करोड़ों के इस बायपास फोरलेन पर संकट: कम मुआवजे से नाराज किसानों ने जमीन देने से किया इनकार
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
आगामी सिंहस्थ को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित 700 करोड़ रुपए की लागत वाले सिंहस्थ बायपास फोरलेन परियोजना पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
प्रशासन द्वारा तय की दर मंजूर नहीं
भूमि अधिग्रहण के दौरान मुआवजा निर्धारण में कथित असमानता से नाराज किसानों ने प्रशासन द्वारा तय की गई दर पर अपनी जमीन देने से साफ इनकार कर दिया है।
किसानों का कहना है कि जब तक सभी प्रभावित किसानों को समान दर से मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक वे न तो जमीन सौंपेंगे और न ही निर्माण कार्य होने देंगे।
दोहरे मुआवजा फॉर्मूले पर उठे सवाल
किसानों का आरोप है कि प्रशासन ने एक ही क्षेत्र के किसानों के लिए अलग-अलग मुआवजा दरें तय की हैं। उनका कहना है कि कुछ किसानों को 2.17 करोड़ रुपए प्रति हेक्टेयर का मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि अन्य किसानों को केवल ₹60.48 लाख प्रति हेक्टेयर की पेशकश की गई है। इसी असमानता को लेकर प्रभावित ग्रामीणों में भारी नाराजगी है।
'समान मुआवजा नहीं तो जमीन नहीं'
क्षेत्र में आश्रम संचालित करने वाली योग माता ने कहा कि प्रशासन उनके साथ अन्याय कर रहा है। उनका आरोप है कि पड़ोसी किसानों को कहीं अधिक मुआवजा दिया जा रहा है, जबकि उन्हें काफी कम राशि दी जा रही है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उचित और समान मुआवजा मिलने तक वे अपनी जमीन नहीं देंगी और निर्माण कार्य भी नहीं होने देंगी।
वहीं किसान राजेंद्र सिंह बैस का कहना है कि उन्हें पिछले सिंहस्थ के दौरान दिए गए मुआवजे से भी कम राशि स्वीकार नहीं है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि मुआवजा नीति में सुधार नहीं किया गया तो किसान आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे।
परियोजना की रफ्तार पर पड़ सकता है असर
किसानों के विरोध के कारण सिंहस्थ बायपास फोरलेन परियोजना की गति प्रभावित होने की आशंका बढ़ गई है। हालांकि संबंधित विभाग ने निर्माण कार्य शुरू करवा दिया है, लेकिन यदि प्रभावित किसानों की जमीन का अधिग्रहण नहीं हो सका तो परियोजना बीच में ही अटक सकती है।
समय पर निर्माण पूरा करना बनेगा चुनौती
सिंहस्थ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन को देखते हुए यह सड़क परियोजना अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यदि भूमि अधिग्रहण का विवाद जल्द नहीं सुलझा, तो निर्धारित समय सीमा में फोरलेन निर्माण पूरा करना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है। इतना ही नहीं, उज्जैन के सिंहस्थ मेला क्षेत्र में प्रस्तावित सड़क निर्माण कार्य भी प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
प्रशासन से समाधान की मांग
प्रभावित किसानों ने प्रशासन से मांग की है कि मुआवजा निर्धारण में अपनाई गई कथित विसंगतियों को दूर कर सभी किसानों के लिए समान और न्यायसंगत दर तय की जाए। किसानों का कहना है कि निष्पक्ष निर्णय होने पर ही भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया आगे बढ़ सकेगी।
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