राजस्व कार्यों के मोर्चे पर फिसड्डी ये शहर: सीएम हेल्पलाइन में भी बुरी हो गई हालत; कार्यप्रणाली पर सवाल के बाद कलेक्टर के तीखे तेवर
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
राजस्व कार्यों के मोर्चे पर इंदौर जिला प्रशासन की स्थिति चिंताजनक सामने आई है। मूल नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन जैसे अहम प्रकरणों में निराकरण का प्रतिशत 50 फीसदी से भी कम है। वहीं मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली सीएम हेल्पलाइन में अप्रैल में ‘ए’ ग्रेड पर रहा जिला मई में सीधे ‘डी’ ग्रेड पर पहुंच गया है।
राजस्व कार्यों की समीक्षा
बुधवार शाम कलेक्टर शिवम वर्मा ने एसडीएम और तहसीलदारों की बैठक लेकर राजस्व कार्यों की समीक्षा की। बैठक में सामने आए आंकड़ों ने विभागीय कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए।
कलेक्टर को अधिकारियों को सख्त लहजे में काम के प्रति गंभीर होने और पटवारियों पर नियंत्रण रखने की हिदायत देनी पड़ी। गौरतलब है कि इंदौर में डिप्टी कलेक्टर से लेकर तहसीलदारों तक पर्याप्त अमला तैनात है। प्रोटोकॉल ड्यूटी के लिए अलग व्यवस्था होने के बावजूद राजस्व कार्यों में ढिलाई सामने आ रही है।
राजस्व प्रकरणों का हाल
अविवादित नामांतरण: 16,480 मामलों में से 8,571 का निराकरण, यानी करीब 50%। विवादित नामांतरण: 748 में से 323 मामले निपटे, मात्र 43%। अविवादित बंटवारा: 782 में से सिर्फ 176 प्रकरण निस्तारित, 27.51%। विवादित बंटवारा: 22 में से 7 मामलों का निराकरण, लगभग 32%। सीमांकन: 6,396 में से 2,868 मामले पूरे, करीब 45%।
ये अधिकारी सबसे पीछे
अविवादित नामांतरण में हातोद के आगरा सर्कल, देपालपुर, कनाडिया, गौतमपुरा सर्कल और बिचौली हप्सी के नायब तहसीलदार निचले पायदान पर हैं। विवादित नामांतरण में कनाडिया तहसील, आगरा सर्कल (हातोद), हातोद, कनाडिया के तहसीलदार और महू तहसील का प्रदर्शन कमजोर रहा।
अविवादित बंटवारे में कनाडिया व महू के तहसीलदार और हातोद की कोर्ट सबसे पीछे है। सीमांकन कार्यों में खुड़ैल, आगरा सर्कल और कनाडिया क्षेत्र के अधिकारी पिछड़ते नजर आए।
सीएम हेल्पलाइन में गिरावट
मुख्यमंत्री की प्राथमिकता वाली सीएम हेल्पलाइन में भी जिले की स्थिति खराब हो गई है। अप्रैल में ‘ए’ ग्रेड पर रहा इंदौर मई में सीधे ‘डी’ ग्रेड पर पहुंच गया। मई में 1,210 शिकायतें प्राप्त हुईं, जिनमें से केवल 44% का निराकरण हो पाया। इसी के चलते प्रदेश स्तर पर इंदौर 30वें स्थान पर खिसक गया।
लोक सेवा गारंटी भी प्रभावित
लोक सेवा गारंटी अधिनियम के तहत समय-सीमा में सेवाएं देना अनिवार्य है और देरी पर पेनल्टी का प्रावधान है। इसके बावजूद मई में 527 नामांतरण आवेदन ऐसे हैं, जिनकी समय-सीमा समाप्त हो चुकी है। सीमांकन के 725 प्रकरण भी समय-सीमा के बाहर लंबित हैं।
नियमों के अनुसार इन मामलों में संबंधित अधिकारियों पर जुर्माना लगना चाहिए, लेकिन अब तक ऐसी कार्रवाई सामने नहीं आई है। राजस्व विभाग की सुस्त कार्यप्रणाली और सीएम हेल्पलाइन में गिरते प्रदर्शन ने प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि समीक्षा बैठक के बाद हालात में कितना सुधार आता है।
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