मजदूरों को जल्द मिलेगी राहत: हाईकोर्ट ने तीन दिन में भुगतान शुरू करने के दिए निर्देश
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हुकमचंद मिल के हजारों मजदूरों का तीन दशक पुराना इंतजार अभी भी खत्म नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 25 दिसंबर को 217.86 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत कर लिक्विडेटर के खाते में ट्रांसफर किए जाने के बावजूद मजदूरों को अब तक भुगतान नहीं मिल सका है।
26 फरवरी तक अंतिम अनुपालन रिपोर्ट पेश करे
मामले में सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए तीन दिन के भीतर भुगतान प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही 26 फरवरी तक अंतिम अनुपालन रिपोर्ट (फाइनल कम्प्लायंस रिपोर्ट) पेश करने को कहा है।
बार-बार टल रही भुगतान प्रक्रिया
इससे पहले 29 जनवरी को हाईकोर्ट ने 15 दिनों के भीतर मजदूरों को भुगतान करने का आदेश दिया था, लेकिन निर्धारित समयसीमा बीत जाने के बाद भी वितरण शुरू नहीं हो पाया। अदालत ने टिप्पणी की कि किसी न किसी कारण से लगातार देरी हो रही है और अब प्रक्रिया में और विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कमेटी में किया गया बदलाव
मजदूरों के दस्तावेजों के सत्यापन और भुगतान प्रक्रिया की निगरानी के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। इसमें सालसा सचिव, तहसीलदार मल्हारगंज और मजदूर संघ के सचिव कृष्णलाल बोकरे शामिल थे। हालांकि अब हाईकोर्ट ने सालसा सचिव के स्थान पर विधिक सलाहकार मनीष कौशिक को समिति में शामिल करने की मंजूरी दे दी है।
2324 मजदूरों के दस्तावेज हो चुके हैं सत्यापित
भुगतान प्रक्रिया में देरी का प्रमुख कारण दस्तावेजों का सत्यापन बताया जा रहा है। कई मामलों में पुराने रिकॉर्ड और दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने से प्रक्रिया अटक रही है। मजदूर संगठनों का कहना है कि जिन मजदूरों के दस्तावेज पूरी तरह सत्यापित हो चुके हैं, उन्हें तत्काल भुगतान किया जाना चाहिए। अब तक करीब 2324 मजदूरों के दस्तावेजों का सत्यापन पूरा हो चुका है, जबकि अन्य मामलों में वारिसों और उत्तराधिकारियों के दस्तावेजों की जांच जारी है।
कोर्ट को बताया-खाते खुल चुके हैं
सुनवाई के दौरान प्रशासन की ओर से हाईकोर्ट को बताया गया कि पात्र मजदूरों के बैंक खाते खुल चुके हैं और सत्यापन का कार्य तेजी से चल रहा है। जल्द ही भुगतान शुरू कर दिया जाएगा।
1991 से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे मजदूर
हुकमचंद मिल को 12 दिसंबर 1991 को अचानक बंद कर दिया गया था। उस समय मिल में करीब 5895 मजदूर कार्यरत थे। तब से मजदूर अपने बकाया भुगतान और मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
साल 2007 में हाईकोर्ट ने मजदूरों के लिए 228 करोड़ रुपये मुआवजा निर्धारित किया था। यह राशि मिल की जमीन बेचकर जुटाई जानी थी। बाद में नगर निगम और हाउसिंग बोर्ड के बीच समझौते के तहत मिल की जमीन पर विकास परियोजना का रास्ता साफ हुआ और हाउसिंग बोर्ड ने तय राशि लिक्विडेटर को उपलब्ध करा दी।
सीएम ने किया था भुगतान का ऐलान
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 25 दिसंबर को इंदौर में आयोजित कार्यक्रम में सिंगल क्लिक के माध्यम से 217.86 करोड़ रुपये की राशि जारी की थी। उस समय दावा किया गया था कि एक महीने के भीतर मजदूरों के खातों में पैसा पहुंच जाएगा, लेकिन डेढ़ माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी भुगतान शुरू नहीं हो पाया। अब हाईकोर्ट के ताजा निर्देशों के बाद हजारों मजदूरों को उम्मीद है कि उनके तीन दशक पुराने संघर्ष का जल्द अंत होगा और उन्हें उनका बकाया हक मिल सकेगा।
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