नहीं थमेगा सियासी चक्रव्यूह का खेल: फिर होंगे मुख्यमंत्री पर ऐसे बड़े राजनीतिक हमले
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव हाल ही में हुए सियासी हमले से उबर भी नहीं पाए िक एक और हमला बोल दिया गया है। सरकार के नाम एक चिट्ठी सीधे ड्रोन से निशाने पर दाग दी गई। इससे फिर मप्र भाजपा की राजनीति में भूचाल जैसी स्थिति बन गई है। भूमि विवाद ठंडा भी नहीं हुआ था कि मुख्यमंत्री को फिर कठघरे में खड़ा कर दिया गया है। सवाल उनके ही अपने वरिष्ठ और ताकतवर मंत्री ने उठाए हैं।
राजनीति पर निगाह रखने वाले और कुछ वरिष्ठ नेता भी कह रहे हैं मुख्यमंत्री की राह आसान नहीं है। उनके सामने कोई बड़ा संकट भी खड़ा हो सकता है, जैसा हाल ही में हुआ और सरकार असहज हो गई। हो सकता है भविष्य में ऐसी किसी स्थिति से निपटना आसान न हो।
मुख्यमंत्री को पार्टी में ही भितरघात का सामना करना पड़ रहा है। कांग्रेस तो है ही हमलावर। जानकार यह भी बताते हैं भूमि विवाद हमला राजनीतिक ड्रोन से इतना सटीक निशाना साधते हुए किया गया कि कुछ समय के लिए सरकार सवालों के घेरे में आ गई।
इस चक्रव्यूह की सफलता से भितरघातियों के हौसले बुलंद बताए जाते हैं। ऐसी स्थिति में विश्लेषक कहते है आगे की संभावनाओं पर विचार करें तो मुख्यमंत्री के लिए चुनौतियां बनी रहेंगी।
उनके अपने संगठन और मंत्री अपने लाड़ले मुख्यमंत्री को कठघरे में खड़ा करने का कोई भी मौका नहीं छोड़ेंगे या फिर ऐसे अवसर पैदा करने के ऑपरेशन भी हो सकते हैं जिनसे मुख्यमंत्री की मुश्किलें इस बार की अपेक्षा और ज्यादा बढ़ जाए।
यह बाजारवाद के युग की भाजपा है इसलिए कुछ भी हो सकता है। हालात ऐसे भी हो सकते हैं कि संभाले ना संभल पाएं?
हाईकमान का साथ
2023 में सीएम पद की दौड़ में पीछे रह गए कई वरिष्ठ नेता अब भी सक्रिय राजनीति और मंत्रिमंडल में हैं। आगामी फेरबदल में वरिष्ठता को लेकर असहजता की जो चर्चा सामने आ रही हैं, वे संकेत हैं आंतरिक समीकरण पूरी तरह शांत नहीं हुए हैं।
कुछ को अपने महत्वपूर्ण विभाग हाथ से चले जाने की चिंता भी है वही जिनके पास भारी-भरकम विभाग तो हैं लेकिन उनके हाथ ठाकुर की तरह बांध दिए गए हैं, इसलिए छटपटाहट बनी हुई है।
अब तक हर विवाद में हाईकमान ने मुख्यमंत्री के पक्ष में सार्वजनिक बयान दिए हैं, जिसे पिछड़ा वर्ग प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरण साधने की रणनीति से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
जब तक यह समर्थन बना रहता है, राजनीतिक हमलों का असर सीमित रहने की संभावना ज्यादा है। विपक्ष की सक्रियता भी कम नहीं होगी। कांग्रेस के पास साहसी और ऊर्जावान नेतृत्व है, इसलिए कोई भी मौका नहीं छोड़ रही है।
उसके हमले अक्सर सरकार को बेचैन करने वाले होते हैं। कांग्रेस नेताओं ने साफ किया है मुख्यमंत्री के भूमि घोटाले के मामले को आगे बढ़ाएगी इसलिए विपक्षी हमलों की पुनरावृत्ति की आशंका बनी रहेगी, भले ही उनका राजनीतिक असर सीमित हो।
कांग्रेस को दूसरा फायदा भाजपा की अंदरूनी और सत्ता संघर्ष से भी मिल सकता है। अपनी ही पार्टी और विपक्ष दोनों में डॉ. मोहन यादव और उनकी जमीन को लेकर यह विवाद कोई पहली बार नहीं सामने आया है। पहले भी अक्सर इस तरह के आरोप-प्रत्यारोप लगते रहे। पिछले सिंहस्थ मे भी ऐसा कुछ हुआ था।
कांग्रेस का इशारा किस ओर?
ताजा भूमि खरीद विवाद के दौरान भी कुछ हलकों में अपुष्ट कयास लगाए गए कि मीडिया रिपोर्ट को दस्तावेज या जानकारी देने वालों में प्रच्छन्न रूप से मुख्यमंत्री से नाराज चल रहे उनके मंत्री और नेताओं का कोई समूह है। एक विधायक को आगे कर हमला बोला गया।
कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने भी सार्वजनिक तौर पर बगैर नाम लिए इशारा किया प्रदेश से केंद्र में गए मंत्री ने ही यह मामला ‘प्लांट' किया होगा। ऐसे बयानों को सिरे से खारिज किया गया है। जो भी हो, मोहन अपने नाराज नेताओं का मन मोह क्यों नहीं पा रहे है?
सत्ता के भीतर लगातार संघर्ष के हालात दिन पर दिन गंभीर क्यों होते जाते हैं? क्या नेतृत्व योग्य नहीं है? बाहरी तौर पर इस तरह के कयास नॉरेटिव के रूप में सेट कर दिए गए हैं लेकिन वास्तविकता कहीं और खोजी जाना चाहिए।
इसकी जद में करीब ढाई वर्ष पहले दिसंबर 2023 का वह अप्रत्याशित घटनाक्रम बताया जाता है जिसमें डॉ. मोहन यादव को अचानक मुख्यमंत्री के रूप में सत्ता सौंप दी गई। भाजपा के करीब आधा दर्जन वरिष्ठ नेताओं को यह घटनाक्रम ऐसे गहरे घाव दे गया, जो उनके इस जन्म में तो नहीं भरेगा क्योंकि सब सत्ता के प्रबल दावेदार थे। बताते हैं तब से अब तक सरकार और संगठनात्मक असंतुलन बरकरार है।
नया नहीं भूमि विवाद
गौर करने वाली बात है भूमि से जुड़ा विवाद डॉ. मोहन यादव के लिए नया नहीं है। जब वे शिवराज कैबिनेट में उच्च शिक्षा मंत्री थे, तब उज्जैन में सिंहस्थ के लिए आरक्षित करीब 50 हेक्टेयर भूमि के आवासीय उपयोग में बदलाव को लेकर विवादों में घिरे थे।
तत्कालीन मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के हस्तक्षेप पर जमीन वापस कृषि भूमि की श्रेणी में डाली गई थी। उस दौर में इस फैसले का सबसे मुखर विरोध भाजपा के ही उज्जैन उत्तर से विधायक पारस जैन ने किया था, जो शिवराज कैबिनेट में कद्दावर मंत्री थे।
उज्जैन के तत्कालीन सांसद चिंतामणि मालवीय से भी डॉ. मोहन यादव की तनातनी की खबरें उस दौर में सामने आती रही थीं। कुछ महीना पहले, जैसा कहा गया था, मालवीय ने मजबूरी वश एक प्रेस कांफ्रेंस से सरकार को घेरने की कोशिश की थी।
कैबिनेट के ही एक वरिष्ठ मंत्री ने मालवीय को हाईकमान से मिलवाया था और बाकायदा इसके फोटो भी जारी किए गए थे। उस समय अटकलें लगाई गई थी कि इसके माध्यम से मुख्यमंत्री को सीधा लेकिन कठोर संदेश देने की कोशिश की गई। बताते हैं सारा झगड़ा सरकार में प्रभुत्व को लेकर है।
संबंधित समाचार

पूर्व मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान:कहा-अब राजनीति नहीं; धर्म की रक्षा करेंगे, दशहरे पर निकालेंगे अयोध्या यात्रा

भाजपा मंडल अध्यक्ष के जन्मदिन पर उड़ाई नियमों की धज्जियां:प्रतिबंध के बावजूद बुलेट से पटाखे फोड़कर मनाया जश्न; रहवासी होते रहे परेशान

बर्फानी बाबा का आकार घटकर एक फुट:परंतु आस्था में नहीं आई कोई कमी

काॅलेज परिसर में स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा का अनावरण:मंत्री ने बताया भारतीय ज्ञान परंपरा का वाहक ; आध्यात्मिक एवं वैज्ञानिक प्रगति में अहम योगदान

लोकायुक्त की बड़ी कार्रवाई:अधिकारी रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार; इस एवज में मांगी थी घूस

पवित्र धाम, अपवित्र काम:चढ़ावा चोरी; चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर

कलेक्टर जनसुनवाई में जरूरतमंदों को मिली राहत:प्रशासन बना आमजन का सहारा; दिव्यांग बालिका की शिक्षा की हुई राह आसान

सीमांकन के बाद भी नहीं बन पाई बाउंड्री:सरकारी बगीचा बना अवैध पार्किंग

वीडियो देखिये, हॉस्पिटल रोड पर जलभराव से बढ़ी परेशानी:मरीजों और राहगीरों को हो रही भारी दिक्कत, हादसे की आशंका

सरकार ने फिर लिया इतने हजार करोड़ का कर्ज:कुल देनदारी इतने लाख करोड़ के करीब पहुंची

सराफा में सरकारी सुविधाघर तोड़ने का आरोप:विरोध करने पर दुकानदारों को दी जान से मारने की धमकी

नगर निगम के नोटिस को हवा में उड़ा रहा पानी माफिया:3 दिन का अल्टिमेटम देकर भूला कॉरपोरेशन

दिग्गज क्रिकेटर का निधन:38 वर्ष की उम्र में ली अंतिम सांस; विश्व कप में खेली थी यादगार पारी

पिस्टल लहराकर दी गालियां:पुलिस को कहे अपशब्द; कुख्यात बदमाश पर बड़ी कार्रवाई

‘ऑनर’ के नाम पर बहन का कत्ल:एक बार फिर भाई बना जल्लाद; प्रेमी से मिलने की जिद पर दी मौत

वीडियो देखिये, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने क्या पूछा:आप कब से राम भक्त हो गए; इनकी पीड़ा राम मंदिर के चढ़ावे चोरी से संबंधित नहीं

सिंहस्थ क्षेत्र में फिर शुरू हुआ पक्का निर्माण कार्य:गृहमंत्री अमित शाह के फैसले की अनदेखी

सभी वर्गों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध, सीएम डॉ. मोहन यादव:डॉ. श्यामाप्रसाद मुखर्जी स्मार्ट औद्योगिक क्षेत्र सतगढ़ी का शिलान्यास

वीडियो देखिये, उत्कृष्ट पुलिसिंग पर 18 पुलिस अधिकारी-कर्मचारी सम्मानित:पुलिस कमिश्नर ने प्रशस्ति पत्र व नकद पुरस्कार देकर बढ़ाया हौसला

भक्तों ने ‘जय श्री महाकाल’ का उद्घोष कर ग्रहण की महाप्रसादी
टिप्पणियाँ
अभी कोई टिप्पणी नहीं है। पहली टिप्पणी करें!