में गिनती कक्ष के अंदर कई बार कर्मचारियों को नोटों की गड्डियां और खुले रुपये अपने कपड़ों, जेबों, जूतों व अन्य स्थानों पर छिपाते हुए देखा गया। जांच रिपोर्ट में ऐसे करीब 70 संदिग्ध मामलों का उल्लेख किया गया है।
जांच में यह भी सामने आया कि यह कोई एक-दो घटनाएं नहीं थीं, बल्कि कई दिनों तक दोहराई जाने वाली एक व्यवस्थित प्रक्रिया थी। रिपोर्ट के अनुसार गिनती कक्ष में निर्धारित सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया।
प्रवेश और निकास के समय तलाशी नहीं ली गई, कर्मचारियों के निजी सामान पर प्रभावी नियंत्रण नहीं था, कई हंडियों की नकदी मिलाकर गिनी जाती थी और मूल्यवान वस्तुओं के रिकॉर्ड एवं सत्यापन में भी गंभीर कमियां पाई गईं।
एसआईटी ने छह लोगों की प्रथम दृष्टया संलिप्तता बताई है। इनमें अविनाश शुक्ला, अनुकूल मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रामशंकर मिश्र का नाम शामिल है।
रिपोर्ट के अनुसार, जांच से पहले ही कुछ कर्मचारियों से लगभग 78.94 लाख रुपये की बरामदगी का संकेत मिला। इसके अलावा 4 जून 2026 को गिनती कक्ष से लगभग 2.25 लाख रुपये की अतिरिक्त बरामदगी का भी उल्लेख किया गया है।
एसआईटी ने यह भी पाया कि संबंधित कर्मचारियों के बैंक खातों में उनकी घोषित आय की तुलना में अधिक नकद जमा और वित्तीय लेन-देन मिले हैं, जिनकी विस्तृत जांच की आवश्यकता बताई गई है।
रिपोर्ट में ट्रस्ट की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच के मुताबिक सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, एसओपी के अनुपालन, तलाशी व्यवस्था और पर्यवेक्षण में गंभीर लापरवाही रही, जिससे चोरी और गबन जैसी घटनाओं को रोकने में विफलता हुई।
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