जलवायु संकट और उम्मीद के बीच खड़ी दुनिया: विश्व पर्यावरण दिवस-2026
KHULASA FIRST
संवाददाता

डॉ. संतोष पाटीदार 93400-81331 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कहीं समुद्र का बढ़ता प्रदूषण और तेजी से बढ़ता उसका जलस्तर तटीय बस्तियों को निगल रहा है, कहीं जंगलों की आग लाखों हेक्टेयर हरियाली को राख में बदल रही है।
कहीं तापमान के रिकॉर्ड टूट रहे हैं तो कहीं हजारों वर्षों से जमे ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। ये संकेत भविष्य की चेतावनी नहीं, वर्तमान का यथार्थ है और यह कहानी दीवार पर लिखी इबारत की तरह स्पष्ट है।
विश्व पर्यावरण दिवस-2026 ऐसे समय आया है, जब दुनिया वैश्विक तापमान या ग्लोबल वार्मिंग की उस 1.5 डिग्री सेल्सियस सीमा के बेहद करीब पहुंच चुकी है, जिसे वैज्ञानिकों ने जलवायु आपदा की अंतिम लाइन या सीमा रेखा माना था।
इंसान के लालच, तृष्णा और प्राकृतिक संसाधनों के अति दोहन की लालसा से खतरे की सीमा पार हो रही है। अर्थात मानव समाज के अत्याचार से धरती का बुखार लगातार बढ़ रहा है यानी गर्म हो रही है।
हम तबाही के करीब या तबाही की ओर बढ़ रहे हैं। जिस तरह ताकतवर राष्ट्र दुनियाभर के प्राकृतिक संसाधनों को लूट कर और इसके लिए प्रकृति और इंसान को तबाह करने वाले युद्ध कर रहे हैं इससे दुनिया तेजी से तबाही की ओर जा रही है।
दशकों से सरकारें, वैज्ञानिक और अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं चेतावनी दे रही हैं, लेकिन राजनीतिक इच्छाशक्ति, आर्थिक हित और विकास की पारंपरिक अवधारणाओं के बीच जलवायु संकट पीछे छूटता जा रहा है तो क्या मानव समाज द्वारा निर्मित यह भयावह स्थिति किसी प्रलय का कारण बनेगी ?
या अभी भी वक्त है कुछ करने का और वह भी तत्काल अपनी जिम्मेदारी समझ कर कुछ करने का क्योंकि निराशा के बीच कहानी का दूसरा उम्मीद भरा उजाला पक्ष भी है।
यूएनओ का संदेश
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ( यूएनईपी) ने इस वर्ष का वैश्विक संदेश दिया है #NowForClimate (अभी जलवायु के लिए)। यानी प्रकृति के संरक्षण के लिए बिना देर किए जिम्मेदारी निभाएं। संदेश केवल एक अभियान नहीं बल्कि प्रश्न है अभी नहीं, तो कब? क्योंकि तत्काल कदम नहीं उठा तो बहुत देर हो जाएगी।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव केवल बढ़ते तापमान तक सीमित नहीं है। इससे मानव की सेहत का सीधा रिश्ता है इंसान के साथ सभी जीवित प्राणियों के जीवन का संकट है। यह खाद्य सुरक्षा, जल उपलब्धता, सार्वजनिक स्वास्थ्य, रोजगार, अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता से सीधे जुड़ा है।
दुनिया के किसान बदलते मौसम चक्रों से प्रभावित हो रहे हैं। सूखा, बाढ़ और असामान्य वर्षा कृषि उत्पादन को प्रभावित कर रहे हैं। गर्मी की लहरें शहरों को रहने लायक कम और ऊर्जा पर निर्भर अधिक बना रही हैं।
विशेषज्ञों का अनुमान है समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दशकों में वैश्विक अर्थव्यवस्था को खरबों डॉलर का नुकसान हो सकता है और लाखों लोगों का जीवन खतरे में पड़ सकता है।
समाधान मौजूद है
अच्छी खबर है समाधान पहले से मौजूद हैं। हमारे पास ही है इन्हें समझना और प्रयोग में लाना होगा। खाद्य अपशिष्ट को कम करना, टिकाऊ कृषि अपनाना, ऊर्जा दक्ष इमारतों का निर्माण, मीथेन उत्सर्जन में कमी, वन संरक्षण और नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार ऐसे कदम हैं जिनके सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं।
कई देशों और बाजारों में सौर और पवन ऊर्जा की लागत कोयला आधारित बिजली उत्पादन से कम हो चुकी है। इलेक्ट्रिक वाहनों का प्रसार बढ़ रहा है। ऊर्जा परिवर्तन अब केवल पर्यावरणीय आवश्यकता नहीं बल्कि आर्थिक अवसर भी बनता जा रहा है।
प्रकृति सबसे बड़ी योद्धा
जलवायु संकट से लड़ने में प्रकृति स्वयं सबसे प्रभावी सहयोगी है। वन, आर्द्रभूमि, महासागर और मिट्टी विशाल कार्बन सिंक के रूप में काम करते हैं। वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित करते हैं, जल चक्र को संतुलित रखते हैं और जैव विविधता को संरक्षित करते हैं।
पारिस्थितिकी तंत्रों की बहाली केवल पर्यावरण संरक्षण नहीं, रोजगार सृजन, ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और आपदाओं से सुरक्षा प्रदान करने का माध्यम भी है। एक स्वस्थ जंगल केवल पेड़ों का समूह नहीं, जलवायु सुरक्षा कवच होता है।
शहर: समस्या भी, समाधान भी
विश्व के शहर वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का 70 प्रतिशत से अधिक हिस्सा उत्पन्न करते हैं लेकिन समाधान की सबसे बड़ी प्रयोगशालाएं भी यही हैं। शहरी हरित क्षेत्र, ऊर्जा दक्ष भवन, सार्वजनिक परिवहन, साइकिल नेटवर्क और टिकाऊ शीतलन प्रणालियां शहरों को अधिक रहने योग्य बना सकती हैं।
अध्ययनों से पता चला है शहरी हरित क्षेत्र तापमान को कई डिग्री तक कम कर सकते हैं और बाढ़ के जोखिम को भी घटा सकते हैं।
जलवायु संरक्षण पर खर्च निवेश
जलवायु परिवर्तन पर कार्रवाई को अक्सर लागत के रूप में देखा जाता है, जबकि वास्तविकता विपरीत है। स्वच्छ ऊर्जा, हरित अवसंरचना और जलवायु अनुकूलन में निवेश नए रोजगार, तकनीकी नवाचार और आर्थिक विकास के अवसर पैदा कर रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार जलवायु परिवर्तन से निपटने की दिशा में उठाए गए कदम आने वाले वर्षों में वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए खरबों डॉलर के अवसर पैदा कर सकते हैं।
संबंधित समाचार

भाजपा प्रदेशाध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने जाने नगराध्यक्ष मिश्रा के हालचाल, पौधा रोपा

70 दिन में 479 मोटर जब्त पानी बर्बाद करने वालों पर जुर्माना:नर्मदा लाइन से अवैध पानी खींचने पर नगर निगम सख्त

हेमकुंड यात्रा मार्ग पर महिला श्रद्धालु अस्वस्थ:पुलिस एसडीआरएफ जवानों ने सुरक्षित गोविंदधाम पहुंचाया

करोड़ों भारतीयों की आस्था की धुरी मोक्षदायिनी मां गंगा
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!