लाखों डकार गया टोपीबाज: फर्जी बैंक अफसर बन कारोबारी को 2 करोड़ के कर्ज के जाल में फंसाया
KHULASA FIRST
संवाददाता

संजू बंजारिया 83051-16137 खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
टोपीबाज लोन एजेंट ने फर्जी बैंक अधिकारी बनकर एक कारोबारी को 2.05 करोड़ रुपए के लोन के जाल में फंसा दिया। स्टाम्प ड्यूटी, प्रॉपर्टी वैल्यूएशन और बैंक प्रक्रिया के नाम पर 30.75 लाख रुपए डकार गया।
जबकि उसके एक अन्य टोपीबाज साथी ने भी 75 लाख रुपए से अधिक की राशि अपने खाते में ट्रांसफर करा ली। आरोप है कि चोलामंडलम फाइनेंस के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से यह खेल हुआ है।
पीड़ित की शिकायत के बाद करोड़ों के लोन घोटाले और फर्जीवाड़े की परतें खुलने लगी हैं। इस मामले में अब क्राइम ब्रांच और ईओडब्ल्यू ने जांच शुरू कर दी है।
राऊ निवासी और वन टू वन कार के नाम से कार रेंटल सर्विस चलाने वाले हर्ष पिता राधेश्याम शर्मा ने क्राइम ब्रांच में शिकायत की कि उनके साथ करीब 30.75 लाख की धोखाधड़ी हुई है।
उन्होंने टोपीबाज नवीन ओझा, गौरव खंडेलवाल और चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी के कुछ अधिकारियों पर मिलीभगत कर फर्जी तरीके से लोन दिलाने और रकम हड़पने का आरोप लगाया है।
प्लॉट पर दो करोड़ रुपए तक का लोन स्वीकृत कराने को कहा
फरियादी हर्ष के अनुसार जुलाई 2023 में उनकी मुलाकात गौरव खंडेलवाल से हुई थी। उसने खुद को बड़ी प्रॉपर्टियों का ब्रोकर बताते हुए कहा कि उसकी चोलामंडलम फाइनेंस के अधिकारियों से अच्छी पहचान है और वह आसानी से बड़ा लोन स्वीकृत करा सकता है।
इसके बाद उसने हर्ष की मुलाकात फर्जी बैंक अधिकारी नवीन ओझा से कराई और उसे चोलामंडलम फाइनेंस का बड़ा अधिकारी बताया।
हर्ष ने बताया कि उनके राऊ स्थित मकान पर पहले से होम लोन चल रहा था और उसी कारण उन्हें बिजनेस लोन नहीं मिल पा रहा था।
इस पर नवीन ने मित्र नगर, तिलक नगर स्थित एक प्लॉट खरीदने की सलाह देते हुए कहा उस प्लॉट पर दो करोड़ रुपए तक का लोन स्वीकृत करा देगा।
जबकि जानकारी जुटाने पर पता चला प्रॉपर्टी कारोबारियों ने उस प्लॉट की वास्तविक कीमत महज 20 से 25 लाख रुपए होना बताई थी। हर्ष ने इतनी कम कीमत की संपत्ति पर दो करोड़ रुपए का लोन मिलने पर सवाल उठाया तो नवीन ओझा ने कहा कि बैंक 15 प्रतिशत स्टाम्प ड्यूटी जमा कराकर संपत्ति का वैल्यूएशन बढ़ा सकता है।
कंपनी के सभी अधिकारियों से है तगड़ी सेटिंग
उन्होंने बताया कि टोपीबाज ने भरोसा दिलाया कि कंपनी के सभी अधिकारियों से उसकी तगड़ी सेटिंग है। वह सबसे बातचीत कर सेटिंग कर चुका है और पूरा काम वैध तरीके से हो जाएगा।
इसके बाद नवीन ओझा और गौरव खंडेलवाल के कहने पर हर्ष ने मित्र नगर स्थित प्लॉट का सौदा किया। बाद में प्लॉट की रजिस्ट्री 35.70 लाख रुपए में उनके नाम कराई गई, जबकि वास्तविक सौदा 26.40 लाख रुपए का बताया गया था।
इसके बाद टोपीबाज ओझा ने हर्ष के राऊ स्थित मकान और मित्र नगर के प्लॉट को बंधक रखकर हर्ष के नाम पर 2 करोड़ 5 लाख रुपए का लोन स्वीकृत कराया।
बैंक अधिकारियों की तगड़ी सेटिंग से लोन मिलने के बाद 21.62 लाख रुपए पुराने होम लोन को चुकाने में लगाए गए।
इसके अलावा जिस प्लॉट पर फर्जी वैल्यूएशन के जरिए लोन लिया, उस विक्रेता को 35.70 लाख रुपए का भुगतान किया गया।
वहीं 75 लाख रुपये गौरव खंडेलवाल को उसके व्यापार के लिए खुद के खाते में मुझसे ट्रांसफर करवा लिए। इसके बाद फर्जी बैंक अधिकारी नवीन ओझा ने स्टाम्प ड्यूटी बैंक में जमा कराने के नाम पर आरटीजीएस के जरिए 28.75 लाख रुपए अपने खाते में ट्रांसफर कराए, जबकि 2 लाख रुपए नकद भी ले लिए। इस तरह उसने कुल 30.75 लाख रुपये हड़पे।
तुम्हारे साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई है
हर्ष के मुताबिक शुरुआत में गौरव खंडेलवाल द्वारा लिए गए पैसों की कुछ महीनों तक उसने किस्तें जमा की, लेकिन बाद में भुगतान बंद कर दिया। जब हर्ष ने लोन लोन बंद कराने की बात कही तो गौरव और नवीन दोनों टालमटोल करने लगे।
नवीन ने यहां तक कहा कि यदि किस्त जमा नहीं हुई तो उसकी नौकरी चली जाएगी और उसने एक किस्त खुद से जमा भी कर दी। इस बीच हर्ष ने अन्य बैंकों में दस्तावेज दिखाए तो उन्हें पता चला कि दोनों संपत्तियों की बाजार कीमत 2.05 करोड़ रुपए के आसपास भी नहीं है और न ही कोई बैंक स्टाम्प ड्यूटी लेकर संपत्ति का वैल्यूएशन बढ़ाकर इतना बड़ा लोन देती है। हर्ष को अन्य बैंक कर्मचारियों ने बताया तुम्हारे साथ बड़ी धोखाधड़ी हुई है।
बैंक अधिकारी नहीं, बल्कि लोन एजेंट था आरोपी
ठगी का पता चलते ही पीड़ित हर्ष चोलामंडलम फाइनेंस की देवास नाका शाखा पहुंचे तो वहां उन्हें पता चला कि नवीन ओझा कंपनी का अधिकारी नहीं, केवल लोन एजेंट था।
कंपनी के अधिकारियों ने यह भी बताया कि उसे पहले ही भगाया जा चुका है, क्योंकि वह लोन दिलाने के नाम पर कई लोगों से करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी कर चुका है। पता चलते ही कारोबारी हर्ष के पैरों तले जमीन खिसक गई।
वह तुरंत अपने वकील शिवम यादव और करण बैरागी के पास पहुंचे, उन्हें पूरी कहानी बताने के बाद ईओडब्ल्यू और क्राइम ब्रांच को लिखित शिकायत की, जिस पर जांच शुरू तो हो गई, लेकिन कार्रवाई ठंडी पड़ी है।
जल्द केस दर्ज नहीं हुआ तो मामला कोर्ट में लगाएंगे
अधिवक्ता शिवम यादव ने बताया कि दो करोड़ रुपए का लोन इस तरह नहीं हो सकता है। इसमें चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी के तमाम अधिकारियों की सेटिंग के बाद फर्जी लोन मेरे पक्षकार के नाम पर किया गया है।
साथ ही 1 करोड़ रुपए से ज्यादा फर्जी बैंक एजेंट और उसके सहयोगी ने हड़प लिए। मामले में जल्द केस दर्ज नहीं हुआ तो कोर्ट में मामला लगाएंगे। बैंक के सभी जिम्मेदार अधिकारियों को भी पार्टी बनाया जाएगा।
क्राइम ब्रांच से कार्रवाई की मांग
हर्ष शर्मा ने आरोप लगाया है कि नवीन ओझा, गौरव खंडेलवाल और अन्य लोगों ने आपराधिक साजिश रचकर फर्जी सर्च रिपोर्ट और कूटरचित दस्तावेज तैयार किए, गलत जानकारी देकर 2.05 करोड़ रुपए का लोन स्वीकृत कराया और स्टाम्प ड्यूटी के नाम पर 30.75 लाख रुपए और ओझा के साथी खंडेलवाल ने 70 लाख से ज्यादा हड़प लिए। उन्होंने निष्पक्ष जांच कर टोपीबाजों पर कार्रवाई की मांग की है।
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