अमरनाथ यात्रा के बीच जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर आफत: भूस्खलन से 1700 ट्रक और सैकड़ों वाहन फंसे; प्रशासन ने संभाला मोर्चा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जम्मू।
जम्मू-कश्मीर में लगातार हो रही भारी बारिश ने एक बार फिर जनजीवन और यातायात व्यवस्था को प्रभावित कर दिया है। सोमवार को उधमपुर जिले के देवाल क्षेत्र में हुए ताजा भूस्खलन के कारण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) पर यातायात पूरी तरह बाधित हो गया। इस घटना के चलते करीब 1700 मालवाहक ट्रक, कई यात्री वाहन और अन्य गाड़ियां हाईवे के दोनों ओर फंस गईं। प्रशासन, पुलिस, ट्रैफिक विभाग और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने संयुक्त रूप से राहत एवं बहाली अभियान शुरू कर दिया है।
भूस्खलन से थमा यातायात
लगातार बारिश के कारण देवाल इलाके में अचानक पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और पत्थर सड़क पर आ गिरे। इससे जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग का एक बड़ा हिस्सा अवरुद्ध हो गया और दोनों दिशाओं से वाहनों की आवाजाही रोकनी पड़ी। सुरक्षा कारणों को देखते हुए प्रशासन ने तत्काल हाईवे को बंद कर दिया, ताकि किसी बड़े हादसे से बचा जा सके।
हाईवे बंद होने के कारण लंबी दूरी तक वाहनों की कतारें लग गईं। सबसे अधिक प्रभावित मालवाहक ट्रक रहे, जिनकी संख्या लगभग 1700 बताई गई है। इनके अलावा निजी वाहन, बसें और अन्य यात्री वाहन भी कई घंटों तक फंसे रहे।
यात्रियों को प्राथमिकता, सिंगल लेन से निकाले जा रहे वाहन
प्रशासन ने राहत कार्य शुरू करते हुए पहले फंसे हुए यात्रियों को सुरक्षित निकालने का निर्णय लिया। मलबा हटाने के बाद जहां संभव हुआ, वहां सिंगल कैरिजवे के माध्यम से सीमित संख्या में वाहनों को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया गया।
ट्रैफिक अधिकारियों ने बताया कि सड़क पूरी तरह सुरक्षित घोषित होने तक भारी वाहनों की आवाजाही नियंत्रित रहेगी। फिलहाल यात्री वाहनों को प्राथमिकता देकर निकाला जा रहा है, जबकि ट्रकों को चरणबद्ध तरीके से रवाना किया जाएगा।
एनएचएआई की मशीनें युद्धस्तर पर जुटीं
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने मौके पर जेसीबी, बुलडोजर और अन्य भारी मशीनें तैनात कर दी हैं। कर्मचारियों की टीमें लगातार मलबा हटाने और सड़क की मरम्मत में लगी हुई हैं।
अधिकारियों के अनुसार, मौसम अनुकूल रहने पर जल्द ही मार्ग को पूरी तरह बहाल करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि लगातार बारिश के कारण नए भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा अभी भी बना हुआ है।
अमरनाथ यात्रा जारी, श्रद्धालुओं को सुरक्षित निकाला गया
हाईवे बाधित होने के बावजूद प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को प्रभावित नहीं होने देने के लिए विशेष व्यवस्था की। बालटाल मार्ग की ओर जा रहे 3,823 श्रद्धालुओं के काफिले को सुरक्षा बलों की निगरानी में बहाल किए गए एकतरफा मार्ग से सुरक्षित आगे भेजा गया। यात्रा प्रबंधन से जुड़े अधिकारियों ने बताया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
लोगों से यात्रा टालने की अपील
जम्मू-कश्मीर ट्रैफिक पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि जब तक हाईवे पूरी तरह सुरक्षित घोषित नहीं हो जाता, तब तक इस मार्ग पर यात्रा करने से बचें। विभाग ने कहा कि लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और चट्टानें गिरने की आशंका बनी हुई है। यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा शुरू करने से पहले ट्रैफिक की ताजा स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त करें।
पहले भी तीन दिन तक बाधित रहा था हाईवे
गौरतलब है कि हाल ही में लगातार बारिश के चलते जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ था, जिससे तीन दिनों तक यातायात बाधित रहा। रविवार को बड़ी मशक्कत के बाद मार्ग बहाल किया गया था, लेकिन सोमवार को फिर हुए भूस्खलन ने स्थिति दोबारा गंभीर बना दी।
डोडा पुल भी एहतियातन बंद
इधर डोडा जिले में स्थित पुल डोडा ब्रिज को भी सुरक्षा कारणों से वाहनों के लिए अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया है। पुल पर दरार जैसी सूचना मिलने के बाद प्रशासन ने तत्काल यातायात रोककर विशेषज्ञों से जांच कराई।
पीडब्ल्यूडी (आरएंडबी) डोडा के कार्यकारी अभियंता अनिल मेहरा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में दिखाई दिए निशान संरचनात्मक दरार नहीं पाए गए हैं। उनके अनुसार, यह निर्माण के दौरान शटरिंग जॉइंट पर कंक्रीट ओवरलैप के कारण बने निशान हो सकते हैं। फिर भी विशेषज्ञों की विस्तृत जांच और गुणवत्ता परीक्षण के बाद ही पुल को दोबारा यातायात के लिए खोला जाएगा। फिलहाल वाहनों की आवाजाही वैकल्पिक गणपत पुल के माध्यम से कराई जा रही है।
प्रशासन की सतर्कता जारी
बारिश और भूस्खलन की लगातार घटनाओं को देखते हुए प्रशासन, पुलिस, एनएचएआई और आपदा प्रबंधन विभाग हाई अलर्ट पर हैं। राहत एवं बचाव दल संवेदनशील स्थानों पर तैनात हैं और मौसम की हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। प्रशासन का कहना है कि यात्रियों की सुरक्षा सर्वोपरि है और मार्ग पूरी तरह सुरक्षित होने के बाद ही सामान्य यातायात बहाल किया जाएगा।
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