50 हुई मौत, 25 नहीं: जहरीली शराब कांड में दावा; एसडीएम और एसडीओपी हटाए गए, 120 से ज्यादा मरीज अस्पतालों में
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, सागर।
जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला लगातार गंभीर होता जा रहा है। बंडा और शाहगढ़ क्षेत्र में शराब पीने के बाद अब तक 22 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 120 से ज्यादा लोग अलग-अलग अस्पतालों में इलाज करा रहे हैं।
कई मरीजों की हालत गंभीर बताई जा रही है। इस बीच मामले को लेकर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सरकार के आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि जहरीली शराब से मरने वालों की संख्या 50 से ज्यादा हो सकती है।
पटवारी का कहना है कि उन्होंने सागर जिले के अलग-अलग गांवों में 33 प्रभावित परिवारों से मुलाकात की है और कई परिवारों में एक से ज्यादा लोगों की मौत हुई है।
33 परिवारों से मिले पटवारी, बोले- कई घरों में सिर्फ महिलाएं बचीं
जीतू पटवारी ने सागर के प्रभावित गांवों का दौरा कर मृतकों के परिजनों से मुलाकात की। उन्होंने सोशल मीडिया पर दौरे की तस्वीरें और पीड़ित परिवारों की स्थिति साझा की।
पटवारी के मुताबिक, कई परिवारों में जहरीली शराब की त्रासदी के बाद अब केवल महिलाएं रह गई हैं। उन्होंने सरकार पर मौतों का आंकड़ा कम बताने का आरोप लगाया।
पटवारी ने कहा कि सिर्फ सागर की घटना सामने आई है, जबकि पूरे मध्य प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार की जांच की जरूरत है। उन्होंने आबकारी मंत्री जगदीश देवड़ा के इस्तीफे की मांग भी की।
पटवारी का आरोप- दूसरे राज्यों तक पहुंच रही MP की शराब
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मध्य प्रदेश में अवैध शराब के कारोबार को लेकर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रदेश से उन राज्यों में भी शराब भेजे जाने की शिकायतें हैं, जहां शराबबंदी लागू है।
पटवारी ने गुजरात में हाल ही में पकड़ी गई शराब के मामले का हवाला देते हुए मध्य प्रदेश कनेक्शन की जांच की मांग की। उनका आरोप है कि शराब के अवैध कारोबार पर प्रभावी नियंत्रण नहीं है। हालांकि इन राजनीतिक आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
20 रुपये की छूट देकर शराब खपाने का आरोप
पटवारी ने यह भी दावा किया कि सागर में जहरीली शराब बनाने और बेचने वालों ने माल खपाने के लिए 20 रुपये तक की छूट दी थी।
उनका कहना है कि शराब को जल्द से जल्द बाजार में निकालने के लिए ग्राहकों को डिस्काउंट दिया जा रहा था। जांच एजेंसियां अब शराब की सप्लाई चेन और इसके निर्माण एवं बिक्री से जुड़े लोगों की भूमिका की जांच कर रही हैं।
जहरीली शराब की सप्लाई को लेकर MP-UP पुलिस आमने-सामने
जहरीली शराब की कथित सप्लाई को लेकर मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश पुलिस के बीच भी आरोप-प्रत्यारोप सामने आए हैं। जांच में यह आरोप लगाया गया कि सागर पहुंची शराब का कनेक्शन उत्तर प्रदेश के ललितपुर से हो सकता है।
ललितपुर के एडिशनल एसपी कालू सिंह ने मध्य प्रदेश पुलिस के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि जांच को भटकाने के लिए ललितपुर का नाम लिया जा रहा है।
उनके मुताबिक, ललितपुर में आबकारी विभाग और पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई कर करीब दो महीने पहले अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों के खिलाफ कार्रवाई की थी और कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था।
जूनियर डॉक्टरों ने सबसे पहले जताया था जहरीली शराब का शक
इस मामले में शुरुआती चेतावनी सागर के बंडा सिविल अस्पताल के जूनियर डॉक्टरों की ओर से सामने आई थी। लगातार एक जैसे लक्षण वाले मरीजों के अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों को शराब से विषाक्तता की आशंका हुई।
ड्यूटी डॉक्टर अतीश सोनी ने मरीजों में समान स्वास्थ्य समस्या देखी। जानकारी के मुताबिक, 5 सितंबर की रात करीब एक बजे उन्होंने संबंधित अधिकारियों को इसकी सूचना दी। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज को भी मरीजों की स्थिति की जानकारी दी गई।
दो मरीजों से शुरू हुआ शक
बताया गया कि शुरुआती मरीजों में दो लोग भोगरा गांव के थे। एक मरीज सुबह करीब 9 बजे अस्पताल पहुंचा, जबकि कुछ घंटे बाद दूसरा मरीज भी इसी तरह की परेशानी लेकर आया।
दोनों मरीजों में मिलते-जुलते लक्षण थे। परिजनों से पूछताछ में पता चला कि दोनों शराब का सेवन करते थे। इसके बाद डॉक्टरों को शराब से विषाक्तता का संदेह हुआ और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई।
‘बंबइया व्हिस्की’ और ‘सागर गोल्ड’ ब्रांड की शराब का नाम
मामले की जांच में ‘बंबइया व्हिस्की’ और ‘सागर गोल्ड’ ब्रांड की शराब का नाम सामने आया है। इस मामले में दो लाइसेंसी ठेकेदारों समेत 30 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि संबंधित शराब कहां से आई, इसे किसने तैयार या सप्लाई किया और प्रभावित गांवों तक इसकी पहुंच कैसे हुई।
बंडा SDM और SDOP हटाए गए
जहरीली शराब कांड के बाद प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए बंडा की SDM आरती यादव और SDOP प्रदीप वाल्मीकि को हटा दिया।
प्रदीप वाल्मीकि को पुलिस मुख्यालय अटैच किया गया है, जबकि रोहित लखारे को बंडा का नया SDOP बनाया गया है। वहीं आरती यादव की जगह संजय कुमार को बंडा SDM की जिम्मेदारी दी गई है। इससे पहले आबकारी और पुलिस विभाग के कई अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो चुकी है।
आबकारी उपायुक्त अटैच, तीन अधिकारी निलंबित
सरकार ने सागर शराबकांड में आबकारी विभाग के स्तर पर भी कार्रवाई की है। आबकारी उपायुक्त एवं संभागीय फ्लाइंग स्क्वाड प्रभारी नीरजा श्रीवास्तव को ग्वालियर मुख्यालय अटैच किया गया है।
सहायक आयुक्त आबकारी सागर कीर्ति दुबे को निलंबित किया गया है। सहायक जिला आबकारी अधिकारी दिलीप खंडाते को निलंबित किया गया है। आबकारी उप निरीक्षक, वृत्त बंडा प्रोशनी उरेती को भी निलंबित किया गया है। पुलिस स्तर पर गूगरा चौकी प्रभारी और बंडा थाना प्रभारी को निलंबित किया गया है।
‘सागर गोल्ड’ पर प्रतिबंध का आदेश, कुछ घंटे बाद वापस
जहरीली शराब कांड के बीच ‘सागर गोल्ड’ ब्रांड को लेकर आबकारी विभाग का एक आदेश भी चर्चा में रहा। मौतों के बाद जबलपुर के सहायक आबकारी आयुक्त की ओर से इस ब्रांड की बिक्री पर रोक लगाने का आदेश जारी किया गया था।
हालांकि कुछ ही घंटे बाद यह आदेश वापस ले लिया गया। विभाग ने जबलपुर जिले में इस ब्रांड की बिक्री नगण्य होने का हवाला देते हुए पूर्व आदेश निरस्त कर दिया। इस घटनाक्रम के बाद आबकारी विभाग की निगरानी और कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठे हैं।
प्रदेशभर में अवैध शराब के खिलाफ विशेष अभियान
सागर की घटना के बाद आबकारी विभाग ने पूरे मध्य प्रदेश में अवैध शराब के निर्माण, भंडारण, बिक्री और परिवहन के खिलाफ विशेष अभियान शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
आबकारी आयुक्त दीपक सक्सेना ने सभी सहायक आबकारी आयुक्तों और जिला आबकारी अधिकारियों को संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं।
अधिकारियों को मुखबिर तंत्र सक्रिय करने, अवैध शराब के ठिकानों पर दबिश देने, संदिग्ध वाहनों की जांच और अवैध परिवहन के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। लाइसेंसी शराब दुकानों और परिसरों में गंभीर अनियमितता मिलने पर भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
लापरवाही पर तय होगी जिम्मेदारी
आबकारी आयुक्त ने स्पष्ट किया है कि अभियान में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों को सिर्फ कार्रवाई की संख्या बढ़ाने के बजाय अवैध शराब के निर्माण से लेकर बिक्री और परिवहन तक पूरी सप्लाई चेन पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
सभी जिलों से अभियान की दैनिक प्रगति रिपोर्ट राज्य स्तरीय उड़नदस्ता को भेजने को कहा गया है। विश्वसनीय सूचना पर कार्रवाई नहीं करने या गंभीर मामलों की अनदेखी करने वाले अधिकारी-कर्मचारियों की जवाबदेही तय कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने दिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए प्रदेश सरकार ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए हैं। डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल सागर पहुंचे और अस्पतालों में भर्ती मरीजों से मुलाकात कर उनके स्वास्थ्य की जानकारी ली।उन्होंने डॉक्टरों से उपचार व्यवस्था और मरीजों की स्थिति को लेकर भी जानकारी ली।
क्या प्रशासनिक स्तर पर किसी तरह की लापरवाही हुई?
फिलहाल 22 मौतों और 120 से ज्यादा लोगों के इलाज की जानकारी सामने है, जबकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इससे कहीं ज्यादा मौतों का दावा किया है।
ऐसे में मजिस्ट्रियल जांच, पुलिस जांच और अस्पतालों के रिकॉर्ड के आधार पर ही जहरीली शराब कांड की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
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