क्या फिर बच निकलेगा नाना: अफसर नए तो भी क्या नतीजा होगा वही; साक्ष्य के नाम पर कार्रवाई को ठंडे बस्ते में डालने की तैयारी
KHULASA FIRST
संवाददाता

तब भी पीछे हटी थी और अब भी हट रही पुलिस
तब दो बार फजीहत से बचने छोड़ा था, अब तक हो रही छीछालेदर
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
हाई-प्रोफाइल ब्राउन शुगर कांड में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के भाई कुलभूषण उर्फ नाना पटवारी का नाम सामने आने के बाद एक बार फिर इंदौर पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। पिछले आठ वर्षों में यह तीसरा (19 जुलाई 2018 में खुशी कुलवाल केस और दिसंबर 2020 का विजय नगर थाने का ड्रग्स केस) मौका है, जब नाना पटवारी का नाम किसी गंभीर मामले में उछला, लेकिन हर बार जांच आगे बढ़ने के बावजूद कार्रवाई अधूरी रह गई।
इस बार भी पुलिस ने मेमो के आधार पर एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, लेकिन जिस नाना पटवारी तक ड्रग्स पहुंचाने की बात कही जा रही है, वह अब तक आरोपी नहीं बनाया गया। यही सवाल अब पुलिस की कार्यशैली पर खड़े हो रहे हैं।
यानी कहा जा सकता है अफसर बदल गए, लेकिन नाना पर कार्रवाई का नतीजा वही होना है, जो वर्षों पहले दो बार दोहराया जा चुका है। यानी नाना पटवारी के कारण इस बार भी इंदौर पुलिस की छीछालेदर होना है।
उल्लेखनीय है पिछले गुरुवार को राजेंद्र नगर पुलिस ने इरफान उर्फ गोलू चंदेरी और संजय उर्फ रॉनी कौशल को 10.8 ग्राम ब्राउन शुगर के साथ पकड़ा था। दोनों ने ड्रग्स नाना पटवारी और मानव गंगवानी के कहने पर ले जाने की बात कही थी।
आरिफ उर्फ भूरू बैंड उर्फ राजू खान का नाम भी बताया था। इरफान और रॉनी को सात दिन के रिमांड पर लेने के बाद पुलिस ने भूरू की गिरफ्तारी ले ली, लेकिन नाना पटवारी और मानव गंगवानी को दो बार पूछताछ के बाद छोड़ दिया गया।
पुलिस को उसके ड्रग्स लेने के सारे सबूत मिल चुके हैं। भूरू बैंड ने भी उसके कहे पर ड्रग्स सप्लायर का नाम बताया था। डीसीपी जोन-1 नरेंद्रसिंह रावत की जांच में नाना पटवारी के खिलाफ क्रिकेट की सट्टेबाजी, सट्टेबाजी को लेकर आर्थिक लेनदेन और सट्टेबाजी से जुड़ी दो वेबसाइट के साथ एक हिमांशु नाम की एक आईडी सामने आई थी।
इससे पहले पुलिस ने दो महिलाओं के बयान भी लिए, जिनमें पलसीकर कॉलोनी निवासी युवती ने शुभम वैली कॉलोनी के प्लॉट को लेकर रुपयों के लेनदेन की बात बताई थी। नाना ने जमीन का एग्रीमेंट मिया था।
सौदे के बाद जमीन की रजिस्ट्री नहीं कराई और दाम बढ़ने पर उसे किसी अन्य को बेच दिया। यानी जमीन की धोखाधड़ी का मामला भी सामने आ चुका है, लेकिन पुलिस ने अब भी उस पर कार्रवाई नहीं की। हालांकि कल नाना को नोटिस देकर तलब किया गया था, लेकिन शहर से बाहर होने के कारण वह जांच टीम के सामने उपस्थिति नहीं हुआ।
मानव गंगवानी और बंटी असरानी को भी आगामी दो दिन में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। पुलिस अभी भी अमितेश नगर और न्यूयॉर्क सिटी के उन दो फ्लैट में जांच के लिए नहीं गई, जहां नाना और उसकी मंडली के लोगों द्वारा ड्रग्स का नशा और अय्याशियां करने की बात सामने आई है।
वर्तमान में बीएनएस और बीएनएसएस लागू होने के बाद पुलिस चाहे तो नाना और मानव के साथ उसके आधा दर्जन साथियों की मंडली को संगठित अपराध की धारा के तहत आरोपी बना सकती है।
मेडिकल करा लेते तो भी बन जाता आरोपी
पुलिस ने जब इरफान उर्फ गोलू चंदेरी और संजय उर्फ रॉनी कौशल को पकड़ा तो सामने आया था कि नाना पटवारी ने गत गुरुवार को हिरासत में लिए जाने से एक दिन पहले भी ड्रग्स ली थी, लेकिन पुलिस ने इसी दिन उसका मेडिकल नहीं कराया।
कराए जाने पर उसके खून में ड्रग्स लेने की पुष्टि हो सकती थी। तब पुलिस उसे 8/27 एनडीपीएस एक्ट में आसानी से आरोपी बना सकती थी। जानकारों का कहना है कि नाना को 29 एनडीपीएस एक्ट में आज भी आरोपी बनाया जा सकता है।
2018... 2020... और अब 2026
उल्लेखनीय है कि साल 2020 में विजय नगर टीआई तहजीब काजी ने ड्रग्स रेकेट के खिलाफ कार्रवाई की थी। मानव तस्करी और ड्रग्स के देह व्यापार कराने सहित इंदौर के पबों में बड़े पैमाने पर ड्रग्स खपाने वाले गिरोह का खुलासा करते हुए 60 से ज्यादा आरोपियों को पकड़ा था। तब एनडीपीएस एक्ट धारा 8 व 22 के तहत केस (अपराध क्रमांक 1008/20) दर्ज हुआ था।
मामले में गिरफ्तार आरोपी धीरज और सेंधवा के सोहन उर्फ जोजो ने 7 दिसंबर 2020 को अपने कथन में नाना भाई उर्फ नाना पटवारी का नाम लिया था। तब आरिफ उर्फ भूरू बैंड भी गिरफ्तार हुआ था। उसने भी नाना का नाम लिया था।
बावजूद इसके तत्कालीन अफसरों ने नाना के खिलाफ कार्रवाई नहीं की। कहा गया कि उसका नाम सिर्फ ड्रग्स पीने में आया है, सप्लायर और पैडलर तो पकड़ ही लिए हैं। यानी अफसर राजनीतिक और मीडिया ट्रायल की फजीतेबाजी का हवाला देकर ठंडे पड़ गए थे। इसका फायदा उठाकर नाना पटवारी प्रदेश से बाहर भाग गया था।
हालांकि जोजो की गिरफ्तारी के दौरान नाना के सीहोर के एक फार्म हाउस में होने की खबर थी। पुलिस टीम के पहुंचने से पहले ही वह भाग निकला था। इसके बाद आरोपियों की जमानत होने के बाद ही वह सामने आया, लेकिन तब तक पूरा मामला ठंडे बस्ते में जा चुका था।
हालांकि तत्कालीन टीआई ने केस को सीआरपीसी 173(8) में डाल दिया था। इसके तहत केस की विवेचना जारी रहती है यानी कोई भी नया टीआई चाहता तो नाना पटवारी को केस में आरोपी बना सकता था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। तब पूर्वी क्षेत्र के एसपी आशुतोष बागरी व एएसपी राजेश रघुवंशी थे।
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