भाजपा अध्यक्ष के कार्यक्रम में खाली कुर्सियों की चर्चा: दो दिन बाद ‘छात्रों की गूंज’ में उमड़ी युवाओं की भीड़; राजधानी तक पहुंचा मामला
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मध्यप्रदेश दौरे के दौरान इंदौर में हुए कार्यक्रम और दो दिन बाद राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में नजर आई भीड़ अब राजनीतिक चर्चा का विषय बन गई है।
सोशल मीडिया पर दोनों आयोजनों के वीडियो सामने आने के बाद बीजेपी के संगठन और प्रशासनिक स्तर पर भीड़ प्रबंधन और आयोजन की तैयारियों को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।
नितिन नबीन का 17 सितंबर को इंदौर दौरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन से जुड़े कार्यक्रमों के तहत हुआ था।
उनके स्वागत में रोड शो भी आयोजित किया गया था। मीडिया रिपोर्टों में रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में लोगों की मौजूदगी की बात सामने आई थी।
रोड शो के बाद कार्यक्रम स्थल पर कम हुई भीड़?
आयोजन से जुड़े लोगों के हवाले से दावा किया जा रहा है कि रोड शो के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय नेता, पार्षद और उनके समर्थक मौजूद थे।
रोड शो समाप्त होने के बाद इनमें से कुछ लोग कार्यक्रम स्थल पर नहीं पहुंचे या वापस लौट गए। इससे मुख्य कार्यक्रम के दौरान भीड़ कम दिखाई देने की बात कही जा रही है।
स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि ग्रामीण क्षेत्रों से लोगों को बसों के जरिए कार्यक्रम स्थल तक लाया गया था।
कार्यक्रम के समय में देरी और लंबे इंतजार के कारण कुछ लोग वापस लौट गए। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है।
तीन डोम में अलग-अलग नजर आया भीड़ का असर
कार्यक्रम स्थल पर तीन डोम बनाए गए थे। सामने वाले मुख्य डोम में अपेक्षाकृत ज्यादा भीड़ रही, जबकि दोनों तरफ के डोम में कई सीटें खाली नजर आईं।
सोशल मीडिया पर इसी हिस्से के वीडियो वायरल होने के बाद कार्यक्रम की भीड़ को लेकर चर्चा तेज हुई।
दो दिन बाद राहुल गांधी का कार्यक्रम
इसके ठीक दो दिन बाद 19 सितंबर को कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने इंदौर में ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में युवाओं और विद्यार्थियों से संवाद किया। कार्यक्रम में शिक्षा, बेरोजगारी, भर्ती परीक्षाओं और छात्रों से जुड़े मुद्दे प्रमुख रहे।
राहुल गांधी के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं की मौजूदगी देखने को मिली। कार्यक्रम के लिए कांग्रेस ने पहले जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम में अनुमति मांगी थी, लेकिन बाद में आयोजन स्थल बदला गया और रीजनल पार्क के सामने स्थान तय किया गया।
युवाओं से सीधा संवाद बना आकर्षण
‘छात्रों की गूंज’ का फोकस पारंपरिक राजनीतिक सभा के बजाय विद्यार्थियों और युवाओं से संवाद पर था।
कार्यक्रम में युवाओं से शिक्षा व्यवस्था, रोजगार और भविष्य से जुड़े सवालों पर चर्चा की गई। इससे कार्यक्रम की थीम सीधे युवा वर्ग से जुड़ी रही।
हालांकि, केवल किसी एक कार्यक्रम में अधिक भीड़ या उत्साह के आधार पर यह निष्कर्ष निकालना मुश्किल है कि युवाओं का राजनीतिक रुझान किसी एक दल की ओर बदल रहा है।
भीड़ पर आयोजन का स्वरूप, स्थान, समय, स्थानीय संगठन की mobilization और कार्यक्रम का विषय, सभी का असर पड़ सकता है।
अब संगठन स्तर पर मंथन की चर्चा
दोनों आयोजनों की तुलना के बीच बीजेपी के स्थानीय संगठन और प्रशासनिक स्तर पर आयोजन की व्यवस्थाओं, भीड़ जुटाने की रणनीति और कार्यक्रम के दौरान लोगों की मौजूदगी को लेकर समीक्षा की चर्चा है।
खासतौर पर यह देखा जा रहा है कि रोड शो के बाद कार्यक्रम स्थल पर भीड़ क्यों कम हुई और किन स्तरों पर बेहतर समन्वय की जरूरत थी।
दूसरी ओर, राहुल गांधी के कार्यक्रम में युवाओं की मौजूदगी को कांग्रेस अपने युवा संवाद अभियान के लिए महत्वपूर्ण मान रही है।
कार्यक्रम के बाद मध्यप्रदेश कांग्रेस ने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को प्रदेश के सभी जिलों तक ले जाने की घोषणा भी की है।
फिलहाल दोनों आयोजनों की तस्वीरों और वीडियो ने इंदौर की राजनीतिक गतिविधियों में एक नया सवाल जरूर खड़ा कर दिया है।
बड़े नेताओं की सभा में भीड़ जुटाने से ज्यादा महत्वपूर्ण क्या अब यह है कि कार्यक्रम का विषय और उसका प्रारूप लोगों, खासकर युवाओं को कितना जोड़ पाता है?
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