विधानसभा में उठा औद्योगिक भूमि हस्तांतरण का मामला: एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज मप्र अध्यक्ष की कंपनियों को नियम विरुद्ध लाभ देने का आरोप; सरकार बोली- अनुमति नहीं दी, ऑडिट के बाद पूरी राशि वसूली
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में इंदौर की औद्योगिक भूमि के हस्तांतरण से जुड़ा मामला गूंजा। विधायक सोहनलाल वाल्मीक के साथ विधायक महेंद्र हार्डिया ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री से प्रश्न पूछते हुए आरोप लगाया कि एसोसिएशन ऑफ इंडस्ट्रीज म.प्र. (AIMP) इंदौर के अध्यक्ष तथा मेसर्स नीव एलॉयज एंड मेटल्स प्रा.लि. एवं मेसर्स व्यंकटेश एलॉयज एंड मेटल प्रा.लि. के संचालक योगेश मेहता को औद्योगिक भूमि हस्तांतरण शुल्क जमा करने में नियमों के विपरीत वर्षों तक बिना ब्याज की सुविधा देकर वित्तीय लाभ पहुंचाया गया।
इसमें योगेश मेहता की पत्नी निर्मला मेहता का भी उल्लेख है। वे वेंकटेश मेटल और एलाइंस प्लॉट क्रमांक 37 ए सेक्टर सी सांवेर रोड इंदौर की प्रोपराइटर हैं। भाजपा सहकारिता प्रकोष्ठ के पूर्व नगर संयोजक जगमोहन वर्मा के अनुसार उनकी ठोस शिकायत के आधार पर सरकार को लाखों रुपये का लाभ हुआ।
विधायक ने पूछा कि क्या प्रदेश में औद्योगिक भूमि हस्तांतरण के मामलों में शासन 100 प्रतिशत शुल्क प्राप्त किए बिना केवल 30 प्रतिशत राशि जमा होने पर हस्तांतरण आदेश जारी कर सकता है तथा शेष 70 प्रतिशत राशि 12 से 14 वर्षों में बिना ब्याज जमा करने की अनुमति देता है।
यदि ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, तो फिर योगेश मेहता की कंपनियों को पूर्ण हस्तांतरण शुल्क बिना ब्याज किस्तों में जमा करने के लिए 12 से 14 वर्ष का समय क्यों दिया गया। साथ ही उन्होंने यह भी पूछा कि क्या सरकार इस मामले में लोक लेखा समिति अथवा विभागीय जांच कराकर ब्याज की वसूली के लिए भू-राजस्व बकाया (RRC) की कार्रवाई करेगी और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार ने क्या जवाब दिया
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री चैतन्य कुमार काश्यप ने विधानसभा में लिखित उत्तर में कहा कि प्रदेश में औद्योगिक भूमि एवं भवन का आवंटन और प्रबंधन म.प्र. एमएसएमई औद्योगिक भूमि तथा भवन आवंटन एवं प्रबंधन नियम, 2025 के नियम 18 के तहत किया जाता है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि शासन द्वारा संबंधित कंपनियों को 12 से 14 वर्ष का समय प्रदान नहीं किया गया था।
उत्तर में बताया गया कि वर्ष 2017 में महालेखाकार (ऑडिट) के निरीक्षण प्रतिवेदन के माध्यम से यह मामला सामने आया। ऑडिट दल द्वारा निकाली गई शेष राशि में से मेसर्स नीव मेटल एंड एलॉयज प्रा.लि. से ₹8,75,562 तथा मेसर्स व्यंकटेश एलॉयज एंड मेटल प्रा.लि. से ₹19,28,265 की पूर्ण वसूली की जा चुकी है।
सरकार ने यह भी बताया कि प्रश्न में उल्लिखित इकाइयों के संबंध में कार्यालय प्रधान महालेखाकार (लेखा परीक्षा-2), मध्यप्रदेश, भोपाल के विशेष ऑडिट दल द्वारा 23 जून 2026 को लेखा परीक्षण किया गया है। हालांकि, लेखा परीक्षण प्रतिवेदन अभी अप्राप्त है।
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