दागदार कर रहे हैं मुख्यमंत्री की छवि: कार्यपालन यंत्री और ठेका कंपनी के प्रबंधक पर आरोप
KHULASA FIRST
संवाददाता

जिस विभाग के मुखिया मुख्यमंत्री उसी में हर महीने हो रहा फर्जी कर्मचारियों के नाम लाखों का भुगतान
एनवीडीए के अफसर और ठेकेदार कंपनी ने मुख्यमंत्री को भी नहीं बख्शा
जालसाजी और आर्थिक अपराध का खुला खेल
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
प्रदेश सरकार के एक अत्यंत महत्वपूर्ण और जिम्मेदार विभाग, जिसके मुखिया खुद मुख्यमंत्री हैं, के एक जिम्मेदार कार्यपालन यंत्री और एक ठेकेदार कंपनी पॉवर लिंकर के काले कारनामों की आंच मुख्यमंत्री की छवि पर आ रही है।
अब लोगों को यह कहने का मौका मिल रहा है कि मुख्यमंत्री के विभाग में जब यह हालत है, तो बाकी विभागों की क्या स्थिति होगी कल्पना की जा सकती है। यह बात अलग है कि इसकी जानकारी मुख्यमंत्री को अभी तक नहीं दी गई, अन्यथा संवेदनशील मुख्यमंत्री और उनका सचिवालय कठोर कार्रवाई से पीछे नहीं हटता।
वैसे अब तक कोई कार्रवाई नहीं होने से कई तरह के सवाल उठ रहे हैं। मुख्यमंत्री के इस विभाग में फर्जी कर्मचारियों की नियुक्ति बताकर हर महीने लाखों रुपए का फर्जी वेतन भुगतान सरकार से लिया जा रहा है। ऐसे में सवाल है कि यह पैसा कहां जा रहा है?
बीते तीन से चार वर्षों में सरकार के खजाने से इस तरह करोड़ों रुपए फर्जी कर्मचारियों के नाम पर निकाले जा चुके हैं। ऐसे करीब 135 कर्मचारियों और श्रमिकों की सूची सरकार को हर माह दी जाती है, जो अस्तित्व में ही नहीं हैं।
इस बारे में जिम्मेदार अधिकारियों से खुलासा फर्स्ट ने संपर्क करके उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन किसी ने भी जवाब नहीं दिया, जबकि कंपनी के स्थानीय प्रोजेक्ट मैनेजर मनोज मेहरा, जिन्हें इस पूरे घोटाले का मुख्य किरदार बताया जा रहा है, ने कहा कि सारी शिकायतें झूठी हैं।
कोई गलत काम नहीं हो रहा। दूसरी ओर विभाग के दस्तावेज बता रहे हैं कि 203 कर्मचारी और मजदूर प्रोजेक्ट में नियुक्त हैं। मौके पर कितने कर्मचारी काम कर रहे हैं, यह जानने की कोशिश विभाग ने नहीं की। उलटे इसे कंपनी का मामला बताकर आंखें बंद कर लीं।
श्रम विभाग की जांच रिपोर्ट से हुआ खुलासा
श्रम विभाग के खरगोन जिले के अधिकारी बमुश्किल श्रमिकों को वेतन नहीं देने और उनके शोषण आदि की शिकायतों की जांच के लिए राजी हुए। जांच में श्रम विभाग को केवल 25 से 30 कर्मचारी और श्रमिक ही कार्यरत मिले, जबकि कागजों में 203 कर्मचारी और मजदूर प्रोजेक्ट में नियुक्त करना बताया गया है।
संबंधित श्रम अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए बताया कि कंपनी ने तीन वर्ष से कर्मचारी और मजदूर वर्ग को नियमित वेतन नहीं दिया, न ही ग्रेच्युटी, एरियर, कर्मचारी बीमा भविष्य निधि आदि का भुगतान किया जा रहा।
1 जून 2023 को हुए टेंडर में चैन्नई की कंपनी पॉवर लिंकर द्वारा परियोजना बड़वाह में 203 कर्मचारियों की नियुक्ति बताई गई, लेकिन किसी को अपाइंटमेंट लेटर नहीं दिया, न ही शासन द्वारा तय पीएफ, ईएसआईसी, ओवर टाइम, बोनस आदि। सरकार द्वारा तय बढ़ा हुआ दो साल का एरियर जोड़ें तो 203 कर्मचारियों के हिसाब से 30 माह की राशि ही करोड़ों में बनती है।
भामसं ने आरोप लगाते हुए जताई चिंता
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोगी संगठन भारतीय मजदूर संघ ने अपनी सरकार की छवि और मुख्यमंत्री के विभाग में हो रहे इस घोटाले से मुख्यमंत्री की हो रही बदनामी की चिंता करते हुए नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण और श्रम विभाग के अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए कहा है कि खुलेआम पॉवर लिंकर जैसी ठेकेदार कंपनी मुख्यमंत्री के विभाग में ही करोड़ों का चूना लगाकर मुख्यमंत्री को बदनाम कर रही है।
इस कंपनी ने नर्मदा मालवा गंभीर इरिगेशन प्रोजेक्ट के मेंटेनेंस का ठेका 2003 में लिया। अनुबंध की शर्तों में बताया गया कि प्रोजेक्ट में 203 कर्मचारी श्रमिकों को नियुक्त किया जाएगा।
इन 203 कर्मचारियों के वेतनमान, उनकी ग्रेच्युटी, एरियर भुगतान, भविष्य निधि आदि का भी हिसाब लगाकर प्रतिमाह कर्मचारी और श्रमिकों पर खर्च होने वाले 25 लाख रुपए से अधिक की राशि सरकार से मांगी।
कंपनी ने सरकार के साथ आर्थिक धोखाधड़ी करते हुए जो 203 कर्मचारी और श्रमिकों की सूची दी, वह पूरी तरह फर्जी है, क्योंकि इनमें से मात्र 70 कर्मचारी और श्रमिक ही काम पर रखे गए। इतने ही कर्मचारी श्रमिकों को वेतन दिया जाता है।
हालांकि वह भी चार माह से नहीं दिया। 3 वर्ष में कभी सरकारी नियमों के अनुसार और श्रम कानून के आधार पर नियुक्ति-पत्र, न ग्रेच्युटी और न ही भविष्य निधि का पूरा पैसा, बोनस, एरियर आदि दिया गया।
इसके विपरीत इस मद में हर माह वेतन भुगतान खर्च दिखाकर सारा पैसा अधिकारियों की मिलीभगत से कंपनी को फर्जी सूची के आधार पर भुगतान कराया जा रहा है।
प्रोजेक्ट में दर्शाए श्रमिकों की संख्या सही है
इस बारे में कंपनी के स्थानीय सहायक प्रबंधक चंदन नाथ ने बताया प्रोजेक्ट में सारे कर्मचारी श्रमिक काम कर रहे हैं। उनकी दर्शाई गई संख्या सही है। मजदूर संघ क्यों आपत्ति जता रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए।
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