ईमानदार कौन...पुलिस या जीएसटी विभाग: खुलासा फर्स्ट की पड़ताल के बाद बड़ा सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

मामला टैक्स चोरी की शंका में पकड़े गए दो ट्रकों का छोड़ने का
खुलासा फर्स्ट...इंदौर।
टैक्स चोरी के संदेह में दो ट्रकों को पकड़ने के बाद अवैध वसूली के आरोप पर मामला संबंधित विभाग को सौंपकर परदेशीपुरा पुलिस ने पल्ला तो झाड़ लिया, लेकिन जीएसटी विभाग भी कम नहीं निकला। इसका खुलासा तब हुआ, जब खुलासा फर्स्ट ने मामले की तह तक जाकर जानकारी जुटाई। सूत्रों के मुताबिक ट्रकों के साथ मिले बिल फर्जी पाए गए, इसके बावजूद न तो माल का नियमानुसार सत्यापन किया गया और न ही वास्तविक बाजार मूल्य के आधार पर कर निर्धारण हुआ। पूरे घटनाक्रम में ऐसा खेल खेला गया, जिससे विभाग को लाखों रुपए के राजस्व का नुकसान पहुंचा, जबकि व्यापारी को बड़ा लाभ मिल गया। मामले में पुलिस और जीएसटी विभाग के कुछ अधिकारियों की ईमानदारी पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
उल्लेखनीय है तीन दिन पहले परदेशीपुरा थाने के एसआई दीपक जामोद ने मुखबिर की सूचना पर अग्रवाल ग्रुप के परदेशीपुरा स्थित गोदाम (महेश्वरी एल्युमिनियम) से दो ट्रक (एमपी 09 एएच 5716 और एमपी 09 बीएन 0446) जब्त किए थे। पुलिस ने दोनों ट्रकों के ड्राइवरों को भी हिरासत में लेकर थाने में बैठा दिया था। मामले में हंगामा मचा और एसआई जामोद पर प्रति ट्रक छोड़ने के बदले 2-2 लाख रुपए मांगने के आरोपों की शिकायत अफसरों तक पहुंची तो एसआई जामोद ने गेंद संबंधित विभाग (जीएसटी) के पाले में डालकर (जीएसटी कमिश्नर अनय िद्ववेदी) पल्ला झाड़ लिया। हालांकि, ऐसा कर एसआई दीपक जामोद खुद को कितना ईमानदार साबित कर पाए, ये तो बाद की बात है, लेकिन सूत्रों का कहना है जीएसटी विभाग की भूमिका भी इस पूरे खेल में संदिग्ध पाई गई है।
खुलासा फर्स्ट की पड़ताल में हुआ यह खुलासा
खुलासा फर्स्ट की पड़ताल में खुलासा हुआ है कि माहेश्वरी एल्यूमिनियम से पकड़े गए दोनों ट्रकों के साथ मिले बिल संदिग्ध हैं। ट्रकों के साथ जो दस्तावेज मिले थे, वे अस्थायी और संदिग्ध थे। इसके बावजूद संबंधित अधिकारी ने न तो माल का न पूरा सत्यापन कराया, न वजन और न ही बाजार मूल्य का आकलन कराया। मात्र 100 रुपए प्रति किलो की दर से माल का मूल्य मानकर जीएसटी की गणना की गई। उसी दिन दोनों ट्रकों को छोड़ दिया गया।
एल्युमिनियम के भाव और निर्धारण में भारी अंतर
सूत्रों का दावा है ट्रकों में 15 टन से अधिक शुद्ध एल्युमिनियम लदा था। बाजार में इसका भाव 350 रुपए प्रति किलो से अधिक है, जबकि एल्युमिनियम स्क्रैप (भंगार) का मूल्य भी 200 रुपए प्रति किलो से ऊपर है। विभाग ने माल की गणना नहीं की और साठगांठ कर टैक्स नहीं लगाया। माल का मूल्य मात्र 100 रुपए प्रति किलो मानकर निर्धारण किया गया, जो कि गंभीर सवाल खड़े करता है। बड़ा सवाल ये है कि माल का वास्तविक मूल्यांकन क्यों नहीं किया गया?
जीएसटी विभाग को 12 लाख के राजस्व का नुकसान
यदि टैक्स चोरी के मामले में नियमानुसार पेनल्टी भी जोड़ी जाती तो विभाग को करीब 18 लाख रुपए तक का राजस्व मिल सकता था, लेकिन सेटिंग से हुए कम मूल्यांकन के कारण विभाग को लगभग 12 लाख रुपए तक के संभावित राजस्व का नुकसान हुआ। नियमानुसार देखा जाए तो माल का ई-वे बिल होना अनिवार्य है। यदि ई-वे बिल नहीं होता है, तो टैक्स चोरी कहलाएगी और इन दोनों ट्रकों पर ई-वे बिल नहीं पाए गए तो विभाग के अधिकारी ने जुर्माना क्यों नहीं लगाया? विशेषज्ञों के अनुसार टैक्स चोरी के संदेह में पकड़े गए माल का पहले भौतिक सत्यापन, वजन और दस्तावेजों का मिलान किया जाता है। इसके बाद वास्तविक मूल्य के आधार पर वैधानिक कार्रवाई होती है। ऐसे मामलों में केवल दस्तावेजों के आधार पर तत्काल वाहन छोड़ने की प्रक्रिया सामान्य नहीं मानी जाती।
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