वीर भारत न्यास पूरी तरह शासकीय संस्था: कोठी महल पर किसी निजी व्यक्ति का अधिकार नहीं; सरकार ने जारी किया आधिकारिक स्पष्टीकरण
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
उज्जैन के कोठी महल परिसर और वीर भारत न्यास को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट की है। संस्कृति विभाग के अपर मुख्य सचिव शिव शेखर शुक्ला ने कहा कि वीर भारत न्यास पूरी तरह शासकीय एवं सार्वजनिक संस्था है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं
कोठी महल परिसर पर किसी भी निजी व्यक्ति का न तो स्वामित्व है और न ही कोई अधिकार। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर प्रसारित कई दावे तथ्यात्मक रूप से सही नहीं हैं तथा उनका कोई वैधानिक आधार नहीं है।
कोठी महल पूरी तरह शासन की संपत्ति
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि उज्जैन स्थित कोठी महल परिसर मूल रूप से राजस्व विभाग की सरकारी संपत्ति है। सभी आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद इस परिसर को संस्कृति विभाग के माध्यम से वीर भारत न्यास के उपयोग के लिए उपलब्ध कराया गया।
उन्होंने बताया कि किसी भी सरकारी भूमि के हस्तांतरण से पहले नियमानुसार दावे और आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं। उस प्रक्रिया के दौरान किसी भी व्यक्ति या संस्था ने इस भूमि पर कोई दावा या आपत्ति दर्ज नहीं कराई थी। इसलिए यह परिसर पूरी तरह मध्य प्रदेश शासन की संपत्ति है।
2013 में हुआ था वीर भारत न्यास का गठन
शिव शेखर शुक्ला ने बताया कि अप्रैल 2013 में संस्कृति विभाग द्वारा वीर भारत न्यास की स्थापना की गई थी। इसका मुख्यालय भोपाल स्थित रवीन्द्र भवन परिसर में बनाया गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी निजी संस्था के रूप में नहीं, बल्कि सार्वजनिक उद्देश्य की पूर्ति के लिए गठित एक शासकीय न्यास है।
क्या है वीर भारत न्यास का उद्देश्य?
सरकार के अनुसार, वीर भारत न्यास का उद्देश्य भारत की प्राचीन सभ्यता, संस्कृति और इतिहास का संरक्षण, अध्ययन और प्रचार-प्रसार करना है।
इसके प्रमुख कार्यों में भारतीय इतिहास पर शोध एवं अध्ययन, सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण, शोध आधारित पुस्तकों एवं साहित्य का प्रकाशन, भारतीय संस्कृति का प्रचार-प्रसार, ऐतिहासिक तथ्यों को आमजन तक पहुंचाना शामिल है।
मुख्यमंत्री होते हैं पदेन अध्यक्ष
अपर मुख्य सचिव ने बताया कि वीर भारत न्यास का संचालन निर्धारित नियमों के अनुसार किया जाता है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री इस न्यास के पदेन अध्यक्ष होते हैं।
इसके अलावा न्यासी सचिव के रूप में स्वराज संचालनालय के आयुक्त, संचालक या संस्कृति क्षेत्र के किसी विशेषज्ञ की नियुक्ति की जा सकती है।
विशेषज्ञों की नियुक्ति पर आयु सीमा नहीं
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्ष 2013 में न्यास की स्थापना के समय से ही संस्कृति विशेषज्ञों की नियुक्ति के लिए अधिकतम आयु सीमा निर्धारित नहीं की गई है। यह व्यवस्था शुरुआत से लागू है और इसमें कोई नया संशोधन नहीं किया गया है।
उज्जैन में बनेगा वीर भारत संग्रहालय
सरकार ने बताया कि उज्जैन में प्रस्तावित वीर भारत संग्रहालय भारत के इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत करेगा। संग्रहालय में प्राचीन सभ्यता, ऐतिहासिक घटनाओं, महान विभूतियों और भारतीय सांस्कृतिक विकास से जुड़ी जानकारी प्रदर्शित की जाएगी।
7 हजार पृष्ठों का शोध कार्य
अपर मुख्य सचिव के अनुसार, वीर भारत न्यास अब तक भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से जुड़े विभिन्न विषयों पर करीब 7,000 पृष्ठों का शोध एवं अध्ययन आधारित साहित्य प्रकाशित कर चुका है।
सरकार ने अफवाहों पर दी सफाई
संस्कृति विभाग का कहना है कि हाल के दिनों में वीर भारत न्यास और कोठी महल परिसर को लेकर कई तरह की भ्रामक जानकारियां प्रसारित की गईं। इन्हीं को देखते हुए सरकार ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है।
सरकार ने दोहराया है कि वीर भारत न्यास पूरी तरह शासकीय एवं सार्वजनिक संस्था है, कोठी महल परिसर मध्य प्रदेश शासन की संपत्ति है और इस पर किसी भी निजी व्यक्ति का कोई स्वामित्व या अधिकार नहीं है। सभी प्रशासनिक व कानूनी प्रक्रियाएं नियमानुसार पूरी की गई हैं।
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