कलेक्ट्रेट में फर्जी जाति प्रमाणपत्र का मामला फिर गरमाया: भाजपा पार्षद के बचाव में पेश किए गए दो प्रमाणपत्र निकले फर्जी; तत्कालीन एसडीएम की भूमिका पर सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
इंदौर कलेक्ट्रेट एक बार फिर फर्जी जाति प्रमाणपत्र मामले को लेकर सवालों के घेरे में है। मामला भाजपा पार्षद और वार्ड-65 के पार्षद कमलेश कालरा के ओबीसी जाति प्रमाणपत्र से जुड़ा है। कालरा के जाति प्रमाणपत्र को सही साबित करने के लिए जांच के दौरान पेश किए गए दो अन्य प्रमाणपत्र अब जांच में फर्जी पाए गए हैं। इन प्रमाणपत्रों को जारी करने वाले तत्कालीन एसडीएम जूनी इंदौर की भूमिका पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिकायत के बाद वर्तमान एसडीएम घनश्याम धनगर ने दोनों प्रमाणपत्रों को निरस्त कर दिया है।
कमलेश कालरा सिंधी समाज से आते हैं। उन्होंने 9 नवंबर 2009 को खुद को लोहार जाति का बताते हुए ओबीसी प्रमाणपत्र बनवाया था। वर्ष 2022 में जब वे इंदौर नगर निगम चुनाव में पार्षद बने, तब उनके इस प्रमाणपत्र को लेकर सुनील यादव और गोपाल कोडवानी ने शिकायत की थी। इसके बाद मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच तक पहुंचा और जाति प्रमाणपत्र की जांच शुरू हुई।
जांच के दौरान 30 सितंबर 2022 को तत्कालीन एसडीएम जूनी इंदौर अक्षय मरकाम ने जयेश राजानी और चंद्रकुमार नाम के दो व्यक्तियों के नाम से लोहार जाति के ओबीसी प्रमाणपत्र जारी किए थे। इन प्रमाणपत्रों को कालरा की ओर से यह बताने के लिए पेश किया गया था कि लोहार समाज के अन्य लोगों को भी ओबीसी प्रमाणपत्र जारी हुए हैं।
बाद में इन दोनों प्रमाणपत्रों को लेकर भी शिकायत हुई। जांच में जयेश राजानी ने बताया कि उन्होंने जाति प्रमाणपत्र बनवाने के लिए आवेदन ही नहीं किया था। इसके बाद जूनी इंदौर एसडीएम घनश्याम धनगर ने जांच के बाद दोनों प्रमाणपत्रों को निरस्त कर दिया।
अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब संबंधित व्यक्तियों ने आवेदन ही नहीं किया था, तो तत्कालीन एसडीएम अक्षय मरकाम ने ये प्रमाणपत्र किस आधार पर जारी किए। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह प्रमाणपत्र कालरा के पक्ष को मजबूत करने के उद्देश्य से बनवाए गए थे, क्योंकि उस समय उनके जाति प्रमाणपत्र की जांच चल रही थी और उनसे समाज के अन्य लोगों के प्रमाणपत्र मांगे गए थे।
शिकायतकर्ताओं का कहना है कि 30 सितंबर 2022 को आवेदन और उसी दिन प्रमाणपत्र जारी होना भी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है, क्योंकि सामान्य तौर पर जाति प्रमाणपत्र जारी करने में जांच के बाद समय लगता है। उनका आरोप है कि इन प्रमाणपत्रों के आधार पर कालरा ने उच्च स्तरीय ओबीसी छानबीन समिति के सामने अपना पक्ष मजबूत किया।
इस मामले में एक और महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि तत्कालीन एसडीएम अक्षय मरकाम खुद भी जाति प्रमाणपत्र विवाद में घिरे रहे हैं। मनावर से कांग्रेस विधायक डॉ. हीरालाल अलावा ने मध्यप्रदेश विधानसभा में उनके कथित फर्जी एसटी प्रमाणपत्र को लेकर सवाल उठाए थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि इंदौर की जूनी इंदौर तहसील से फर्जी जाति प्रमाणपत्र बनाए जा रहे हैं। सरकार ने विधानसभा में मामले की जांच कराने की बात कही थी।
कमलेश कालरा के मामले में हाईकोर्ट के आदेश के बाद उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने जांच की थी। समिति ने इंदौर जिला प्रशासन से रिकॉर्ड मांगा था। प्रशासन की रिपोर्ट में बताया गया कि कालरा के जाति प्रमाणपत्र के मूल दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, हालांकि दायरा पंजी में 9 नवंबर 2009 को लोहार जाति ओबीसी प्रमाणपत्र जारी होने की एंट्री दर्ज है।
कालरा ने जांच के दौरान कहा था कि उनके मूल दस्तावेज वर्ष 2006 में लगी आग में जल गए थे। शिकायतकर्ताओं ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्रमाणपत्र वर्ष 2009 में जारी हुआ था, तो उसके दस्तावेज वर्ष 2006 की आग में कैसे नष्ट हो सकते हैं। आरटीआई से मिली जानकारी में यह भी सामने आने का दावा किया गया था कि लोहार जाति ओबीसी सूची में शामिल नहीं है।
इसके बावजूद उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने उपलब्ध रिकॉर्ड और कालरा की ओर से पेश किए गए अन्य प्रमाणपत्रों के आधार पर उनके जाति प्रमाणपत्र को मान्य कर दिया था। अब जयेश राजानी और चंद्रकुमार के प्रमाणपत्र निरस्त होने के बाद इस फैसले पर भी सवाल उठ रहे हैं।
दो प्रमाणपत्र रद्द होने के बाद शिकायतकर्ता सुनील यादव ने अधिवक्ता मनीष यादव के माध्यम से हाईकोर्ट में फिर आवेदन लगाया है। इसमें सवाल उठाया गया है कि जब कालरा के पक्ष में पेश किए गए प्रमाणपत्र फर्जी पाए गए हैं, तो फिर उनके जाति प्रमाणपत्र पर दोबारा कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
इस मामले में कमलेश कालरा से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका पक्ष नहीं मिल सका। तत्कालीन एसडीएम अक्षय मरकाम ने कहा कि प्रमाणपत्र दस्तावेजों के आधार पर ही जारी किए जाते हैं और उस समय जो दस्तावेज प्रस्तुत किए गए होंगे, उन्हीं के आधार पर प्रमाणपत्र जारी किया गया होगा। वहीं एसडीएम घनश्याम धनगर ने दो प्रमाणपत्र निरस्त किए जाने की पुष्टि की है।
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