मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश, लेकिन पटाखा कारोबार पर प्रशासन मेहरबान: सील दुकानें दोबारा खुली; कार्रवाई का असर कहां?
KHULASA FIRST
संवाददाता

थोक-खेरची लाइसेंस में परिवारवाद के आरोप, एक ही परिवार के नाम दोनों लाइसेंस; भंडारण क्षमता की जांच गायब, किराये के लाइसेंस और 30 हजार की वसूली पर भी कार्रवाई नहीं
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दीपावली पर प्रतिबंधित पटाखों, कार्बाइड गन और कार्बाइड लैंप के इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। प्रदेश के सभी कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में कानून व्यवस्था और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को कहा गया है, लेकिन इंदौर में पटाखा कारोबार की व्यवस्था पर नजर डालें तो मुख्यमंत्री के निर्देशों और जमीनी कार्रवाई के बीच बड़ा अंतर दिखाई देता है।
विस्फोटक अधिनियम के तहत लाइसेंस में निर्धारित भंडारण क्षमता की जांच, थोक और खेरची लाइसेंस के आवंटन में कथित परिवारवाद, लाइसेंस किराये पर देने और दुकान निर्माण के नाम पर वसूली जैसे मामलों का लगातार खुलासा किया है। इसके बावजूद इन शिकायतों पर प्रशासन की जांच और कार्रवाई सार्वजनिक नहीं हुई है।
एक परिवार, दो तरह के लाइसेंस; नए व्यापारियों के लिए रास्ते बंद?- पटाखा कारोबार में लाइसेंस वितरण को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि वर्षों से नए व्यापारियों को लाइसेंस जारी नहीं किए जा रहे, जबकि कुछ परिवारों के सदस्यों के नाम थोक और खेरची दोनों तरह के लाइसेंस हैं।
रीजनल पार्क के थोक पटाखा बाजार में दुकान आवंटित होने के साथ उन्हीं व्यापारियों के परिवार के सदस्यों के नाम शहर के खेरची बाजारों में भी लाइसेंस जारी होने की शिकायतें सामने आई हैं।
दशहरा मैदान में अस्थायी पटाखा बाजार की एसोसिएशन के पदाधिकारियों को भी थोक और खेरची दोनों प्रकार के लाइसेंस जारी होने की बात का खुलासा हुआ है। सवाल यह है कि जब सामान्य व्यापारियों के लिए लाइसेंस की पात्रता और संख्या निर्धारित है तो कुछ लोगों को दोनों श्रेणियों में लाइसेंस कैसे मिले? प्रशासन को पिछले कई वर्षों का रिकॉर्ड खंगालकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसे कितने लाइसेंस जारी हुए और उनके पीछे कौन से पात्रता मापदंड अपनाए गए।
लाइसेंस में भंडारण की सीमा तय, गोदामों में कितना माल इसका हिसाब नहीं- विस्फोटक अधिनियम के तहत जारी थोक और खेरची लाइसेंस में पटाखों के भंडारण की अधिकतम क्षमता निर्धारित होती है। इसके बावजूद जिले में दुकानों और गोदामों में वास्तविक स्टॉक का कितना भंडारण किया जा रहा है, इसकी जांच को लेकर प्रशासन की ओर से स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
सूत्रों के अनुसार कुछ थोक और खेरची व्यापारियों द्वारा निर्धारित क्षमता से अधिक पटाखे रखने की शिकायतें हैं। ऐसे में प्रत्येक लाइसेंसधारी के स्टॉक का भौतिक सत्यापन, लाइसेंस में दर्ज क्षमता से मिलान और गोदामों की सुरक्षा जांच जरूरी है। केवल लाइसेंस जारी कर देना पर्याप्त नहीं है, उसकी शर्तों का पालन कराना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
दुकान निर्माण से लेकर लाइसेंस किराये पर देने तक शिकायतें- पटाखा कारोबार में अनियमितताओं की शिकायतें केवल लाइसेंस और भंडारण तक सीमित नहीं हैं। रीजनल पार्क के थोक बाजार में दुकान निर्माण, कथित किराया व्यवस्था और लाइसेंस दूसरे लोगों को देकर कारोबार कराने के आरोप भी पहले सामने आ चुके हैं।
सितंबर में प्रमुख सचिव, संभागायुक्त और कलेक्टर को शिकायत देकर सात वर्षों के लाइसेंस रिकॉर्ड और वास्तविक कारोबारियों की जांच की मांग की गई थी, वहीं दशहरा मैदान सहित शहर के विभिन्न खेरची पटाखा बाजारों में दुकान निर्माण के नाम पर 30 हजार रुपए प्रति दुकान वसूली के आरोप भी सामने आए।
करीब 143 दुकानों के निर्माण के आधार पर लगभग 42.90 लाख रुपए की राशि का हिसाब बनता है। एसोसिएशन के अध्यक्ष ने 30 हजार रुपए में निर्माण और बिजली व्यवस्था का खर्च शामिल होने की बात कही थी। संगठन के पंजीयन और राशि के हिसाब-किताब को लेकर भी सवाल उठे थे।
कार्बाइड गन पर सख्ती, विस्फोटक भंडारण पर भी हो कार्रवाई- मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि दीपावली पर अवैध और प्रतिबंधित पटाखों का उपयोग नहीं होने पाए। मानव स्वास्थ्य के लिए हानिकारक कार्बाइड गन और कार्बाइड लैंप पर भी अंकुश लगाया जाए।
उन्होंने छोटे दुकानदारों को तहबाजारी (बाजार, हाट, फुटपाथ या सार्वजनिक जमीन पर अस्थाई दुकान लगाने के बदले सरकार या नगर निगम द्वारा लिया जाने वाला किराया या टैक्स) से छूट देने और उन्हें अनावश्यक परेशान नहीं करने के निर्देश भी दिए हैं, लेकिन इंदौर में प्रशासन के सामने इससे बड़ा दायित्व यह भी है कि लाइसेंसधारियों के गोदामों और दुकानों में निर्धारित क्षमता के अनुसार ही विस्फोटक सामग्री रखी जाए। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ समान रूप से कार्रवाई हो।
सूत्रों के अनुसार राऊ क्षेत्र में कुछ व्यापारियों ने अवैध रूप से पटाखा दुकानें संचालित की थीं, जिन्हें प्रशासन ने सील किया था। आरोप है कि बाद में प्रशासन के पास लाखों रुपए जमा कराकर उनका संचालन फिर शुरू कर दिया गया। यदि ऐसा हुआ है तो प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि राशि किस मद में जमा कराई गई, दुकानें खोलने की अनुमति किस आधार पर दी गई और संबंधित लाइसेंस की वैधता का सत्यापन किसने किया।
अब प्रशासन से सीधे सवाल हैं
1. एक ही परिवार के सदस्यों के नाम थोक और खेरची लाइसेंस कितने जारी हुए?
2. नए व्यापारियों को पिछले वर्षों में कितने लाइसेंस दिए गए?
3. लाइसेंस में निर्धारित क्षमता के मुकाबले गोदामों में कितना पटाखा मिला?
4. सील दुकानों को दोबारा खोलने की अनुमति और जमा राशि का आधार क्या था?
5. लाइसेंस किराये पर देने की शिकायतों पर क्या जांच हुई?
6. खेरची बाजारों में 30 हजार रुपए प्रति दुकान वसूली का हिसाब किसने जांचा?
मुख्यमंत्री के निर्देशों का असली परीक्षण प्रतिबंधित पटाखों पर कार्रवाई तक सीमित नहीं है। विस्फोटक भंडारण, लाइसेंस वितरण और बाजार संचालन में नियमों का समान पालन भी उतना ही जरूरी है। सवाल यह है कि प्रशासन आम व्यापारियों के लिए नियमों की सख्ती दिखाएगा या प्रभावशाली लाइसेंसधारियों के मामलों में भी वही कार्रवाई करेगा?
करोड़ों के कारोबार में किसे फायदा, प्रशासन कब खोलेगा रिकॉर्ड?
पटाखा बाजार में लाइसेंस आवंटन, परिवार के सदस्यों के नाम कई लाइसेंस, कथित किराया व्यवस्था, भंडारण क्षमता और दुकान निर्माण के नाम पर वसूली जैसे मामले एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। इनकी निष्पक्ष जांच के लिए प्रशासन को पिछले वर्षों का लाइसेंस रिकॉर्ड, दुकान आवंटन सूची, गोदामों का भौतिक सत्यापन और वसूली गई राशि का हिसाब सार्वजनिक करना चाहिए।
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