नशे ने कर दिया बर्बाद इंफ्लुएंसर का कॅरियर: ब्रेन हेमरेज ने ली जान; अर्श से फर्श तक की दुखद कहानी
KHULASA FIRST
संवाददाता

25 लाख से घटकर 2.1 मिलियन फॉलोअर्स बचे तो चला गया था तनाव में
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कहते हैं ना कामयाबी हर किसी को रास नहीं आती और वह जिंदगी के उस महत्वपूर्ण मुकाम पर ऐसी गलती कर बैठता है, जो कि उसे गर्त में ले जाने का रास्ता बन जाती है। ऐसा ही शहर के एक इंफ्लुएंसर नमन मीणा के साथ हुआ।
उसे कम समय में ऐसी कामयाबी मिली कि वह फर्श से अर्श पर जा पहुंचा, लेकिन जीवन के इस महत्वपूर्ण पायदान पर वह नशा करने लगा। लत ऐसी लगी कि इससे दूर करने के लिए परिजन को उसे रिहेब सेंटर भेजना पड़ा
वहां से जीतकर तो वह लौट आया, लेकिन इस दौरान उसके सोशल मीडिया फॉलोअर 25 लाख से घटकर 2.1 मिलियन हो गए। उसकी इनकम भी गिर गई। आखिरकार वह अपने बीते दौर और बदलती जिंदगी के बीच इतना उलझ गया कि उसे ब्रेन हेमरेज हो गया।
अस्पताल में कुछ दिनों चले इलाज के बाद वह जिंदगी की जंग हार गया। कहीं न कहीं नमन मीणा की कहानी समाज के उस युवा वर्ग के लिए सबक हो सकती है, जो कि आज अपने जीवन में ऊंचाइयों को छू रहे हैं।
यहां बात हो रही है 15 जून 2000 को जन्मे इंदौर की श्रीराम कृष्णबाग कॉलोनी (वेलोसिटी टॉकिज के पीछे) के रहने वाले नंदी मीणा के बेटे नमन मीणा की। चार भाई-बहनों में लक्की, सन्नी और सबसे छोटी बहन तानिया में नमन तीसरे नंबर का बेटा और परिवार का सबसे लाड़ला था।
भाई लक्की और सन्नी मीणा के अनुसार नमन को बचपन से ब्रेन से जुड़ी परेशानी और सिरदर्द की शिकायत थी। नमन ने लॉकडाउन के दौरान सोशल मीडिया के क्षेत्र में कदम रखा और फिल्मी गानों और भजनों पर वीडियो बनाने लगा।
कम समय में उसने अपनी प्रतिभा का ऐसा लोहा मनवाया कि धीरे-धीरे उसके फॉलोअर्स की संख्या बढ़ने लगी। नमन मीणा सोशल मीडिया पर लाखों लोगों की धड़कन बन गया और उसके 2.5 मिलियन फॉलोअर्स हो गए।
नमन की कहानी पीछे छोड़ गई एक सवाल
सोशल मीडिया पर लाखों लोगों के बीच पहचान बनाने वाला इंसान अपने एक गलत फैसले (नशा का आदी होने से) से अपने मुश्किल वक्त में कितना अकेला हो सकता है। फॉलोअर्स, लाइक और लोकप्रियता जिंदगी का हिस्सा हो सकते हैं, लेकिन जिंदगी की कीमत उनसे कहीं ज्यादा है।
नमन चला गया, मगर उसकी कहानी यह संदेश छोड़ गई कि किसी के चेहरे की मुस्कान और सोशल मीडिया की चमक देखकर उसके भीतर का दर्द नहीं जाना जा सकता। मुश्किल वक्त में किसी अपने का हाथ, बातचीत और साथ शायद किसी टूटते इंसान को संभालने की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है।
दोस्तों से कहता था क्या था क्या हो गया
लोगों के लिए यह सिर्फ आंकड़ा था, लेकिन नमन के लिए जैसे उसकी पहचान और मेहनत उससे दूर होती जा रही थी। इनकम बहुत घट गई। जीवन से फेम भी चला गया। नमन दोस्तों से अपने मन की बात कहते हुए पूछता था मेरा जीवन क्या था...नशे की लत के चलते आज क्या हो गया।
उसकी बातें बताती थीं कि वह अपने बीते दौर और बदलती जिंदगी के बीच कितना उलझ गया था। नतीजा ये हुआ कि वह तनाव में चला गया और 9 सितंबर को हालत बिगड़ने पर परिवार ने उसे इंदौर के अस्पताल में भर्ती कराया। बाद में देवास के अस्पताल में इलाज चला।
देशभर के थे फॉलोअर्स
भाई सन्नी ने बताया कि नमन के चाहने वाले फॉलोअर केवल इंदौर या मध्यप्रदेश तक सीमित नहीं थे। महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा और छत्तीसगढ़ तक से लोग उससे जुड़े थे। फॉलोअर तो ठीक इंफ्लुएंसर तक उससे मिलने आते थे।
बस इसी बीच नमन के कदम गलत दिशा में बढ़ गया। वह नशा करने लगा और नशे के दलदल में इतना डूबता चला गया कि वह तनाव में रहने लगा। परिवार ने उसे संभालने में कोई कसर नहीं छोड़ी। उसे रिहेब सेंटर भेजा गया।
करीब दो महीने वह नशे से दूर रहा और पूरी तरह स्वस्थ होकर लौटा। उसने खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से स्वस्थ करने के लिए जिम जॉइन कर ली, लेकिन उसके भीतर का तनाव खत्म नहीं हुआ।
जिस प्लेटफॉर्म ने उसे पहचान दी, वहीं आया डाउनफॉल उसके लिए सबसे बड़ा दर्द बन गया। वह मुश्किल दौर में पहुंचा तो फॉलोअर्स की संख्या घटकर 2.1 मिलियन रह गई।
अंतिम यात्रा में उमड़े चाहने वाले
19 सितंबर तक परिवार उसे बचाने की हर कोशिश करता रहा, लेकिन ब्रेन हेमरेज के चलते नमन ने दुनिया को अलविदा कह दिया। शनिवार सुबह मौत की खबर फैलते ही दोस्त, भाई और चाहने वाले उसके घर पहुंचने लगे।
हर कोई एक-दूसरे से बस यही पूछ रहा था कि आखिर नमन के साथ हुआ क्या। जिस युवक को देखने के लिए कभी लोगों की भीड़ जुटती थी, उसकी अंतिम यात्रा में भी भारी संख्या मे उसके चाहने वाले उमड़ पड़े । वेलोसिटी टॉकीज से खजराना मुक्तिधाम तक पैदल निकली शवयात्रा में नमन को अंतिम विदाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
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