ये हाल हैं जिले के सरकारी अस्पतालों के: न डॉक्टर, न नर्स, आशा कार्यकर्ता ने कराई डिलिवरी तो हो गई बच्चे की मौत
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट...इंदौर।
स्वास्थ्य विभाग लाख दावे करे, लेकिन हकीकत ये है कि जिले के सरकारी अस्पताल कसाईखाने से कम नहीं हैं। बेटमा के सरकारी अस्पताल में डिलिवरी कराने के लिए न डॉक्टर मौजूद था और न नर्स। अनुभवहीन आशा कार्यकर्ता ने डिलिवरी करवा दी। इस दौरान बच्चा कोमा में चला गया, जिसकी बाद में इंदौर के पीसी सेठी अस्पताल में मौत हो गई।
मामला सागौर कुटी निवासी घनश्याम अहेरवार की पत्नी आशिका का है। वे लेबर सप्लायर हैं। वे गर्भवती पत्नी को लेकर 20 जून को बेटमा के सरकारी अस्पताल पहुंचे थे। यहां डॉ. सरिता गुप्ता ने जांच के बाद उन्हें निजी अस्पताल सोनोग्राफी करवाने के लिए भेजा गया। सोनोग्राफी में बच्चे को स्वस्थ और धड़कन की गति भी सामान्य बताई गई। साथ ही डिलिवरी की तारीख 2 जुलाई बताई गई।
इसके बाद निश्चिंत होकर घनश्याम नागपुर चले गए, लेकिन 24 जून को पत्नी आशिका को दर्द होने पर मां के साथ पुन: सरकारी अस्पताल पहुंचीं। यहां उन्हें भर्ती कर लिया गया। अगले दिन 25 जून को सुबह करीब 9 बजे उन्हें लेबर पेन शुरू हो गया। मां ने डॉक्टर और नर्स को ढूंढा, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। सुबह से लेकर दोपहर 3 बजे तक किसी का पता नहीं था। इससे पूर्व 2 बजे आशा कार्यकर्ता सुनीता आई और पत्नी की डिलिवरी कराने का कहकर ले गई। वो खुद कह रही थी कि वो अनुभवहीन है। उसने बच्चे का सिर पकड़कर खींचा और हाथ भी खींचे। इस दौरान बच्चा कोमा में चला गया।
जब कई घंटों तक बच्चा रोया नहीं तो उसने उन्हें पीसी सेठी अस्पताल इंदौर के लिए रवाना कर दिया। जब बच्चे को यहां ले आए तो भर्ती कर लिया गया। यहां बच्चे को आईसीयू में रखा गया। डॉक्टरों ने बताया कि बच्चे का ब्रेन, शरीर कोई हरकत नहीं कर रहा है, न हिल-डुल रहा है। 27 जून को दोपहर करीब 1.20 बजे यहां डॉक्टरों ने बच्चे को मृत घोषित कर दिया। 4 बजे बच्चे का शव सौंपा और अगले दिन रिपोर्ट दी।
डिलिवरी गलत तरीके से हुई- घनश्याम बताते हैं कि डॉक्टरों ने कहा कि बच्चे की डिलिवरी गलत तरीके से हुई, जिससे स्वस्थ बच्चा कोमा में चला गया। इस तरह बेटमा के सरकारी अस्पताल में लाखों की तनख्वाह पाने वाले डॉक्टर व नर्स की लापरवाही ने एक बच्चे की जान ले ली। यदि डॉक्टर ड्यूटी पर मौजूद होते तो डिलेवरी विधिवत होती और बच्चा जीवित होता।
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