तीसरा कौन: मध्य प्रदेश में दांव पर राहुल की साख; कांग्रेस में राज्यसभा उम्मीदवार नटराजन का विरोध, भाजपा को मिला मौका
KHULASA FIRST
संवाददाता

कमलनाथ, दिग्विजय सिंह व अरुण यादव थे प्रबल दावेदार, राहुल गांधी की पसंद हैं नटराजन...
कांग्रेस के राज्यसभा के संभावित उम्मीदवारों में नटराजन को शुभकामनाएं देने में दिखाई कंजूसी
मैदानी व जनता के बीच लोकप्रिय नेता की जगह आमजन से दूर मीनाक्षी की उम्मीदवारी का विरोध मुखर हुआ
भाजपा को घर बैठेमिला बड़ा मौका, कांग्रेसी फूट से तीसरे उम्मीदवार की उम्मीदें परवान चढ़ीं
भाजपा के कद्दावर नेता विजयवर्गीय की दो-टूक- नेतृत्व के इशारे का इंतजार, जीत लेंगे तीसरी सीट
भाजपा के तरुण चुघ, रजनीश अग्रवाल आज दाखिल करेंगे नामांकन, एमपी में अभी 228 वोटर्स
नटराजन का नाम एमपी कांग्रेस को नहीं हुआ हजम, क्रॉस वोटिंग का मंडराया खतरा
नितिन मोहन शर्मा 94250-56033 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राज्यसभा चुनाव के प्रतिष्ठापूर्ण मुक़ाबले में मध्य प्रदेश में राहुल गांधी की साख व धाक दांव पर लग गई हैं। राहुल बाबा ने इस चुनाव में अपने दल के स्थानीय ‘मठाधीशों’ को सिरे से दरकिनार कर दिया।
उन्होंने राज्यसभा की एक सीट के लिए महिला नेता का चयन कर सबको वैसे ही चौंकाया, जैसे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने रजनीश अग्रवाल के नाम के साथ पार्टी के स्थानीय क्षत्रपों को चौंका दिया।
मीनाक्षी नटराजन जैसी ‘भली मानुष’ का राहुल द्वारा चयन किसी भी सूरत में गलत नहीं। वे राज्यसभा जैसे उच्च व भद्रलोक के लिए डिजर्व करती हैं, लेकिन कांग्रेस में कहां इतनी आसानी से राजनीतिक ‘कड़े’ फैसले ‘उदरस्थ’ होते हैं।
राहुल गांधी के चयन को कांग्रेस के स्थानीय क्षत्रपों ने अपना ‘अपमान’ माना। पार्टी द्वारा तय उम्मीदवार को औपचारिक शुभकामनाएं देने तक से परहेज कर या देने में भी अनमनापन प्रकट कर पार्टी के ‘तपे-तपाए’ और ‘घुटे-घुटाए’ नेताओं ने अपने इरादे साफ कर दिए कि ‘ये न चोलबे’..! नतीजतन भाजपा के लिए एक बार फिर कांग्रेस ने एक अतिरिक्त सीट जीतने का अवसर दे दिया।
कारण, राहुल के दल की भितरघात। अब ये राहुल गांधी पर है कि वे इसे रोक पाएंगे?
खुलासा फर्स्ट ने कल ही लिखा था कि वह कांग्रेसी ही क्या, जो अपने ही दल से दो-दो हाथ न करे। चाहे वह विधानसभा-लोकसभा, नगरीय निकाय के आम चुनाव हों या फिर राज्यसभा के प्रतिष्ठित चुनाव।
इस पक्के इंदौरी अखबार ने ये भी स्पष्ट लिख दिया था कि नटराजन के नाम पर नाराजगी व भितरघात का खतरा मंडराया। भाजपा में तीसरे उम्मीदवार की अटकलें तेज की पंक्तियां भी कल लिपिबद्ध कर दी गई थीं। ठीक वो ही हालात राज्यसभा सीट के चुनाव में मध्य प्रदेश में निर्मित हो गए हैं।
मामला उच्च सदन राज्यसभा के उच्च स्तरीय चुनाव से जुड़ा है। मध्य प्रदेश में इस सदन के लिए तीन सीटें रिक्त हुई हैं। इनमें 2 भाजपा की हैं व 1 कांग्रेस कोटे से। कायदे से ये ही अंकगणित ताजा चुनाव में भी रहना हैं।
लिहाजा दोनों दल ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी। भाजपा के तो दोनों उम्मीदवार रजनीश अग्रवाल व तरुण चुघ आज, यानी शनिवार को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मौजूदगी में सुबह 11.30 बजे नामांकन दाखिल भी कर देंगे, लेकिन कांग्रेस का अब तक कुछ स्पष्ट नहीं।
राज्यसभा के इस अहम चुनाव में वोटर्स विधायक रहेंगे और उनका अंकगणित पुनः 2 सीट भाजपा व 1 सीट कांग्रेस को दे रहा है। 230 की संख्या वाले सदन में फिलहाल 228 विधायक वोट डालेंगे। दो विधायक तकनीकी कारणों से वोटिंग से वंचित रहेंगे।
बावजूद इसके कांग्रेस को एक सीट जीतने में कोई परेशानी है भी नहीं। प्रतिद्वंद्वी भाजपा ने भी उसकी एक सीट की जीत में कोई बाधा नहीं पैदा की। दिल्ली से शीर्ष नेतृत्व ने दो-टूक कह भी दिया था कि हम कायदे-कानून से 2 सीट से आगे का नहीं सोच रहे।
लेकिन सिर्फ भाजपा की कांग्रेस के प्रति सदाशयता से क्या होना जाना? लिहाजा कांग्रेस में ही विरोध के स्वर सामने आ गए कि पार्टी सुप्रीमो ने उम्मीदवार तय किया है, वह जनता से दूर नेता हैं।
दूसरा दबा विरोध उन नेताओं की तरफ से भी सामने आया, जो इस एक सीट पर स्वयं को उम्मीदवार माने हुए थे। ऐसे नेताओं ने अपने ही दल की राज्यसभा के लिए तय हुई महिला नेता को बधाई देने में कंजूसी दिखाकर साफ कर दिया कि पार्टी प्रत्याशी हजम नहीं हुआ।
इसके बाद भाजपा कब तक राजनीतिक रूप से साधु बनी रहती? लिहाजा पार्टी के लिए एक अतिरिक्त सीट और झपट लेने का अवसर खुल गया। उसी दिल्ली दरबार ने इशारा कर दिया है कि देखो, संभावना टटोलो, जीत तय दिखती है तो उतार दो तीसरा उम्मीदवार भी।
बस, इस इशारे के बाद भाजपा के अंदरखाने तीसरी सीट की तैयारियों ने दम पकड़ लिया। उम्मीद वही हमेशा की तरह कांग्रेस से ही है कि कांग्रेस के विधायक क्रॉस वोटिंग करेंगे। अन्यथा वोट का अंकगणित भाजपा के पक्ष में नहीं है।
कांग्रेस की आपसी खींचतान का फायदा भाजपा को साफ नजर आ रहा है। लिहाजा अब कमलदल में तीसरा कौन? की तलाश शुरू हो गई है। यानी दो तयशुदा पार्टी प्रत्याशी के अलावा तीसरा नेता ऐसा कौन हो, जिसके नाम से दल में भी किचकिच न हो और कांग्रेस में भी वह असरकारी हो।
इस दौड़ में पीछे रह गए दिग्गज नेताओं की इस ‘तीसरा कौन’ की तलाश ने बांछें खिला दी हैं। दौड़ से बाहर हो गए ऐसे क्षत्रपों के लिए ये अवसर एक बड़ी लाइफ लाइन जैसा है। बस, कांग्रेस की फूट बरकरार रहे।
कांग्रेस के अंदर पसरा गुस्सा अगर जोर पकड़ता है, तो जोड़-जमावट में माहिर किसी भाजपा के बड़े नेता की लॉटरी लग भी सकती है, लेकिन पेंच फंस गया है जातिगत समीकरण का। अभी पार्टी की तरफ से एमपी कोटे से दोनों उम्मीदवार सामान्य वर्ग से हैं।
ऐसे में तीसरा उम्मीदवार दलित, आदिवासी, पिछड़ा वर्ग से होने की उम्मीद बलवती है, जबकि ‘तीसरा कौन’ के अधिकांश दावेदार सामान्य-सवर्ण वर्ग से हैं। बावजूद इसके मध्य प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का मामला दिलचस्प हो गया है। भाजपा के कद्दावर नेता कैलाश विजयवर्गीय ने ये कहकर कांग्रेस की नींद उड़ा दी है कि शीर्ष नेतृत्व का इशारा मिलते ही हम तीसरी सीट पर भी विजयश्री वरण कर लेंगे।
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