वीडियो देखिये, सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का 19वां दिन: अब तक इतना वजन हो गया कम; बिगड़ती सेहत पर आज हाईकोर्ट में सुनवाई
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, नई दिल्ली।
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक के आमरण अनशन का गुरुवार को 19वां दिन है। लगातार गिरती सेहत के बीच उनकी चिकित्सकीय सुरक्षा को लेकर दायर जनहित याचिका (PIL) पर आज दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई होगी। याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि वांगचुक को तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया जाए तथा आवश्यकता पड़ने पर चिकित्सकीय निगरानी में जबरन पोषण (फोर्स-फीडिंग) उपलब्ध कराया जाए।
सोनम वांगचुक 28 जून से नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के आंदोलन में शामिल हैं। वे राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) में कथित अनियमितताओं के लिए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे, परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार और जवाबदेही सुनिश्चित करने की मांग को लेकर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
हाईकोर्ट ने केंद्र और दिल्ली सरकार से मांगा जवाब
बुधवार को दिल्ली हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से जवाब दाखिल नहीं किया जा सका। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश डी.के. उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सुनवाई गुरुवार तक स्थगित कर दी और दोनों सरकारों से विस्तृत जवाब मांगा।
अदालत के समक्ष दायर याचिका में कहा गया है कि यदि भूख हड़ताल इसी तरह जारी रही तो वांगचुक के जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसलिए उन्हें तत्काल आपातकालीन चिकित्सा सुविधा, जीवनरक्षक उपचार और आवश्यक पोषण उपलब्ध कराया जाना चाहिए।
याचिका में सरकार की निष्क्रियता पर सवाल
याचिकाकर्ता राकेश कुमार सैनी ने अपनी याचिका में कहा है कि किसी भी नागरिक को स्वेच्छा से भूख के कारण मृत्यु के कगार तक पहुंचने देना राज्य की संवैधानिक जिम्मेदारी के विपरीत है। याचिका में सरकार की निष्क्रियता पर चिंता व्यक्त करते हुए मांग की गई है कि केंद्र सरकार आंदोलनकारियों से संवाद शुरू करे और यदि चिकित्सकीय स्थिति गंभीर हो जाए तो अदालत फोर्स-फीडिंग की अनुमति देने पर भी विचार करे।
CJP ने सरकार पर लगाया उदासीनता का आरोप
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने आरोप लगाया है कि छात्रों के हित में आवाज उठाने वाले सोनम वांगचुक की मांगों पर सरकार ने अब तक कोई सकारात्मक पहल नहीं की है। पार्टी के संस्थापक अभिजीत दिपके ने कहा कि सरकार जवाबदेही से बच रही है और उसका रवैया बेहद असंवेदनशील है। उन्होंने कहा कि वांगचुक की स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है, बावजूद इसके सरकार की ओर से बातचीत की कोई गंभीर पहल नहीं की गई है।
18 दिन में 8.9 किलो वजन कम
CJP द्वारा जारी स्वास्थ्य बुलेटिन के अनुसार, भूख हड़ताल शुरू होने के बाद 18 दिनों में सोनम वांगचुक का वजन 8.9 किलोग्राम घटकर 57.15 किलोग्राम रह गया है। डॉक्टरों की टीम प्रतिदिन उनकी स्वास्थ्य जांच कर रही है। बुधवार को जारी मेडिकल रिपोर्ट के अनुसार उनका रक्तचाप 105/76, ब्लड शुगर 80 मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर तथा ऑक्सीजन स्तर 97 प्रतिशत दर्ज किया गया।
चिकित्सकों के अनुसार वह पूरी तरह सचेत हैं, लेकिन लंबे समय तक केवल पानी के सहारे रहने से शरीर पर गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। कमजोरी के कारण उन्हें बैठने और उठने में भी सहारे की आवश्यकता पड़ रही है। जंतर-मंतर पर मौजूद चिकित्सकीय टीम लगातार उनकी निगरानी कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी उठी चिंता
अमेरिका स्थित संगठन हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स ने भी वांगचुक की स्वास्थ्य स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। संगठन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से अपील की है कि आंदोलनकारियों के साथ संवाद स्थापित किया जाए, उनकी मांगों पर स्पष्ट जवाब दिया जाए तथा परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
पहले भी आंदोलन को लेकर रहे विवादों में
सोनम वांगचुक इससे पहले लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर लंबे आंदोलन के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लिए गए थे। उस समय लेह में हुई हिंसा के बाद उन पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए गए थे और उन्हें जोधपुर जेल भेजा गया था, जहां वे लगभग 170 दिनों तक बंद रहे।
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