न्यास विवाद: पूर्व कांग्रेसी सीएम ने दी प्रदेश सरकार को क्लीन चिट; अपने ही नेता के आरोपों को बताया निराधार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश में वीर भारत न्यास को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है। कांग्रेस द्वारा सरकार पर लगाए गए गंभीर आरोपों के बीच पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने अलग रुख अपनाते हुए कहा कि इस मामले में किसी प्रकार का घोटाला नहीं हुआ है। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस के भीतर मतभेद भी खुलकर सामने आ गए हैं।
'पूरी जांच के बाद बोल रहा हूं' : दिग्विजय सिंह
27 जून 2026 को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय सिंह ने कहा कि उन्होंने पूरे मामले का गहन अध्ययन किया है और सभी दस्तावेज देखने के बाद ही मीडिया के सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि वीर भारत न्यास को लेकर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह निराधार हैं और इस प्रकरण में किसी भी प्रकार की अनियमितता या घोटाला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा, 'मैं पूरी रिसर्च करके आया हूं। उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों के आधार पर पूरी जिम्मेदारी के साथ कह सकता हूं कि इस मामले में कोई घोटाला नहीं हुआ है।'
'यह निजी ट्रस्ट नहीं, सार्वजनिक न्यास है'
दिग्विजय सिंह ने स्पष्ट किया कि वीर भारत न्यास कोई निजी संस्था नहीं है। उनके अनुसार सिंधिया परिवार द्वारा निर्मित भवन को सभी वैधानिक प्रक्रियाओं का पालन करते हुए इस न्यास को सौंपा गया था। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट को लेकर गलत जानकारी फैलाकर लोगों को भ्रमित करने की कोशिश की जा रही है, जबकि यह एक विधिवत पंजीकृत सार्वजनिक न्यास है।
ट्रस्ट डीड और दस्तावेज भी किए सार्वजनिक
प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिग्विजय सिंह वीर भारत न्यास की ट्रस्ट डीड और अन्य दस्तावेज भी साथ लेकर पहुंचे। उन्होंने बताया कि न्यास का पंजीयन 26 अप्रैल 2013 को मध्य प्रदेश पब्लिक ट्रस्ट एक्ट, 1951 की धारा-4 के तहत किया गया था। उन्होंने यह भी बताया कि इस न्यास के पदेन अध्यक्ष मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री होते हैं, यानी सत्ता में किसी भी दल की सरकार हो, मुख्यमंत्री ही ट्रस्ट का अध्यक्ष रहेगा।
'कमलनाथ भी रहे हैं अध्यक्ष'
दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस सरकार के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलनाथ भी वीर भारत न्यास के अध्यक्ष रहे थे। यदि ट्रस्ट में कोई अनियमितता होती तो कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में ही उस पर सवाल उठते। इसलिए वर्तमान सरकार पर लगाए जा रहे आरोप तथ्यों से मेल नहीं खाते।
दलालों पर भी साधा निशाना
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दिग्विजय सिंह ने बिना किसी का नाम लिए कुछ लोगों पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि देशभर में ऐसे दलाल सक्रिय हैं जो अधूरी जानकारी और झूठे आरोपों के आधार पर विवाद खड़ा कर लोगों से धन उगाही करने का प्रयास करते हैं।
क्या हैं जीतू पटवारी के आरोप?
विवाद की शुरुआत तब हुई, जब दो दिन पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि उज्जैन में लगभग 500 करोड़ रुपये मूल्य की सरकारी जमीन वीर भारत न्यास को महज 1 रुपये की टोकन राशि पर दे दी गई।
उन्होंने इसे बड़ा जमीन घोटाला बताते हुए दावा किया कि ट्रस्ट के ट्रस्टी नंबर-1 मुख्यमंत्री के सांस्कृतिक सलाहकार श्रीराम तिवारी हैं और सरकार ने नियमों की अनदेखी कर इतनी मूल्यवान जमीन न्यास को सौंप दी।
कांग्रेस में बढ़ी राजनीतिक हलचल
दिग्विजय सिंह के बयान के बाद कांग्रेस के भीतर राजनीतिक असहजता बढ़ गई है। एक ओर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सरकार पर गंभीर आरोप लगा रहे हैं, वहीं पार्टी के वरिष्ठतम नेताओं में शामिल दिग्विजय सिंह उन्हीं आरोपों को सार्वजनिक रूप से खारिज कर रहे हैं। इससे विपक्ष की रणनीति और एकजुटता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
अब आगे क्या?
वीर भारत न्यास को लेकर शुरू हुआ यह विवाद फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है। एक ओर विपक्ष सरकार से जवाब मांग रहा है, तो दूसरी ओर दिग्विजय सिंह पूरे मामले को नियमों के अनुरूप बता रहे हैं। अब सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि राज्य सरकार इस मुद्दे पर आधिकारिक रूप से क्या स्पष्टीकरण देती है और कांग्रेस इस आंतरिक मतभेद पर क्या रुख अपनाती है।
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