प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए दो युवाओं को मिली राहत: हाईकोर्ट ने कड़ी जमानत शर्तें हटाईं; निजी मुचलके पर रिहाई के आदेश
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर खंडपीठ ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन से पहले हिरासत में लिए गए दो युवाओं को बड़ी राहत देते हुए उनकी रिहाई के आदेश दिए हैं। अदालत ने कहा कि जमानत के लिए ऐसी कठोर शर्तें लगाना, जिन्हें पूरा करना व्यावहारिक रूप से संभव न हो, व्यक्ति को जमानत से वंचित करने के समान है। कोर्ट ने दोनों बंदियों को ₹50 हजार के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के एक सक्षम जमानतदार पर रिहा करने का निर्देश दिया।
यह आदेश रंजीत जाट उर्फ रंजीत किसानवंशी बनाम मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य (WP No. 29660/2026) मामले में 24 जुलाई 2026 को न्यायमूर्ति सुबोध अभ्यंकर और आलोक अवस्थी की खंडपीठ ने पारित किया। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जयेश गुरनानी ने पक्ष रखा।
प्रदर्शन से पहले लिया गया था हिरासत में
याचिका के अनुसार, राधेश्याम जाट और सुरेंद्र यादव को छात्रों के समर्थन में प्रस्तावित शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक प्रदर्शन से पहले पुलिस ने हिरासत में लिया था। राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि दोनों को भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 170 के तहत निरुद्ध किया गया था और निर्धारित जमानत शर्तें पूरी करने पर उनकी रिहाई संभव थी।
जमानत की शर्त पर हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि रिहाई के लिए ₹1 लाख की प्रतिभूति, ₹1 लाख का बंधपत्र और इसके साथ एक शासकीय कर्मचारी से जमानत दिलाने की शर्त लगाई गई थी।
खंडपीठ ने कहा कि किसी सरकारी कर्मचारी से जमानत दिलाने जैसी शर्त व्यवहारिक रूप से पूरी करना बेहद कठिन है। ऐसे में यह शर्त वास्तव में व्यक्ति को जमानत मिलने से रोकने के समान है। अदालत ने स्पष्ट किया कि जमानत पर अत्यधिक कठोर और अव्यावहारिक शर्तें सामान्य परिस्थितियों में नहीं लगाई जानी चाहिए।
₹50 हजार के निजी मुचलके पर रिहाई
हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए दोनों बंदियों को ₹50 हजार के व्यक्तिगत बंधपत्र और समान राशि के एक सक्षम जमानतदार के आधार पर रिहा करने का आदेश दिया। साथ ही निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से संबंधित न्यायालय के समक्ष उपस्थित होंगे और कानून के तहत निर्धारित सभी शर्तों का पालन करेंगे।
व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर महत्वपूर्ण फैसला
कानूनी जानकारों के अनुसार, यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जमानत के अधिकार के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अदालत ने स्पष्ट संदेश दिया है कि जमानत की शर्तें ऐसी नहीं हो सकतीं, जिनका वास्तविक उद्देश्य या प्रभाव किसी व्यक्ति को जमानत मिलने से ही वंचित कर देना हो।
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