नारी शक्ति वंदन अधिनियम का समर्थन: महापौर सचिवालय पर हुआ नारी संवाद कार्यक्रम; महिलाओं ने जताया उत्साह, जमकर आतिशबाजी
KHULASA FIRST
संवाददाता
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
देश में प्रस्तावित नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन में आज महापौर पुष्यमित्र भार्गव भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा की अध्यक्षता में महापौर सचिवालय (मेयर हाउस) में शहर की प्रबुद्ध महिलाओं के साथ एक महत्वपूर्ण संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं ने भाग लेकर अपने विचार साझा किए और इस ऐतिहासिक विधेयक के प्रति समर्थन व्यक्त किया। इस अवसर पर शैलजा मिश्रा अंजू मखीजा भारत पारख सहित बड़ी संख्या में प्रबुद्ध महिलाएं सम्मिलित हुई।
कार्यक्रम के दौरान महापौर पुष्यमित्र भार्गव एवं सुमित मिश्रा ने महिलाओं से सीधा संवाद करते हुए अधिनियम के महत्व और उसके संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की। महापौर ने कहा कि यह कानून केवल महिलाओं के सशक्तिकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि महिलाओं द्वारा सशक्तिकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह आने वाली पीढ़ियों की दिशा और दशा तय करने वाला परिवर्तनकारी कानून साबित होगा।
इस अवसर पर भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित्रा मिश्रा ने भी अधिनियम की आवश्यकता और उसके दूरगामी प्रभावों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह बिल महिलाओं को नीति-निर्माण में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करेगा और देश के विकास में उनकी भूमिका को और मजबूत करेगा।संवाद में उपस्थित महिलाओं ने भी अपने विचार रखते हुए इस विधेयक का जोरदार समर्थन किया। महिलाओं ने कहा कि अब समय आ गया है जब केवल उनके लिए नीतियां नहीं बनेंगी, बल्कि महिलाएं स्वयं नीतियां बनाएंगी और देश के विकास में अग्रणी भूमिका निभाएंगी।
इस दौरान महिलाओं ने महापौर पुष्यमित्र भार्गव एवं सुमित मिश्रा के साथ आतिशबाजी कर और मिठाई बांटकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रति आभार व्यक्त किया। उनके चेहरे पर दिख रही खुशी इस बात का प्रमाण थी कि यह विधेयक महिलाओं के लिए कितनी बड़ी उम्मीद लेकर आया है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने कहा कि 18 अप्रैल को, जिस दिन यह बिल पारित होगा, उस दिन इंदौर की महिला शक्ति सड़कों पर उतरकर प्रधानमंत्री का धन्यवाद करेगी और इस ऐतिहासिक क्षण का उत्सव मनाएगी।
महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने यह भी कहा कि पिछले 15-20 वर्षों में देश के विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी तेजी से बढ़ी है और लगभग हर सेक्टर में 30 प्रतिशत तक महिलाएं नेतृत्व कर रही हैं। ऐसे में यह अधिनियम इस बदलाव को और गति देगा तथा महिलाओं को निर्णय लेने की मुख्यधारा में लाएगा।
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