उज्जैन था भितरघात का एपि सेंटर: प्रदेश की राजनीति में भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को लेकर नई चर्चाएं शुरू
KHULASA FIRST
संवाददाता

पार्टी के अंदर असंतोष और गुटबाजी की अटकलों को मिला बल
कांग्रेस का दावा मामले से जुड़े दस्तावेज और सूचनाएं भाजपा के भीतर से ही निकलीं
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और उनके परिवार की कथित भूमि खरीद को लेकर सामने आए विवाद के बाद प्रदेश की राजनीति में भाजपा के अंदरूनी समीकरणों को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं।
कांग्रेस का दावा है कि इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज और सूचनाएं भाजपा के भीतर से ही बाहर आई हैं, जिससे पार्टी के अंदर असंतोष और गुटबाजी की अटकलों को बल मिला है।
राजनीतिक हलकों में यह चर्चा भी है कि उज्जैन क्षेत्र इस पूरे विवाद का प्रमुख केंद्र एपि सेंटर बनकर उभरा है। प्रदेश की राजनीति में पिछले दिनों मुख्यमंत्री को लेकर उठे राजनीतिक भूचाल से दिल्ली तक तरंगें उठीं, भूचाल के कारण जहां कांग्रेस में उत्साह नजर आया, वहीं भाजपा में सन्नाटा है।
कहा जा रहा है कि मालवा के असंतुष्ट नेताओं ने मीडिया और विपक्ष को गोला-बारूद उपलब्ध करवाया। मुख्यमंत्री से नाराज भाजपा के बड़े नेताओं ने दिल्ली में अपने हिस्से का काम किया और इस तरह से एक बड़ा भूचाल मुख्यमंत्री के खिलाफ आया। सारे कयास मुख्यमंत्री और उनसे नाराज नेताओं के आसपास की चर्चाओं के आधार पर लगाए जा रहे हैं।
उज्जैन छोड़ बाकी प्रदेश में लागू लैंड पूलिंग एक्ट
क्षेत्र के असंतुष्ट नेता कहते रहे हैं कि डॉ. मोहन यादव उज्जैन के नेता हैं, लेकिन लैंड पूलिंग एक्ट से किसान डरे हुए हैं। उनकी जमीन, जो पहले तीन से छह महीने के लिए टेम्पररी तौर पर ली जाती थी, अब परमानेंट ली जा रही है। हालांकि मुख्यमंत्री ने जनभावनाओं का सम्मान करते हुए लैंड पूलिंग एक्ट को उज्जैन में खत्म कर दिया, जबकि शेष प्रदेश में यह लागू है।
आध्यात्मिक शहर बनाने की कवायद... भाजपा सरकार ने 2028 के सिंहस्थ से पहले उज्जैन में 3,300 हेक्टेयर में एक आध्यात्मिक शहर बनाने की योजना की घोषणा की है। साधु-संतों और दूसरे धार्मिक नेताओं को तय जगहों पर अपने ‘आश्रम’ बनाने के लिए जगह दी जाएगी।
इस प्रस्तावित आध्यात्मिक शहर में स्कूल, कॉलेज और रहने की जगह भी होगी, जिन्हें प्राइवेट प्लेयर्स के साथ मिलकर बनाया जाएगा। आलोट एमएलए ने कहा मैं जानना चाहता हूं कि स्पिरिचुअल सिटी बनाने का यह सुझाव किस ऑफिसर ने दिया है।
मैं कहना चाहता हूं कि स्पिरिचुअलिटी किसी शहर में नहीं रहती। यह त्याग करने वाले इंसानों में पाई जाती है। यह कंक्रीट की इमारतों में नहीं मिल सकती। हम सबको मिलकर चीफ मिनिस्टर से उज्जैन के किसानों को बचाने की रिक्वेस्ट करनी चाहिए।
विश्लेषकों का मत... विश्लेषकों का मानना है कि दोनों के बीच मतभेद मुख्यतः नीतिगत और क्षेत्रीय राजनीतिक नेतृत्व से जुड़े माने जाते हैं। हालांकि यह दावा कि दोनों व्यक्तिगत या राजनीतिक शत्रु हैं, सार्वजनिक रूप से प्रमाणित नहीं है।
इसी तरह यह भी सिद्ध नहीं हुआ है कि चिंतामणि मालवीय को मुख्यमंत्री से नाराज भाजपा नेताओं या राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के किसी वर्ग का संगठित अंदरूनी समर्थन प्राप्त है। इस तरह की बातें फिलहाल राजनीतिक चर्चाओं और अटकलों का हिस्सा हैं।
भाजपा विधायक ने उठाया था अपनी ही पार्टी पर सवाल
उज्जैन जमीन अधिग्रहण की आलोचना करने पर भाजपा ने अपने ही एक नेता को कारण बताओ नोटिस भेजा था। उसके बाद कुछ और निजी मामलों को लेकर यह नेता और मुख्यमंत्री के बीच गर्माहट बनी रही, जो बाद में विस्फोटक हो गई।
कुछ समय से मालवा के एक विधायक सरकार के नीतिगत फैसलों को लेकर मुख्यमंत्री से सहमत नहीं रहे, इसलिए उनका नाम आम चर्चाओं के बीच सामने आ जाता है। उन्होंने किसानों के हित में उज्जैन सिंहस्थ के लिए किसानों की जमीन को परमानेंटली एक्वायर करने के सरकार के फैसले की आलोचना की, जिसे पहले धार्मिक मेले के लिए 3-6 महीने के लिए टेम्पररी तौर पर एक्वायर किया गया था।
प्रदेश भाजपा ने क्षेत्र के एक विधायक को कारण बताओ नोटिस जारी किया था। एक विधायक वर्ग ने 2028 में होने वाले सिंहस्थ धार्मिक मेले के लिए किसानों की जमीन को हमेशा के लिए एक्वायर करने के अपनी ही सरकार के फैसले पर सवाल उठाया था।
भाजपा के तत्कालीन प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा द्वारा भेजे गए नोटिस में कहा गया कि बयानों से पार्टी की छवि पर असर पड़ा है। नोटिस में कहा गया कुछ समय से आप पब्लिक जगहों पर पार्टी की बुराई कर रहे हैं। आपके बयानों और कामों से पार्टी की इज्जत पर असर पड़ रहा है और आपके बर्ताव की वजह से डिसिप्लिनरी एक्शन की जरूरत है।
नेशनल पार्टी प्रेसिडेंट जेपी नड्डा के निर्देशों के अनुसार आपको कारण बताओ नोटिस जारी किया जा रहा है और आपसे सात दिन के अंदर यह बताने की उम्मीद है कि आपके खिलाफ डिसिप्लिनरी एक्शन क्यों न लिया जाए।
यह नोटिस उस समय दिया गया था, जब सिंहस्थ को लेकर लैंड पूलिंग एक्ट के माध्यम से किसानों की भूमि का स्थायी अधिग्रहण करने की कोशिश की गई थी और उसका हर तरफ विरोध हुआ था।
भाजपा के ही विधायक लैंड पूलिंग के खिलाफ थे। इन्हें मुख्यमंत्री के विरोधी नेताओं के रूप में प्रचारित किया जाता रहा। इसीलिए अब इशारा इन्हीं असंतुष्ट नेताओं की ओर है।
राजनीतिक खींचतान से चर्चा में आया मामला
इस पूरे भूचाल का केंद्र उज्जैन को बताया जा रहा है, तो यह भी कहा जा सकता है कि उज्जैन के प्रशासन तंत्र के बड़े-बड़े अधिकारी सुनियोजित भंडाफोड़ योजना से वाकिफ नहीं थे। यानी उनका तंत्र पूरी तरह विफल साबित हुआ।
इस कारण मुख्यमंत्री की मुसीबत बढ़ गई। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा के भीतर पहले से मौजूद मतभेदों और स्थानीय राजनीतिक खींचतान के कारण यह मामला अधिक चर्चा में आया।
इसका प्रमाण उपलब्ध नहीं है कि किसी विशेष भाजपा नेता या समूह ने मुख्यमंत्री को पद से हटाने के उद्देश्य से सुनियोजित अभियान चलाया हो।
पार्टी के भीतर से उपजी गुटबाजी की अटकलें
मुख्यमंत्री और उनके परिवार की कथित भूमि खरीद को लेकर उठे विवाद के बीच राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि क्या यह मामला केवल विपक्ष के हमले तक सीमित है या इसके पीछे भाजपा की अंदरूनी राजनीति भी सक्रिय है। कांग्रेस ने दावा किया है कि इस मामले से जुड़े दस्तावेज और सूचनाएं भाजपा के भीतर से ही निकलीं, जिससे पार्टी के अंदर असंतोष और गुटबाजी की अटकलों को बल मिला।
असंतुष्ट कहलाने वाले नेताओं ने बनाई दूरी
एक भाजपा विधायक पहले भी भूमि अधिग्रहण नीति को लेकर अपनी ही सरकार की आलोचना कर चुके हैं, जिसके बाद उन्हें कारण बताओ नोटिस भी मिला था। इसी पृष्ठभूमि के कारण उनका नाम राजनीतिक चर्चाओं में लिया जा रहा है, लेकिन उन्हें इस कथित अभियान से जोड़ने वाला कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है।
असंतुष्ट नेता कहे जाने वाले विधायक आदि इस समय न किसी से मिल रहे, न बात कर रहे हैं। दूसरी ओर भाजपा ने कांग्रेस के सभी आरोपों को निराधार और राजनीतिक रूप से प्रेरित बताया, जबकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी भूमि संबंधी आरोपों का खंडन करते हुए कहा है कि उनके खिलाफ तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है।
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