कैंसर अस्पताल में करोड़ों की मशीन पर टपक रहा पानी: अधूरे निर्माण से इंस्टॉलेशन अटका; मरीजों को इलाज के लिए करना होगा इंतजार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
शासकीय कैंसर अस्पताल में कैंसर मरीजों को आधुनिक रेडियोथैरेपी सुविधा देने के लिए करीब 43 करोड़ रुपए की लीनियर एक्सेलेरेटर और रेडियोथैरेपी डेडिकेटेड सीटी मशीन तो पहुंच गई, लेकिन इनके जरिए इलाज शुरू होने का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है।
मशीन इंस्टॉल करने के लिए जिस रेडियोथैरेपी विभाग को तैयार किया जा रहा है, उसका सिविल वर्क अब तक पूरा नहीं हुआ है।
स्थिति यह है कि करोड़ों रुपए की मशीनों के बॉक्स अधूरी बिल्डिंग के कमरों में रखे हैं और बारिश के दौरान यहां पानी पहुंच गया।
रेडियोथैरेपी विभाग के टीपीएस रूम से लेकर लीनियर एक्सेलेरेटर के बंकर तक में पानी आने की स्थिति सामने आई है। ऐसे में महंगे उपकरणों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
मशीन के इंस्टॉलेशन के लिए जरूरी प्लेटफॉर्म भी अभी तैयार नहीं है। सिविल वर्क अधूरा होने के कारण मशीन इंस्टॉल करने वाली कंपनी वेरियन मेडिकल सिस्टम्स के कर्मचारियों का काम भी प्रभावित हो रहा है।
अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक, पहले साल के अंत तक सुविधा शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन अब मार्च 2027 तक मरीजों को इसका लाभ मिलने की संभावना है।
टीपीएस रूम में पानी, यहीं लगने हैं मशीन के कंप्यूटर
कैंसर अस्पताल की नई बिल्डिंग में रेडियोथैरेपी विभाग ग्राउंड फ्लोर पर बनाया जा रहा है। इस हिस्से का निर्माण कार्य पीडब्ल्यूडी की पीआईयू यूनिट के जिम्मे है, लेकिन विभाग का सिविल वर्क अभी पूरा नहीं हुआ है।
हाल की बारिश में रेडियोथैरेपी विभाग के टीपीएस रूम में पानी पहुंच गया। इसी कमरे में मशीन के संचालन से जुड़े कंप्यूटर व अन्य सिस्टम लगाए जाने हैं। ऐसे में बारिश के पानी ने उपकरणों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
जिस बंकर में लगेगी मशीन, वहां भी अधूरा काम
लीनियर एक्सेलेरेटर के लिए बनाए जा रहे बंकर का काम भी अभी पूरा नहीं हुआ है। दीवारों और छत का प्लास्टर नहीं होने के कारण बारिश का पानी अंदर पहुंच रहा है। मशीन लगाने के लिए जरूरी प्लेटफॉर्म भी अभी तैयार नहीं किया गया है।
मशीन के इंस्टॉलेशन से पहले बंकर और उससे जुड़े तकनीकी हिस्सों का सिविल वर्क पूरा होना जरूरी है। यही कारण है कि अस्पताल पहुंच चुकी मशीन का इंस्टॉलेशन भी आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
मशीन के बॉक्स भी बारिश में भीगे
करोड़ों रुपए की मशीनें अस्पताल पहुंचने के बाद उन्हें सुरक्षित और सूखी जगह पर रखना भी बड़ी जिम्मेदारी है। लेकिन जिस हिस्से में मशीन के बॉक्स रखे गए हैं, वहां बारिश के दौरान पानी टपकने की स्थिति सामने आई।
मशीन के बॉक्स के भीगने से उपकरणों की सुरक्षा को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, मशीन को कोई नुकसान हुआ है या नहीं, इसकी स्थिति इंस्टॉलेशन और तकनीकी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
17 करोड़ का भुगतान अटका, निर्माण की रफ्तार धीमी
रेडियोथैरेपी विभाग का काम पूरा होने में फंड की कमी भी बड़ी अड़चन बनी हुई है। निर्माण कार्य कर रही पीआईयू को संबंधित विभाग से करीब 17 करोड़ रुपए के बकाया भुगतान का इंतजार है।
फंड उपलब्ध नहीं होने के कारण निर्माण कार्य की रफ्तार प्रभावित होने की बात सामने आ रही है। इसका सीधा असर मशीन के इंस्टॉलेशन की तैयारियों पर भी पड़ रहा है।
ट्रांसफॉर्मर के लिए 36 लाख रुपए भी बाकी
लीनियर एक्सेलेरेटर को संचालित करने के लिए जरूरी विद्युत व्यवस्था भी अभी पूरी नहीं हुई है। मशीन के लिए अलग ट्रांसफॉर्मर लगाया जाना है। इसके लिए एमपीईबी को करीब 36 लाख रुपए का भुगतान किया जाना है।
फंड की कमी के चलते ट्रांसफॉर्मर से जुड़ा काम भी अब तक अटका हुआ है। यानी मशीन इंस्टॉल करने से पहले अस्पताल में सिविल वर्क के साथ-साथ बिजली से जुड़ी जरूरी व्यवस्थाएं भी पूरी करनी होंगी।
आधुनिक मशीन के बावजूद मरीजों का इंतजार बढ़ा
अस्पताल में लीनियर एक्सेलेरेटर आने के बाद उम्मीद थी कि कैंसर मरीजों को रेडियोथेरेपी के लिए आधुनिक और अधिक सटीक उपचार सुविधा जल्द मिल सकेगी। यह मशीन फोरडी प्लानिंग आधारित रेडियोथेरेपी जैसी आधुनिक तकनीक के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
लेकिन मशीन पहुंचने के बावजूद अधूरा सिविल वर्क, बंकर की तैयारी, बिजली की व्यवस्था और फंड की कमी के कारण इसका संचालन अटक गया है। ऐसे में मरीजों को अत्याधुनिक सुविधा के लिए अभी और इंतजार करना पड़ेगा।
अधूरे काम के कारण इंस्टॉलेशन में देरी : अधीक्षक
शासकीय कैंसर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. रमेश आर्य ने भी माना कि रेडियोथेरेपी विभाग का सिविल वर्क पूरा नहीं होने के कारण मशीन इंस्टॉल करने में देरी हो रही है।
अब सवाल...43 करोड़ की मशीन का इंतजार कब खत्म होगा?
मशीन अस्पताल पहुंच चुकी है, लेकिन उसे मरीजों तक पहुंचने में अभी कई काम पूरे होने बाकी हैं। सिविल वर्क, बंकर, मशीन प्लेटफॉर्म, इलेक्ट्रिकल इंफ्रास्ट्रक्चर और ट्रांसफॉर्मर की व्यवस्था पूरी होने के बाद ही इंस्टॉलेशन की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
ऐसे में 43 करोड़ रुपए की अत्याधुनिक मशीन अस्पताल में मौजूद होने के बावजूद मरीजों को इसका लाभ मिलने में मार्च 2027 तक का समय लगने की संभावना है।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि पीआईयू को लंबित फंड कब मिलता है और अधूरा निर्माण कार्य कितनी तेजी से पूरा किया जाता है।
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