गोरा होने की चाहत पड़ सकती है भारी: पाकिस्तानी क्रीम से खराब हो रही किडनी; महाराष्ट्र में प्रतिबंधित, MP में धड़ल्ले से बिक रही
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
त्योहारों का मौसम आते ही बाजारों में सजने-संवरने और खूबसूरत दिखने के लिए कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स की खरीदारी बढ़ जाती है।
खासकर चेहरे का रंग निखारने का दावा करने वाली क्रीमों की मांग काफी रहती है।
गोरा होने की चाहत पड़ सकती है भारी
लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि जिस क्रीम को आप खूबसूरत दिखने के लिए इस्तेमाल कर रही हैं, वही आपकी सेहत के लिए जानलेवा साबित हो सकती है?
पाकिस्तान में बनी 'गोरी ब्यूटी क्रीम' को लेकर सामने आई जानकारी ने इसी खतरे की ओर ध्यान खींचा है।
18 महिलाओं में मिली किडनी से जुड़ी बीमारी
महाराष्ट्र के नागपुर में इस क्रीम का इस्तेमाल करने वाली करीब 18 महिलाओं में किडनी से जुड़ी गंभीर बीमारी सामने आने की बात कही गई है।
जांच के दौरान क्रीम में 5700 PPM तक पारा (Mercury) पाया गया।
कई हजार गुना अधिक पारा मौजूद
जबकि कॉस्मेटिक्स में इसकी अधिकतम स्वीकार्य सीमा 1 PPM बताई गई है। यानी क्रीम में तय सीमा से कई हजार गुना अधिक पारा मौजूद था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र FDA ने इस क्रीम पर कार्रवाई की।
इसके बावजूद मध्य प्रदेश के कुछ बाजारों और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर इसकी बिक्री की खबरें सामने आई हैं।
भोपाल में भी पहुंची खतरनाक क्रीम, दुकानदारों का अलग तरीका
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भोपाल के बुधवारा इलाके में भी गोरी ब्यूटी क्रीम बेचे जाने की जानकारी मिली है।
हैरानी की बात यह है कि कुछ दुकानदार इसे अपनी दुकान में रखने से बच रहे हैं, लेकिन ग्राहक की मांग पर कुछ ही मिनटों में उपलब्ध कराने का दावा कर रहे हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुकानदार इस क्रीम की कीमत 400 से 500 रुपये तक बता रहे हैं।
कुछ जगहों पर इसे खुले तौर पर बेचने के बजाय ऑर्डर मिलने पर मंगवाया जाता है। इसके पैकेट पर 'Made in Pakistan' लिखा हुआ है।
आखिर क्रीम में पारा मिलाने की जरूरत क्यों पड़ती है?
त्वचा को गोरा दिखाने का दावा करने वाली कुछ क्रीमों में मर्करी यानी पारे का इस्तेमाल किया जाता है।
दरअसल, पारा त्वचा में मेलेनिन बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है।
मेलेनिन वह प्राकृतिक पिगमेंट है, जो हमारी त्वचा को रंग देता है और सूर्य की पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा प्रदान करने में भी अहम भूमिका निभाता है।
जब मेलेनिन का उत्पादन प्रभावित होता है, तो त्वचा का रंग हल्का दिखाई देने लगता है।
इसी प्रभाव का फायदा उठाकर कुछ निर्माता त्वचा को जल्दी गोरा दिखाने के लिए क्रीम में पारे का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन इसका दूसरा पहलू बेहद खतरनाक है।
त्वचा पर लगातार ऐसी क्रीम लगाने से पारा शरीर में प्रवेश कर सकता है और धीरे-धीरे किडनी सहित दूसरे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकता है।
20 साल की युवतियों तक पहुंचा किडनी की बीमारी का खतरा
नागपुर के विशेषज्ञ डॉक्टरों के सामने वर्ष 2023-24 से ऐसे मरीज आने लगे थे, जिनमें मेम्ब्रेनस नेफ्रोपैथी नामक किडनी की बीमारी के लक्षण मिले।
करीब 18 महिलाओं में इस बीमारी की पहचान हुई। इनमें अधिकतर युवतियों की उम्र लगभग 20 साल थी।
मरीजों में चेहरे और शरीर के दूसरे हिस्सों में सूजन, पैरों में भारीपन और पेशाब में झाग बनने जैसी समस्याएं देखी गईं।
जांच के दौरान इन महिलाओं के नियमित रूप से फेयरनेस क्रीम इस्तेमाल करने की जानकारी भी सामने आई।
पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के प्रोफेसर डॉ. अनिमेश सक्सेना के मुताबिक, त्वचा पर लगाई जाने वाली ऐसी क्रीम के हानिकारक तत्व शरीर के भीतर पहुंच सकते हैं।
मर्करी का संपर्क किडनी और लिवर जैसे महत्वपूर्ण अंगों को प्रभावित कर सकता है।
IIT हैदराबाद की रिसर्च में भी सामने आया था खतरनाक सच
फेयरनेस क्रीम में भारी धातुओं की मौजूदगी का मामला नया नहीं है। वर्ष 2021 में IIT हैदराबाद के वैज्ञानिकों ने भारत में बिकने वाली कई फेयरनेस क्रीमों की जांच की थी।
इस अध्ययन में भारत में निर्मित 34 क्रीमों में पारे का स्तर अपेक्षाकृत कम पाया गया, जबकि आयातित 14 क्रीमों में मर्करी की औसत मात्रा 9.24 मिलियन माइक्रोग्राम प्रति किलोग्राम तक दर्ज की गई।
यह निष्कर्ष बताता है कि बिना उचित गुणवत्ता जांच और नियामकीय निगरानी के बाजार में पहुंचने वाले स्किन केयर प्रोडक्ट्स उपभोक्ताओं के लिए गंभीर स्वास्थ्य जोखिम पैदा कर सकते हैं।
पाकिस्तान से आयात पर रोक, फिर भारत कैसे पहुंच रही हैं ये क्रीम?
भारत सरकार ने 2 मई 2025 को पाकिस्तान से आने वाले सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाया था।
इसके बावजूद सितंबर 2026 में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) को 'गोरी ब्यूटी क्रीम' और 'चांदनी व्हाइटनिंग क्रीम' को लेकर सार्वजनिक स्वास्थ्य चेतावनी जारी करनी पड़ी।
CDSCO के अनुसार, इन क्रीमों के पास भारत में बिक्री के लिए आवश्यक वैध इंपोर्ट रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट नहीं है।
साथ ही इनमें भारी धातुओं की मात्रा निर्धारित सुरक्षित सीमा से अधिक पाई गई।
सरकार ने उपभोक्ताओं को इन उत्पादों की खरीद और इस्तेमाल से बचने तथा दुकानदारों को इनकी बिक्री और विज्ञापन बंद करने की सलाह दी है।
ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब पाकिस्तान से आयात पर प्रतिबंध है, तो ये उत्पाद भारतीय बाजारों तक कैसे पहुंच रहे हैं?
क्या इनकी सप्लाई किसी दूसरे रास्ते से हो रही है? इस पर निगरानी और जांच बेहद जरूरी है।
ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइटों पर भी मिल रही क्रीम
इस विवादित क्रीम की उपलब्धता केवल स्थानीय दुकानों तक सीमित नहीं बताई जा रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स में IMPEXBEAUTY, KartWalk और Healthmug जैसी वेबसाइटों पर भी इसकी लिस्टिंग का जिक्र किया गया है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, ऑनलाइन इसकी कीमत 600 से 700 रुपये तक बताई गई है, जबकि भोपाल के कुछ बाजारों में यह 300 से 400 रुपये के आसपास बेची जा रही है।
खूबसूरती से ज्यादा जरूरी है आपकी सेहत
चेहरे का रंग बदलने के लिए किसी भी अनजान क्रीम का इस्तेमाल करना जोखिम भरा हो सकता है।
खासकर उन उत्पादों से सावधान रहने की जरूरत है, जो कुछ ही दिनों में गोरा बनाने या दाग-धब्बे पूरी तरह मिटाने का दावा करते हैं।
कोई भी कॉस्मेटिक खरीदने से पहले उसके निर्माता, सामग्री, पैकेजिंग और वैध नियामकीय जानकारी की जांच करें।
यदि आप पहले से गोरी ब्यूटी क्रीम का इस्तेमाल कर रही हैं, तो इसे तुरंत बंद करें।
पारे के संपर्क की आशंका होने पर डॉक्टर से सलाह लें और जरूरत के अनुसार जांच करवाएं। याद रखें, खूबसूरती त्वचा के रंग से नहीं, बल्कि अच्छी सेहत से है।
कुछ दिनों में गोरा दिखने के लालच में अपनी किडनी और जिंदगी को खतरे में डालना समझदारी नहीं है।
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