वीडियो देखिये, प्रतिष्ठित स्कूल में फूड पॉइजनिंग का बड़ा मामला: 100 से ज्यादा बच्चे बीमार; कैंटीन में मिले एक्सपायर्ड खाद्य पदार्थ, कलेक्टर के निर्देश पर जांच करने पहुंची खाद्य विभाग टीम
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर के झलारिया स्थित प्रतिष्ठित शिशुकुंज इंटरनेशनल स्कूल में कथित रूप से दूषित और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री परोसे जाने का मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया है। स्कूल में आयोजित कार्यक्रम के दौरान भोजन करने के बाद 100 से अधिक बच्चों की तबीयत बिगड़ गई। बच्चों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बेचैनी की शिकायत होने पर कई अभिभावक उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और खाद्य विभाग ने तत्काल जांच शुरू कर दी है।
योग दिवस कार्यक्रम के बाद बिगड़ी बच्चों की तबीयत
जानकारी के अनुसार शनिवार को स्कूल में योग दिवस कार्यक्रम आयोजित किया गया था। कार्यक्रम के दौरान केजी से चौथी कक्षा तक के बच्चों को भोजन और पेय पदार्थ वितरित किए गए थे। इसके कुछ घंटों बाद कई बच्चों को पेट दर्द, उल्टी और दस्त की शिकायत होने लगी।
रविवार तक बीमार बच्चों की संख्या लगातार बढ़ती गई। कई अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कूल में परोसे गए भोजन या पानी के कारण बच्चों की तबीयत खराब हुई है। सोमवार को स्थिति ऐसी रही कि केजी से चौथी कक्षा तक के कई बच्चे स्कूल ही नहीं पहुंचे।
कलेक्टर के निर्देश पर कैंटीन में छापा
मामले की जानकारी मिलते ही कलेक्टर शिवम वर्मा ने तत्काल जांच के निर्देश दिए। उनके आदेश पर खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम सोमवार को स्कूल पहुंची और कैंटीन का निरीक्षण किया। जांच के दौरान टीम को कई गंभीर अनियमितताएं मिलीं। अधिकारियों ने कैंटीन में रखे कुछ मसाले और नमकीन उत्पाद एक्सपायरी डेट पार होने के बावजूद उपयोग में पाए जाने की जानकारी दी। इसके बाद टीम ने कैंटीन से खाद्य सामग्री के नमूने जब्त कर लिए।
12 खाद्य पदार्थों के सैंपल लिए गए
खाद्य सुरक्षा विभाग ने जांच के दौरान कुल 12 खाद्य पदार्थों के नमूने लिए हैं। इनमें प्रमुख रूप से राजमा-चावल, पनीर मसाला, राइस, अचार, शरबत, आइसक्रीम, मसाले, नमकीन और अन्य खाद्य सामग्री शामिल हैं। इन सभी नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि बच्चों की तबीयत खराब होने के पीछे वास्तविक कारण क्या था।
अस्पतालों में पहुंचे बच्चे
सूत्रों के अनुसार कई बच्चों को निजी अस्पतालों और क्लीनिकों में उपचार के लिए ले जाया गया। अधिकांश बच्चों की स्थिति फिलहाल सामान्य बताई जा रही है, लेकिन घटना ने अभिभावकों की चिंता बढ़ा दी है। कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया कि बच्चों ने घर लौटते ही पेट दर्द और उल्टी की शिकायत शुरू कर दी थी। कई बच्चों को रातभर चिकित्सकीय निगरानी में रखना पड़ा।
स्कूल प्रबंधन पर उठे सवाल
घटना के बाद स्कूल प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं। अभिभावकों का कहना है कि देश के प्रतिष्ठित स्कूलों में शामिल शिशुकुंज जैसी संस्था में खाद्य सुरक्षा मानकों का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए था। अभिभावकों ने मांग की है कि यदि जांच में लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
कैंटीन सील हो सकती है
कलेक्टर शिवम वर्मा ने स्पष्ट किया है कि यदि जांच में खाद्य सुरक्षा नियमों का उल्लंघन या किसी प्रकार की गंभीर अनियमितता सामने आती है तो स्कूल कैंटीन के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि बच्चों के स्वास्थ्य से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर कैंटीन को सील करने सहित अन्य कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
रिपोर्ट का इंतजार
फिलहाल पूरा मामला प्रयोगशाला रिपोर्ट पर टिका हुआ है। खाद्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय होगा कि बच्चों की तबीयत खराब होने का कारण दूषित भोजन था, एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री थी या फिर कोई अन्य वजह।
उधर, घटना के बाद अभिभावकों में आक्रोश है और वे प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार कर रहे हैं। यदि जांच में खाद्य सामग्री में गड़बड़ी की पुष्टि होती है तो यह शहर के सबसे बड़े स्कूल फूड सेफ्टी मामलों में से एक बन सकता है।
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