वीडियो देखिये, डॉक्टर बनने का सपना आंखों में लिए पहुंची छात्रा बिलख कर रो पड़ी: कुछ पल की देरी से छूट गई नीट परीक्षा; फूट-फूटकर रो पड़े पिता भी
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, विदिशा।
डॉक्टर बनने का सपना आंखों में लिए विदिशा जिले की एक छात्रा रविवार को परीक्षा केंद्र तक तो पहुंची, लेकिन किस्मत ने ऐसा साथ छोड़ा कि उसे परीक्षा हॉल में प्रवेश नहीं मिल सका। रास्ते में बाइक पंचर हो गई, फिर तेज बारिश ने रफ्तार रोक दी। जब तक वह केंद्र पहुंची, प्रवेश का निर्धारित समय निकल चुका था। बेटी की परीक्षा छूटते ही पिता का दर्द छलक पड़ा और वे सेंटर के बाहर फूट-फूटकर रोने लगे।
यह भावुक दृश्य विदिशा के गर्ल्स कॉलेज परीक्षा केंद्र का है, जहां री-नीट परीक्षा के दौरान तीन छात्राएं अलग-अलग कारणों से परीक्षा देने से वंचित रह गईं। इनमें सबसे ज्यादा चर्चा रागिनी विश्वकर्मा की हो रही है, जिसकी कहानी सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं।
गांव से बड़े सपने लेकर निकली थी रागिनी
कुरवाई तहसील के कूला गांव की रहने वाली रागिनी विश्वकर्मा रविवार सुबह अपने पिता के साथ बाइक से परीक्षा देने निकली थी। परिवार ने समय का पूरा ध्यान रखा था और वे निर्धारित समय से काफी पहले घर से रवाना हुए थे। लेकिन रास्ते में अचानक बाइक पंचर हो गई।
पिता और बेटी ने किसी तरह बाइक ठीक करवाई और आगे बढ़े, लेकिन तभी मौसम ने भी इम्तिहान लेना शुरू कर दिया। तेज बारिश शुरू हो गई और कई जगह जलभराव के कारण उन्हें रुकना पड़ा। इन परिस्थितियों में कीमती समय निकलता चला गया।
दो मिनट नहीं, किस्मत से हार गई छात्रा
काफी मशक्कत के बाद रागिनी परीक्षा केंद्र पहुंची, लेकिन तब तक प्रवेश की निर्धारित समय सीमा समाप्त हो चुकी थी। परीक्षा केंद्र पर मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों से परिजनों ने गुहार लगाई।
मानवीय आधार पर छात्रा को अंदर ले जाकर प्रक्रिया पूरी कराने की कोशिश भी की गई, लेकिन बायोमेट्रिक सत्यापन और दस्तावेज जांच के दौरान समय सीमा पूरी हो चुकी थी। एनटीए के सख्त दिशा-निर्देशों के कारण अधिकारियों ने असमर्थता जताई और रागिनी को परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिल सकी।
बेटी की परीक्षा छूटी तो टूट गए पिता
जब यह स्पष्ट हो गया कि रागिनी परीक्षा नहीं दे पाएगी, तब उसके पिता खुद को संभाल नहीं सके। वे परीक्षा केंद्र के बाहर ही बैठ गए और फूट-फूटकर रोने लगे। आसपास मौजूद लोग उन्हें समझाते रहे कि इसमें उनकी कोई गलती नहीं है और बेटी अगले साल फिर परीक्षा दे सकती है, लेकिन एक पिता के लिए उस क्षण अपनी बेटी के टूटते सपने देखना बेहद पीड़ादायक था। उनका कहना था कि वे समय से निकले थे, लेकिन रास्ते की परिस्थितियों ने सब कुछ बिगाड़ दिया।
सालभर की मेहनत एक पल में बेकार
रागिनी ने बताया कि उसने पूरे साल मेहनत कर परीक्षा की तैयारी की थी। परिवार को भी इस परीक्षा से काफी उम्मीदें थीं। लेकिन रास्ते में हुई अप्रत्याशित घटनाओं ने उसकी मेहनत पर पानी फेर दिया। उसका कहना था कि यदि बाइक पंचर नहीं होती और बारिश रास्ता नहीं रोकती, तो वह समय पर परीक्षा केंद्र पहुंच जाती। परीक्षा छूटने के बाद छात्रा भी काफी देर तक रोती रही।
दो अन्य छात्राओं का भी टूटा सपना
इसी परीक्षा केंद्र पर दो अन्य छात्राएं भी परीक्षा देने से वंचित रह गईं। स्नेहा दुबे निर्धारित समय के कुछ मिनट बाद पहुंची थीं। उन्हें अंदर ले जाकर प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन समय सीमा समाप्त होने के कारण उनका बायोमेट्रिक सत्यापन पूरा नहीं हो सका।
वहीं, एक अन्य छात्रा अक्षत श्रीवास्तव गलती से पुराना एडमिट कार्ड लेकर परीक्षा केंद्र पहुंच गई। दस्तावेज जांच के दौरान यह त्रुटि सामने आई और उसे भी परीक्षा में शामिल होने की अनुमति नहीं मिल सकी।
नियमों के आगे बेबस दिखे अधिकारी
नीट की नोडल अधिकारी और केंद्रीय विद्यालय की प्राचार्य गीता भदौरिया ने कहा कि छात्राओं और उनके परिजनों की पीड़ा समझी जा सकती है, लेकिन परीक्षा संचालन से जुड़े नियम बेहद सख्त हैं। निर्धारित समय के बाद प्रवेश देना या तकनीकी प्रक्रिया पूरी कराना संभव नहीं था। उन्होंने अभ्यर्थियों को सलाह दी कि भविष्य में किसी भी बड़ी परीक्षा के लिए कम से कम एक घंटा पहले केंद्र पहुंचें और जरूरी दस्तावेजों की अतिरिक्त प्रतियां भी साथ रखें।
केंद्र के बाहर छाया रहा मायूसी का माहौल
रविवार को गर्ल्स कॉलेज परीक्षा केंद्र के बाहर लंबे समय तक भावुक दृश्य देखने को मिला। तीन छात्राओं की आंखों में आंसू थे और उनके परिजन भी निराश नजर आए।
किसी का सपना दो मिनट की देरी से टूटा, किसी का एक दस्तावेज की गलती से और किसी का रास्ते की मुश्किलों के कारण। रागिनी के पिता की आंखों से बहते आंसू इस बात की गवाही दे रहे थे कि कभी-कभी मेहनत कम नहीं पड़ती, लेकिन किस्मत का एक झटका पूरे साल की तैयारी पर भारी पड़ जाता है।
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