कोई मामला लंबित नहीं है: कोर्ट में केस चल रहा था; शपथ-पत्र देकर कहा
KHULASA FIRST
संवाददाता

फर्जीवाड़े के आरोपों पर प्रशासन की कार्रवाई
‘सत्वा’ की विकास अनुज्ञा और टीएनसी रद्द
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
नगर तथा ग्राम निवेश और जिला प्रशासन ने फर्जीवाड़ा कर टीएनसी हासिल करने के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए बड़ियाकीमा स्थित ‘सत्वा' कॉलोनी की विकास अनुमति निरस्त कर दी है। कोर्ट में दीवानी मामला लंबित होने के बावजूद डेवलपर्स ने शपथ-पत्र देकर जमीन को पूरी तरह विवाद रहित बताया था।
शिकायत के बाद हरकत में आए प्रशासन और नगर तथा ग्राम निवेश विभाग की जांच में सच सामने आने पर मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम-2012 के नियम 25 के तहत सुपरलेटिव देवकॉन एलएलपी और सिग्निफिकेंट इंफ्रावेंचर्स एलएलपी की अनुज्ञा रद्द की गई है।
अदालत के कटघरे में जमीन का बंटवारा और मालिकाना हक तय होना बाकी था, लेकिन फाइलों के पन्नों पर हलफनामा देकर कह दिया गया कि जमीन पूरी तरह से बेदाग और विवाद रहित है। इंदौर के रियल एस्टेट गलियारे में तथ्य छिपाकर कॉलोनाइजिंग का खेल खेलने का यह मामला सामने आने के बाद प्रशासनिक चाबुक चला है।
मामले का पूरा घटनाक्रम मार्च 2023 से शुरू होता है, जब नगर तथा ग्राम निवेश विभाग द्वारा बड़ियाकीमा की विवादित जमीन पर आवासीय भूखंडीय विकास की हरी झंडी दी गई थी।
अनुमति मिलने के बाद जब जमीन पर कॉलोनाइजिंग की गतिविधियां शुरू हुईं, तब शिकायतकर्ताओं ने कोर्ट और प्रशासनिक मंचों पर दस्तक दी। दुधिया निवासी सन्नी उर्फ श्रवण और कुसुम ने उच्च न्यायालय से लेकर विभागीय अधिकारियों तक शिकायतें भेजीं।
जांच के बाद दोनों पक्षों को तलब कर सुनवाई की गई। साक्ष्यों के आधार पर यह साबित हुआ कि अनुमति लेते समय तथ्य छिपाए गए थे, जिसके बाद नगर तथा ग्राम निवेश ने अनुज्ञा निरस्त करने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया।
आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार यह पूरी कार्रवाई बिचौली हप्सी तहसील के ग्राम बड़ियाकीमा स्थित कृषि भूमि के सर्वे क्रमांक 145/1, 150/2, 151, 152, 153/1 और 153/2 के कुल 2.273 हेक्टेयर रकबे से जुड़ी है।
इस परियोजना के विकासकर्ता सुपरलेटिव देवकॉन एलएलपी के भागीदार श्वेतांक श्रीमाल, पुलकित माहेश्वरी, जसप्रीत सिंह भाटिया और सिग्निफिकेंट इंफ्रावेंचर्स एलएलपी के भागीदार बीना संघवी, अंकित पटेल तथा गिरिराजसिंह पटेल हैं।
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया था कि बड़ियाकीमा की उक्त भूमि पर उनका मालिकाना हक और बंटवारे का अधिकार जुड़ा हुआ है। डेवलपर्स ने विभागीय अनुमति प्राप्त करते समय जानबूझकर यह बात छुपाई कि जमीन पर सक्षम न्यायालय के समक्ष मालिकाना हक का मुकदमा चल रहा है।
शिकायतकर्ताओं के मुताबिक यदि न्यायालयीन विवाद की बात फाइल पर आ जाती, तो मार्च 2023 में यह अनुमति मिलना संभव नहीं था। इस पूरे मामले का सबसे बड़ा कानूनी पेंच सिविल कोर्ट में लंबित मुकदमे से जुड़ा है।
संबंधित भूमि पर स्वत्व, बंटवारे और स्थायी निषेधाज्ञा का दीवानी दावा प्रकरण क्रमांक 230-ए/2023 के तहत न्यायालय में विचाराधीन था। कानूनन यदि किसी भूमि के मालिकाना हक को लेकर कोई सिविल मुकदमा कोर्ट में लंबित है या स्थायी निषेधाज्ञा का विषय है, तो उस पर किसी भी प्रकार के व्यावसायिक या आवासीय लेआउट की मंजूरी प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए। कोर्ट केस के रहते जमीन की स्थिति को स्पष्ट किए बिना विकास अनुमति जारी होना कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण माना जाता है।
विकास अनुमति और लेआउट पास कराने के लिए आवेदकों द्वारा दिया गया शपथ-पत्र ही इस पूरी कार्रवाई का मुख्य आधार बना। अनुमति प्राप्त करते समय हलफनामा देकर लिखित में यह दावा किया गया कि जमीन पूरी तरह से विवाद रहित है और इस पर कोई न्यायालयीन मामला लंबित नहीं है।
जांच में सामने आया कि यह कथन असत्य था, क्योंकि भूमि पहले से ही अदालती विवाद के घेरे में थी।
शिकायत के बाद नगर तथा ग्राम निवेश के संयुक्त संचालक शुभाशीष बैनर्जी द्वारा मामले की पड़ताल कराई गई। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और कोर्ट संबंधी साक्ष्यों के मिलान के बाद विभागीय जांच इस निष्कर्ष पर पहुंची कि डेवलपर संस्था द्वारा अनुमति लेते समय मिथ्या कथन किए गए और सारवान तथ्यों को दबाया गया।
इसके बाद मध्य प्रदेश भूमि विकास नियम 2012 के नियम 25 के तहत प्रदत्त शक्तियों का उपयोग करते हुए मार्च 2023 में जारी विकास अनुज्ञा को तत्काल प्रभाव से निरस्त कर दिया गया।
संयुक्त संचालक शुभाशीष बैनर्जी द्वारा जारी आदेश के बाद सत्वा कॉलोनी का टीएनसी अप्रूवल पूरी तरह से रद्द हो गया है। तकनीकी और कानूनी रूप से टीएनसी रद्द होने का सीधा अर्थ यह है कि उक्त 2.273 हेक्टेयर भूमि पर स्वीकृत किया गया आवासीय लेआउट अब अमान्य हो चुका है।
बिना वैध टीएनसी और विकास अनुमति के उस भूमि पर किसी भी प्रकार का निर्माण या भूखंडीय विकास अवैध माना जाएगा।
प्लॉट खरीदना आम नागरिकों के लिए बड़ा आर्थिक जोखिम
विवादित या तथ्य छिपाकर पास कराई गई कॉलोनियों में प्लॉट खरीदना आम नागरिकों के लिए बड़ा आर्थिक जोखिम साबित होता है। जब किसी कॉलोनी की टीएनसी या विकास अनुमति रद्द होती है, तो रजिस्ट्री रुक जाती है, नगर निगम से निर्माण अनुमति नहीं मिलती और बैंक लोन जारी नहीं करते।
कलेक्टर शिवम वर्मा और अपर जिला मजिस्ट्रेट रिंकेश वैश्य के निर्देशों के बाद हुई इस कार्रवाई से विवादित जमीनों पर कागजी बाजीगरी करने वाले कॉलोनाइजरों में खलबली का माहौल है।
सत्वा कॉलोनी के मामले में विकास अनुज्ञा रद्द होने के बाद अब सभी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या पंजीयन विभाग और पुलिस प्रशासन इस मामले में शपथ-पत्र में गलत जानकारी देने को लेकर कोई आपराधिक या अन्य वैधानिक कदम उठाता है।
दस्तावेज सामने न आते, तो तथ्य फाइलों में दबा रह जाता
प्रशासनिक स्तर पर मामले को केवल अनुज्ञा निरस्तीकरण तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि अपर कलेक्टर, उपखंड अधिकारी बिचौली हप्सी, इंदौर विकास प्राधिकरण, मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और वरिष्ठ जिला पंजीयक को भी इसकी आधिकारिक सूचना भेजी गई है, ताकि मैदानी स्तर पर अवैध निर्माण और भूखंडों की बिक्री या रजिस्ट्री पर तत्काल रोक लगाई जा सके।
इस कड़े आदेश के साथ ही एक बड़ा प्रशासनिक सवाल भी खड़ा होता है। जब मार्च 2023 में 2.273 हेक्टेयर जैसी बड़ी भूमि पर विकास अनुज्ञा दी जा रही थी, तब क्या विभागीय स्तर पर केवल डेवलपर के हलफनामे को ही अंतिम सच मान लिया गया?
जमीन के राजस्व और अदालती रिकॉर्ड की स्वतः जांच करने की व्यवस्था प्रक्रिया में क्यों कारगर नहीं हो पाई? यह सवाल इसलिए भी अहम है क्योंकि अगर शिकायतकर्ता दस्तावेज लेकर सामने न आते, तो यह तथ्य फाइलों में दबा ही रह जाता।
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