बंटी नागर की मौत के पीछे करोड़ों का जाल: खुलासा फर्स्ट ने जिन नामों का किया था खुलासा; पुलिस की जांच में वही नाम
KHULASA FIRST
संवाददाता

मुंबई के रितेश लुंकड़, सांसद के भाई राजेश, अशोक भाटिया, महेश दलोदरा और गोविंद नानेरिया के नाम आए सामने
चैट में दबाव के सुराग, बाल्याखेड़ी से सुपर कॉरिडोर तक
कई प्रोजेक्टों का हिसाब खंगाल रही पुलिस
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मदनलाल-छगनलाल ज्वेलर्स के परिवारिक सदस्य और रियल एस्टेट कारोबारी बंटी उर्फ संदीप नागर की मौत को लेकर अब पुलिस की जांच सिर्फ आत्महत्या के कारणों तक सीमित नहीं रही है। मोबाइल चैट, कॉल डिटेल और करोड़ों रुपए के लेन-देन ने इस मामले की परतें खोलना शुरू कर दी हैं।
पुलिस अब उन लोगों की कड़ियां जोड़ रही हैं जिनके साथ बंटी के बड़े आर्थिक संबंध थे और जिन पर परिजन ने रुपयों के लिए दबाव बनाने और धमकाने के आरोप लगाए हैं। वहीं, खुलासा फर्स्ट मुंबई के रितेश लुंकड़, सांसद शंकर लालवानी के भाई राजेश लालवानी, फाइनेंसर अशोक भाटिया, महेश दलोदरा और गोविंद नानेरिया सहित जिन नामों का खुलासा करता आया है, पुलिस जांच में भी ये नाम ही करोड़ों रुपए के लेन-देन में बंटी नागर पर दबाव-प्रभाव बनाने वालों के रूप में सामने आए हैं।
पुलिस यह पता लगा रही है कि बंटी की मौत से पहले उन पर आखिर कितने मोर्चों से आर्थिक दबाव बनाया जा रहा था।
गुलमोहर कॉलोनी निवासी 56 वर्षीय बंटी नागर संस्कृति डेवलपर्स के नाम से रियल एस्टेट प्रोजेक्ट विकसित करते थे। बायपास के बाल्याखेड़ी क्षेत्र में उनका बड़ा प्रोजेक्ट चल रहा था। पुलिस के अनुसार इसमें भाजपा सांसद शंकर लालवानी के भाई राजेश लालवानी, मुंबई के रितेश लुंकड़ और सांसद प्रतिनिधि बंटी गोयल का पैसा लगा था।
प्रोजेक्ट के लेन-देन को लेकर विवाद की स्थिति बनी और बंटी नागर पर रकम को लेकर दबाव बनाने की बात जांच में सामने आई है। दूसरी ओर सुपर कॉरिडोर के समीप चल रहे उनके एक अन्य प्रोजेक्ट में भी आर्थिक लेन-देन को लेकर परेशानी बताई गई है।
एक मौत... कई कारोबारी कड़ियां... बंटी की मौत के बाद पुलिस ने उनके मोबाइल फोन और संपर्कों को खंगालना शुरू किया। अब परिजन से दोबारा पूछताछ के दौरान पुलिस को कुछ महत्वपूर्ण चैट मिली हैं।
इन चैट और बयानों के आधार पर परिजन ने दर्जी कराड़िया के विष्णु, राजेश, बंटी, मनोज चौधरी, मंत्री कैलाश विजयवर्गीय से जुड़े महेश दलोदरा, गोविंद नानेरिया और साड़ी व्यवसाय की आड़ में फाइनेंस का काम करने वाले बबलू उर्फ अशोक भाटिया सहित कई लोगों के नाम पुलिस को बताए हैं
लगभग इन सभी नामों का खुलासा, खुलासा फर्स्ट पहले ही कई बार कर चुका है। इन लोगों से करोड़ों के लेन-देन की बात भी खुलासा फर्स्ट ने बताई थी। 26 सितंबर को अशोक भाटिया से बंटी की लंबी बात होने की कहानी सामने आई है।
पुलिस के अनुसार बंटी पर लगातार दबाव बनाए जाने के संकेत भी मिले हैं। वहीं महेश दलोदरा पर कुछ साल पहले भाजपा नेताओं के जरिये दबाव बनाकर रुपयों को लेकर बंटी को धमकाने का आरोप भी सामने आया है। पुलिस इन पुराने विवादों को भी मौजूदा घटनाक्रम से जोड़कर देख रही है।
अब जांच के घेरे में पार्षद का रिश्तेदार... इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में विजय नगर क्षेत्र में रहने वाले एक पार्षद के रिश्तेदार का नाम सामने आया है। पुलिस के अनुसार यह व्यक्ति भी बंटी पर रुपयों को लेकर दबाव बना रहा था। उसके माध्यम से करोड़ों रुपए का लेन-देन होने की जानकारी पुलिस को मिली है।
जमीनों की खरीद-फरोख्त और कथित हेराफेरी से जुड़े मामलों में उसकी भूमिका भी जांची जा रही है। खास बात यह है कि बंटी और इस व्यक्ति के बीच लंबे समय तक फोन पर बातचीत हुई थी। अब पुलिस इन कॉल्स की कड़ियां जोड़ रही है।
बातचीत किस मुद्दे पर होती थी, रकम की मांग होती थी या जमीन के किसी सौदे को लेकर दबाव बनाया जा रहा था? यही वजह है कि अब पुलिस सिर्फ बंटी की मौत से पहले के कुछ घंटों की घटनाओं को नहीं देख रही, बल्कि पिछले कई वर्षों के जमीन के सौदों, आर्थिक विवादों, फाइनेंसरों और धमकियों की फाइल भी खोल रही है।
मोबाइल, चैट, बैंक और जमीन-चारों तरफ जांच
पुलिस बंटी के मोबाइल से मिले संपर्क, कॉल डिटेल, चैट, जमीन से जुड़े दस्तावेज और बैंकिंग लेन-देन को आपस में जोड़ रही है। जांच का सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या बंटी आर्थिक दबाव के कई मोर्चों पर एक साथ घिर चुके थे?
अगर ऐसा था तो किस व्यक्ति ने कितनी रकम को लेकर दबाव बनाया? किसने धमकी दी? करोड़ों का लेन-देन किन लोगों के बीच हुआ? और क्या इन दबावों का बंटी की आत्महत्या से कोई सीधा संबंध था? बंटी नागर की सोफिया नाम की एक मॉडल से भी दोस्ती की बात सामने आ रही है।
फिलहाल पुलिस सामने आए नामों और आरोपों को जांच की कड़ियों के रूप में देख रही है। चैट, कॉल रिकॉर्ड और करोड़ों के लेन-देन की जांच पूरी होने के बाद ही यह साफ होगा कि बंटी की मौत महज आर्थिक संकट का नतीजा थी या इसके पीछे रियल एस्टेट के करोड़ों के कारोबार से जुड़ा कोई गहरा दबाव भी था।
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