तनाव का असर: औद्योगिक नगरी पर छाए संकट के बादल; 30 हजार रोजगार खत्म, 25 हजार कर्मचारियों की सैलरी हुई आधी
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
अमेरिका-इजराइल और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अब मध्यप्रदेश के सबसे बड़े औद्योगिक हब पीथमपुर में साफ दिखाई देने लगा है। युद्ध यहां की फैक्ट्रियों, मजदूरों की रोजी-रोटी और उद्योगों के भविष्य पर भारी पड़ रहा है।
औद्योगिक नगरी पर संकट के बादल
करीब एक लाख से अधिक मजदूरों को रोजगार देने वाली औद्योगिक नगरी पीथमपुर इस समय अभूतपूर्व आर्थिक संकट से गुजर रही है। कच्चे माल की कमी, गैस सप्लाई में कटौती, लॉजिस्टिक लागत में बेतहाशा वृद्धि और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन के टूटने से उद्योगों की हालत बिगड़ती जा रही है।
5000 से ज्यादा उद्योग प्रभावित
इंदौर-पीथमपुर क्षेत्र के 5000 से अधिक उद्योग कच्चे माल के लिए 60% तक मिडिल ईस्ट देशों बहरीन, कतर और सऊदी अरब पर निर्भर हैं। इन देशों से आने वाले पेट्रोकेमिकल्स और बल्क ड्रग्स की सप्लाई बाधित हो गई है।
साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण समुद्री मार्ग जोखिम भरे हो गए हैं, जिससे आयात-निर्यात पर गहरा असर पड़ा है। चीन और यूरोप से आने वाली सप्लाई भी प्रभावित हो रही है और इंश्योरेंस कवर मिलना भी मुश्किल होता जा रहा है।
लॉजिस्टिक लागत 5 गुना
निर्यात क्षेत्र की स्थिति भी गंभीर बनी हुई है। कंटेनर भाड़ा पहले की तुलना में 5 गुना तक बढ़ गया है। इंदौर से हर महीने हजारों कंटेनर कांडला पोर्ट और जेएनपीटी पोर्ट भेजे जाते हैं, लेकिन अब शिपिंग में देरी और बढ़ी लागत के कारण विदेशी ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं।
प्रदेश के कुल निर्यात में पीथमपुर और इंदौर की हिस्सेदारी 40-50% तक है, ऐसे में यह संकट पूरे राज्य की अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है।
ईंधन संकट और नकद भुगतान का दबाव
एलपीजी की कमी के चलते उद्योगों को पीएनजी पर निर्भर होना पड़ रहा है। गैस कंपनियों ने उधार की सुविधा बंद कर दी है और नकद भुगतान की शर्त लागू कर दी है, जिससे उद्योगों की कार्यशील पूंजी पर भारी दबाव बन गया है।
रोजगार पर गहरा असर
सबसे ज्यादा असर प्लास्टिक उद्योग पर पड़ा है। कच्चे माल की कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। पीवीसी, पाइप, बोतल और पैकेजिंग से जुड़े कई यूनिट बंद होने की कगार पर हैं।
करीब 20 हजार मजदूरों का रोजगार खत्म
10 हजार से अधिक लोग अप्रत्यक्ष रूप से प्रभावित। 25 हजार कर्मचारियों की सैलरी आधी। जो फैक्ट्रियां पहले 2-3 शिफ्ट में चलती थीं, अब वहां सिर्फ एक शिफ्ट में काम हो रहा है।
पीथमपुर औद्योगिक संगठन के अध्यक्ष डॉ. गौतम कोठारी के अनुसार, गैस आधारित 100 से अधिक यूनिट में सप्लाई 50% तक घट गई है।
फार्मा सेक्टर पर डबल मार
कच्चे माल और गैस संकट का असर फार्मा सेक्टर पर भी पड़ रहा है। इंजेक्शन और अन्य दवाओं का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। पैरासिटामॉल पाउडर के दाम 20-30% बढ़े। पैकेजिंग सामग्री महंगी। आने वाले 10-12 दिनों में सप्लाई प्रभावित होने की आशंका।
एआईओसीडी के महासचिव राजीव सिंघल के मुताबिक, फिलहाल आम जनता पर बोझ न पड़े, इसलिए दवाओं के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं।
बढ़ सकता है संकट
उद्योगपतियों का कहना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय तनाव जल्द खत्म नहीं हुआ, तो बड़े पैमाने पर फैक्ट्री शटडाउन हो सकते हैं, जिससे लाखों लोगों की आजीविका प्रभावित होगी।
आंकड़े जो हालात बयां करते हैं
30,000+ रोजगार खत्म (संख्या बढ़ सकती है)
25,000 कर्मचारियों की सैलरी आधी
5,000+ उद्योग प्रभावित
20-30% कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि
लॉजिस्टिक लागत 5 गुना तक बढ़ी
60% कच्चा माल मिडिल ईस्ट पर निर्भर
10-15% फैक्ट्रियों ने शिफ्ट घटाई
पैरासिटामॉल 290 से बढ़कर 360 रुपए/किलो
ग्लिसरीन 64% तक महंगी
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