150 किलोमीटर पैदल चल महाकाल के द्वार पहुंचे श्रद्धालु को मिला दर्द: बोले- शिखर दर्शन के दौरान सुरक्षाकर्मी ने दिया धक्का; वीआईपी व्यवस्था पर उठाए सवाल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, उज्जैन।
महेश्वर से मां नर्मदा का जल लेकर करीब 150 किमी पैदल यात्रा पूरी कर बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे इंदौर निवासी श्रद्धालु नीरज याग्निक ने मंदिर की सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
याग्निक का कहना है उन्होंने महेश्वर से बेहद कम समय में पैदल यात्रा पूरी की, लेकिन महाकाल मंदिर पहुंचने के बाद दर्शन का संयोग नहीं बन पाया। इसे लेकर कोई दुख नहीं हुआ, लेकिन मंदिर के बाहर शिखर दर्शन के दौरान निजी सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा धक्का देकर हटाए जाने से आहत है।
150 किमी की यात्रा में बाबा साथ थे... नीरज ने बताया महेश्वर से मां नर्मदा का जल लेकर करीब 150 किमी पैदल यात्रा एक दिन और कुछ घंटों में पूरी की और बाबा महाकाल के दरबार पहुंचे। दर्शन का अवसर नहीं मिला, लेकिन इसका उन्हें जरा भी दुख नहीं है। इतनी लंबी और कठिन यात्रा पूरी होने के पीछे बाबा महाकाल का ही आशीर्वाद था।
याग्निक ने मंदिर में रसूख, चिट्ठी, टोकन और अलग-अलग लाइनों से होने वाले दर्शन की व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। कहा धर्मस्थल पर भक्तों को पैसे, टिकट या प्रभाव के आधार पर अलग-अलग लाइनों और गेटों में बांटने की व्यवस्था पर जवाबदेही तय होनी चाहिए।
सोशल मीडिया पर साझा की पीड़ा .. नीरज याग्निक ने अपनी पीड़ा सोशल मीडिया (फेसबुक) पर भी साझा की है, जिस पर लोग तीखी प्रतिक्रिया दे रहे हैं।
मंदिर धर्म का, सेवा पुजारी की और आस्था भक्तों की
श्रद्धालु याग्निक का कहना है जब मंदिर धर्म का है, सेवा पुजारियों की है और आस्था भक्तों की है तो व्यवस्था में निजी एजेंसियों की भूमिका और अधिकारों की सीमा क्या है। उन्होंने निजी सुरक्षा एजेंसियों और बैरिकेडिंग व्यवस्था को लेकर भी नाराजगी जाहिर कर सवाल किया श्रद्धालुओं के साथ होने वाले व्यवहार की जिम्मेदारी किसकी है। सुविधाओं या विशेष व्यवस्था के सहारे नहीं, बल्कि कांवड़ लेकर लंबी पैदल यात्रा पूरी कर अपने आराध्य के द्वार पहुंचे थे। लेकिन बाबा महाकाल के द्वार पर कथित रूप से अपमानित किए जाने की घटना ने आहत किया।
परिजन कर रहे थे सम्मान तब दिया धक्का
श्रद्धालु नीरज के मुताबिक दर्शन नहीं होने के बाद मंदिर प्रांगण के बाहर से बाबा महाकाल के शिखर दर्शन कर रहे थे। इसी दौरान परिजन लंबी पैदल यात्रा पूरी करने पर हार पहनाकर सम्मानित कर रहे थे। इसी दौरान मंदिर की निजी सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी ने धक्का देकर हटा दिया। वीआईपी दर्शन व्यवस्था पर उठाए सवाल
भक्तों का अक्रोश
शहर से भी कावड़ यात्रा आ रही है अब ये देखना होगा की प्रशासन ऐसे ही व्यवहार करता है या वीआईपी प्रोटोकॉल देता है? - कुणाल वर्मा
जो वस्तु स्थिति से गुज़रता है उसे यह यकीन हो जाता है की आपने जो सिक्युरिटी गार्ड रखे हंै वो व्यवस्था संभालने के लिए रखे हंै ना की बिगाड़ने के लिए। सब लोग समान हैं।- नितिन गोयल
आपकी अभूतपूर्व धार्मिक यात्रा को दिल से सलाम भैया, लेकिन प्रश्न यही उठता है की क्या जितने भी हमारे नामी ग्रामी मंदिर, देव स्थल हैं वहां की व्यवस्था सुधारनी चाहिए कि नहीं, आने वाले श्रद्धालु धर्मालुओं को सम्मान मिलना चाहिए कि नहीं। वर्तमान में इतनी बुरी स्थिति है छूना तो दूर दर्शन करने के पूर्व, जैसा कि आपने कहा तथाकथित ठेकेदार के लोग धक्का मार के मंदिर के सामने से हटा देते हैं जो की बहुत ही चिंतनीय है इनका यह बरताव वापस एक बार हिंदुओं को मंदिर से दूर कर देगा इसके ऊपर बहुत गंभीर विचार होना चाहिए - सुशील अरोरा
भाई साहब आप अभी यह तक सीमित नहीं है नाग पंचमी पर साल में एक बार खुलने वाले नागचन्द्रेश्वर मंदिर पर गजब की नेता गिरी होती है इंदौर-उज्जैन के बड़े दिग्गज नेता पहले दर्शन का लाभ लेते हैं बाद में जनता जनार्दन के लिए द्वार खोले जाते हैं।- अभिषेक सिंह सोनगरा
पुराना ढर्रा चला आ रहा है. सब प्रदेश के टटपूजिये नेताओ की देन है. पर अब अति शीघ्र बदलाव की सख्त आवश्यता है। - प्रणय मिश्रा मोंटो
भाई साहब यह आप की सादगी है इतनी काबिलियत होने के बाद भी इतना शांत स्वभाव और इतनी पहचान होने के वाबजूद आप चाहते तो पूरा वीआईपी प्रोटोकोल रहता, लेकिन आप का यह स्वभाव हर कोई नही समझ सकता! - निलेश पाल
सोजा मोहन प्यारे, कम से अन्य ज्योतिर्लिंग जैसा ही कावड़ियों के लिए कुछ अलग व्यवस्था की जाए। व्यक्ति अपनी अंतिम शक्ति का जोर लगाकर बाबा की चौखट तक पहुंचता है। - अभिषेक सिंह राठौर
भैया आप जैसे आस्थावान व्यक्ति के साथ ये व्यवहार बड़ा ही दुःखद है ये आज कल हर धार्मिक स्थानों पर हो रहा है ये ठेकेदार धक्का-मुक्की ऐसे करते है जैसे हम कोई दूसरे धर्म के लोग है या कोई आतंकवादी ऐसा हर श्रद्धालुओं के साथ होता है इनका एक ही इलाज है ये ठेकेदारों की संख्या श्रद्धालुओं की संख्या से मात्र चंद प्रतिशत रहती है। मंदिर प्रांगण में अगर सभी एकता के साथ इनका सार्वजनिक उतारा एक दो बार उतार दंे तो शायद ये थोड़े सुधर जाएंगे और श्रद्धालुओं का शायद सम्मान भी करने लगेंगे। - रवि पांचाल
पिछले दिनों उज्जैन में काल भैरव के दर्शन का अवसर मिला।मगर यहां के हालत महाकाल से भी बहुत गए गुजरे हैं। दर्शनार्थियों के लिए जो बेरीकेडिंग की है, उसकी हालत यह है कि भक्त को उल्टियां हो जाए। इस बेरिकेडिंग में लगता है महिनों से साफ सफाई नहीं हुई हो। कीचड़ और वहां बंधें धागों से बड़ी हुई दुर्गंध से भक्त की हालत खराब हो जाती है। महाकाल इन व्यवस्थाओं को देखते वालों को कुछ सद्बुद्धि दे। - ईश्वर सिंह चौहान
जय श्री महाकाल, कावड़ यात्रा का सुनकर बड़ी प्रसन्नता हुई और मंदिर परिसर के ठेकेदारों की आपके द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार व्यथा सुनकर बड़ा दुख हुआ, बाबा महाकाल की नजर सब पर है। - अजय पाण्डेय
सभी मंदिरों का यही हाल है, भस्मारती के लिए एक महीने पहले ऑनलाइन बुकिंग शुरू होती है जो बुकिंग शुरू होने के पहले ही फुल हों जाती है, है न जादू, और फिर पैसा दो और आरती करो या फिर आप रसूखदार हो । अब आम आदमी का भस्मारती मै शामिल होना असंभव सा है। वह दिन दूर नहीं जब सिर्फ शिखर दर्शन ही होंगे। - विनोद दूसने
आदरणीय बड़े भाई साहब स्वस्थ शरीर के लिए एवं स्वस्थ जीवन के लिए आपका उद्देश्य सनातन धर्म को सर्वोपरि मानते हुए सबको समान रूप से मज़बूत बनाना है कुछ समस्याए भी आएंगी उनको छोड़कर आप अपने धर्म एवं राष्ट्र के प्रति समर्पण को हमेशा तत्पर रहेंगे यही ईश्वर से प्रार्थना है। - चंद्रशेखर मालवीय
इन धर्मद्रोहियों ने वीआईपी चार्ज और लाइन लगाकर धार्मिक स्थलों को कलंकित ही किया है। प्रभु के दर्शन में क्या राजा और क्या रंक? जब देवाधिदेव महादेव अपने भक्तों में कोई फर्क नहीं करते तो भगवान के दरबार में ये छद्म धर्मधुरंधर क्यों अपनी उगाही चलाते हैं। कोई भी भक्त अपने इष्ट के दर्शन के लिए किसी भी प्रकार का टैक्स क्यों दे भला? ये तो भक्त की आस्था और प्रभुकृपा को सिक्कों में तोलने जैसा है। अरे धूर्तों जितना आप वीआईपी लाइन का सालभर का टैक्स लेते हो बता दो और अपना क्यूआर कोड दे दो। बाबा के अनन्य भक्त उसकी भरपाई ऑनलाइन ही कर देंगे और आपको इसके लिए अलग से कोई वसूली नहीं करनी होगी। - शरद पवार
आपकी यात्रा मंगलमय रही और महादेव सरकार ने शिखर दर्शन देकर आपके शिखर तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया। व्यवस्था की कमी के बावजूद आपकी भक्ति और आस्था ने लोगों के दिलों में जगह बना ली है। आप सच में बधाई के पात्र हैं और लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बने हैं। महादेव आपको और शक्ति दें और आपकी भक्ति को और मजबूत बनाए रखें। - आशुतोष शुक्ला
दादा साउथ की यात्रा पर हैं हम, यहाँ मंदिरो की व्यवस्था देखने और सीखने लयक है। जनता भी और व्यस्थापक और व्यवस्था सब स्वतः व्यवस्थित हो जाता है जब भाव व्यवस्थित और प्रभु समर्पित हों, अन्यथा अब तो भक्त और व्यस्थापक भगवान को भी अपनी बपौती समझने लगे हैं। हमारे लिए तो हमारी देवी हमारी मां प्रकृति और हमारे पिता हमारे भगवान हमारे गुरु भोलेनाथ पहाड़ों में सदैव विराजते हैं। - जगत कुमार
मंदिरों में गार्ड क्यों लगाए जाते हैं ? भक्तों को सुरक्षा व्यवस्था देने के लिए ना की भक्तों को मारने के लिए, तिरस्कार करने के लिए या भगाने के लिए, बेइज्जती करने के लिए, गार्ड को उनकी ड्यूटी समझाना बहुत जरूरी हो गया है - रजनी प्रणव जायसवाल
मंदिर सिर्फ और सिर्फ वीआईपी कल्चर को बेच दिया गया है। हजारों किलोमीटर से दर्शन करने आये आम श्रद्धालू हर रोज इस घनघोर और दुर्भाज्ञापूर्ण भेदभाव से गुज़रते हैं। ये धर्म के स्वम्भू ठेकेदारों की करनी है जिसका खामियाज़ा आम जनता भुगत रही है। - यशवर्धन सिंह
राजनीति नेतानगरी केवल इनका प्रभुत्व रह गया है महाकाल के दरबार में... आम आदमी को दूर से धकेल दिया जाता है ठीक से दर्शन भी नहीं हो पाते वही दूसरी तरफ नंदी के पास वीआईपी लोग आराम से बैठ कर दर्शन कर लेते है धर्मस्थलों पर होनेवाले वीआईपी कल्चर को खत्म करना जरुरी है आप जैसी शख्सियत को रोकना समझ से परे है आप भी अगर किसी नेता की भव्य कावड़ यात्रा या कावड़ इवेंट का हिस्सा होते तो आप को भी महाकाल बाबा के दर्शन आसानी से हो जाते.... सफल कावड़ यात्रा की हार्दिक बधाई सुबह मिलते है। - शैलेंद्र सिंह सोलंकी
हमारे सभी धर्मिक स्थलों पर यही हाल है हर जगह धर्म के ठेकेदार मौजूद हैं। ये इतने ताकतवर हैं कि कोई इनके खिलाफ नहीं जा सकता है। प्रशासन और ये सब मिले हुए हैं। यही महाकाल में ताकतवर लोग गर्भ गृह में जाकर पूजा करते हैं उस समय वहां के सीसीटीवी तक बंद हो जाते हैं, क्या यही सनातन की परिभाषा है। - सुनील तिवारी
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