इस वाहन के संचालन पर कोर्ट सख्त: केंद्र और राज्य सरकार से इतने हफ्ते में मांगा जवाब
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, जबलपुर।
मध्य प्रदेश में तेजी से बढ़ती ई-रिक्शा की संख्या और उससे बिगड़ रही यातायात व्यवस्था को लेकर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। अदालत ने चार सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश देते हुए केंद्र सरकार से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि ई-रिक्शा को परमिट से मिली छूट वापस लेने पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता।
जनहित याचिका पर हुई सुनवाई
यह मामला जबलपुर निवासी डॉ. पीजी नाजपांडे और रजत भार्गव द्वारा दायर जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान सामने आया। याचिका में कहा गया है कि प्रदेश में बड़ी संख्या में बैटरी चालित ई-रिक्शा बिना परमिट संचालित हो रहे हैं, जिससे शहरों में ट्रैफिक जाम, अव्यवस्था और सड़क दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बढ़ रहा है।
जबलपुर में 9 हजार से ज्यादा ई-रिक्शा
याचिकाकर्ताओं ने अदालत को बताया कि अकेले जबलपुर में ही 9 हजार से अधिक ई-रिक्शा संचालित हो रहे हैं। आरोप है कि कई स्थानों पर बिना वैध ड्राइविंग लाइसेंस और नाबालिग चालक भी ई-रिक्शा चला रहे हैं, जिससे आम लोगों की सुरक्षा पर खतरा बढ़ गया है।
2018 की छूट पर उठे सवाल
याचिका में उल्लेख किया गया कि भारत सरकार ने वर्ष 2018 में जारी अधिसूचना के तहत ई-रिक्शा और अन्य बैटरी चालित वाहनों को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 66 के अंतर्गत परमिट की अनिवार्यता से छूट दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि इस छूट का व्यापक दुरुपयोग हो रहा है और बिना पर्याप्त नियमन के बड़ी संख्या में वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं।
केंद्र सरकार से छूट की समीक्षा पर मांगा जवाब
याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने अदालत में कहा कि परमिट से छूट मिलने के बाद शहरों में ई-रिक्शा की संख्या अनियंत्रित रूप से बढ़ी है, जिससे यातायात व्यवस्था प्रभावित हो रही है। उन्होंने केंद्र सरकार से इस नीति की समीक्षा कर आवश्यक संशोधन करने की मांग की।
चार सप्ताह की अंतिम मोहलत
सुनवाई के दौरान भारत सरकार की ओर से असिस्टेंट सॉलिसिटर जनरल उपस्थित हुए और जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा। इस पर हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय देते हुए विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
अदालत ने केंद्र सरकार से यह भी बताने को कहा है कि ई-रिक्शा और बैटरी चालित वाहनों को दी गई परमिट छूट को वापस लेने या उसमें संशोधन करने पर विचार क्यों नहीं किया जा सकता। फिलहाल मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। सरकार के जवाब के बाद हाईकोर्ट इस मुद्दे पर आगे की सुनवाई करेगा।
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