पत्नी की हत्या के आरोपी पति के सिरकटे शव पर सस्पेंस बरकरार: बेटी ने केवल धड़ देखकर पहचानने से किया इनकार; सुसाइड नोट में बेटे से मुखाग्नि देने की इच्छा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर/गंजबासौदा।
इंदौर में पोस्टल असिस्टेंट उर्मिला सैनी की हत्या के बाद फरार चल रहे आरोपी पति अखिलेश सैनी के कथित सिरकटे शव को लेकर रहस्य गहराता जा रहा है। रेलवे ट्रैक से बरामद धड़ की पहचान परिजनों ने दस्तावेजों के आधार पर अखिलेश के रूप में की है, लेकिन पुलिस अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से बच रही है।
अधिकारियों का कहना है कि शव की वास्तविक पहचान केवल डीएनए जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सुनिश्चित हो सकेगी। पुलिस के अनुसार, रिपोर्ट आने में लगभग 10 दिन का समय लग सकता है। इसके बाद ही यह स्पष्ट होगा कि रेलवे ट्रैक पर मिला सिरविहीन शव वास्तव में अखिलेश सैनी का है या नहीं।
रेलवे ट्रैक पर मिला था सिरकटा शव
गौरतलब है कि 11 जुलाई को पत्नी उर्मिला सैनी की हत्या के बाद से अखिलेश लापता था। शनिवार रात गंजबासौदा-पवई रेलवे स्टेशन के बीच रेलवे ट्रैक पर एक सिरकटा शव मिला। शव की पैंट की जेब से अखिलेश के आधार कार्ड सहित अन्य दस्तावेज और एक कथित सुसाइड नोट बरामद हुआ।
इन दस्तावेजों के आधार पर अखिलेश के पिता सीताराम सैनी और भाई चित्रेश सैनी ने शव की पहचान की, लेकिन पुलिस वैज्ञानिक जांच पूरी होने तक इसे अंतिम पहचान मानने को तैयार नहीं है।
फोरेंसिक विशेषज्ञों ने जताई गंभीर चुनौती
इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज के फोरेंसिक विभागाध्यक्ष डॉ. बी.के. सिंह का कहना है कि डीएनए जांच से शव की पहचान तो संभव हो जाएगी, लेकिन मौत किन परिस्थितियों में हुई, इसका पता लगाने के लिए सिर सहित शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंगों की जांच आवश्यक होती है।
उन्होंने बताया कि यदि सिर बरामद नहीं होता है तो यह तय करना बेहद कठिन होगा कि मौत आत्महत्या, दुर्घटना या हत्या का परिणाम है। सिर पर लगी चोटें, घाव, रक्त के निशान और अन्य फोरेंसिक साक्ष्य ऐसे मामलों में जांच की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं।
बेटी ने केवल धड़ देखकर पहचानने से किया इनकार
मामले में एक भावनात्मक पहलू भी सामने आया है। अखिलेश की 15 वर्षीय बेटी प्रेक्षा ने केवल धड़ देखकर शव को अपने पिता का मानने से इनकार कर दिया। पुलिस ने उसे शव के साथ मिले दस्तावेजों की जानकारी दी, लेकिन उसने स्पष्ट कहा कि सिर नहीं होने की स्थिति में वह पहचान की पुष्टि नहीं कर सकती।
प्रेक्षा अपनी मां की हत्या के बाद लगातार आरोपी पिता की गिरफ्तारी की मांग करती रही थी। उसने पुलिस अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर पिता के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और सख्त सजा की मांग भी की थी।
सात वर्षीय बेटे को अब तक नहीं दी गई जानकारी
अखिलेश और उर्मिला का सात वर्षीय बेटा अव्यक्त (प्रायु) फिलहाल अपने नाना-नानी के साथ खंडवा में रह रहा है। परिजनों ने अभी तक उसे उसके पिता के कथित शव मिलने की जानकारी नहीं दी है। परिवार के अनुसार, वह अभी भी अपनी मां की हत्या के सदमे से पूरी तरह बाहर नहीं आ पाया है और घटना को याद कर अक्सर भयभीत हो जाता है।
सुसाइड नोट में बेटे से मुखाग्नि देने की इच्छा
रेलवे ट्रैक से मिले कथित सुसाइड नोट में अखिलेश ने अपनी अंतिम इच्छा का उल्लेख करते हुए लिखा है कि उसकी चिता को मुखाग्नि उसका बेटा प्रायु ही दे, तभी उसकी आत्मा को शांति मिलेगी।
नोट में उसने पूरे घटनाक्रम के लिए सिवनी मालवा निवासी एक व्यक्ति को जिम्मेदार भी ठहराया है। हालांकि पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट में लिखी प्रत्येक बात की स्वतंत्र रूप से जांच की जा रही है और अभी किसी दावे की पुष्टि नहीं की जा सकती।
कई अहम सवालों के जवाब तलाश रही पुलिस
संयोगितागंज थाना प्रभारी के.पी. यादव के अनुसार, गंजबासौदा पुलिस से अभी तक केस डायरी प्राप्त नहीं हुई है। इसके मिलने के बाद पूरे घटनाक्रम और सुसाइड नोट की परिस्थितियों का विस्तृत परीक्षण किया जाएगा।
जांच एजेंसियों के सामने कई महत्वपूर्ण प्रश्न अब भी अनुत्तरित हैं। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि पत्नी की हत्या के बाद फरार अखिलेश आठ दिनों तक कहां रहा, रेलवे ट्रैक पर मिला शव वास्तव में उसी का है या नहीं, और यदि है तो उसकी मौत आत्महत्या, रेल दुर्घटना या किसी अन्य कारण से हुई।
व्यवहार और फरारी की रणनीति भी जांच के दायरे में
पुलिस के अनुसार, पत्नी की हत्या के बाद अखिलेश का व्यवहार भी जांच का विषय बना हुआ है। बताया गया कि वारदात के बाद उसने नहाकर कपड़े बदले, माथे पर तिलक लगाया और सामान्य तरीके से बच्चों के स्कूल पहुंचा। इसके बाद वह ऐसे रास्ते से निकला जहां सीसीटीवी कैमरे नहीं लगे थे।
इतना ही नहीं, वह अपने दोनों मोबाइल फोन, स्कूटी और एटीएम कार्ड भी पीछे छोड़ गया था। इन परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि कहीं उसने जांच को भ्रमित करने के उद्देश्य से पहले से कोई सुनियोजित योजना तो नहीं बनाई थी।
फिलहाल पुलिस डीएनए रिपोर्ट, फोरेंसिक जांच और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों का इंतजार कर रही है। इन्हीं के आधार पर इस बहुचर्चित मामले में मौत की गुत्थी सुलझने और आगे की कानूनी कार्रवाई की दिशा तय होगी।
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