करंट का कहर: हर 8 घंटे में जा रही एक जान; लटकते तार और जर्जर खंभे बने मौत का जाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश में बिजली सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलने वाले आंकड़े सामने आए हैं। राज्य में बिजली हादसों के कारण हर दिन औसतन तीन लोगों की मौत हो रही है। यानी हर आठ घंटे में एक व्यक्ति करंट की चपेट में आकर अपनी जान गंवा रहा है। इसके बावजूद सड़कों, बाजारों और रिहायशी इलाकों में लटकते बिजली के तार और जर्जर खंभे लोगों के लिए लगातार खतरा बने हुए हैं।
बारिश के मौसम में खतरा और बढ़ा
बारिश के मौसम में यह खतरा और बढ़ जाता है। जलभराव वाले क्षेत्रों में खुले तार और क्षतिग्रस्त बिजली ढांचे कभी भी बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं। राजधानी भोपाल सहित प्रदेश के कई शहरों में मुख्य सड़कों, बाजारों और कॉलोनियों में बिजली के तारों का जाल साफ दिखाई देता है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से पर्याप्त सुधार नहीं किए जा रहे हैं।
चेतावनी भी बेअसर
मध्यप्रदेश विद्युत नियामक आयोग (एमपीईआरसी) ने बिजली सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताते हुए कंपनियों को कई बार निर्देश जारी किए हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर हालात में अपेक्षित सुधार नहीं दिखाई दे रहा है। आयोग की चेतावनियां कागजों तक सीमित नजर आ रही हैं।
रिपोर्ट में सामने आई चिंताजनक तस्वीर
एमपीईआरसी की वर्ष 2024-25 की रिपोर्ट के अनुसार प्रदेश में एक साल के दौरान कुल 1,963 बिजली दुर्घटनाएं दर्ज की गईं। इन हादसों में 1,102 लोगों की मौत हुई, जबकि 329 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।
आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में प्रतिदिन औसतन तीन लोगों की जान बिजली हादसों में जा रही है। यह स्थिति बिजली सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
बेजुबान जानवर भी हो रहे शिकार
बिजली विभाग की लापरवाही का असर सिर्फ इंसानों तक सीमित नहीं है। रिपोर्ट के अनुसार बीते एक वर्ष में 1,492 पशुओं की मौत भी करंट लगने और अन्य बिजली दुर्घटनाओं के कारण हुई है। खुले तार, टूटे खंभे और असुरक्षित विद्युत ढांचा पशुओं के लिए भी जानलेवा साबित हो रहे हैं।
लापरवाही पर होगी कार्रवाई
एमपीईआरसी ने साफ किया है कि यदि बिजली कंपनियां सुरक्षा मानकों और आयोग के निर्देशों का पालन नहीं करती हैं तो बिजली अधिनियम-2003 के तहत संबंधित कंपनियों और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
बिजली सुरक्षा को लेकर लगातार सामने आ रहे ये आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में हादसों का यह सिलसिला और गंभीर रूप ले सकता है।
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