सीए परीक्षा में फेल छात्रा को बनाया देश का नौवां मेधावी!: नाहटा एकेडमी पर ‘फर्जी टॉपर्स' बनाने का आरोप, एआई से मार्कशीट बदलने का अंदेशा
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट...इंदौर।
मध्य प्रदेश की व्यावसायिक राजधानी इंदौर के कोचिंग जगत से एक ऐसे सनसनीखेज मामले का खुलासा हुआ है, जिसने विद्यार्थियों और उनके संरक्षकों (पालकों) के भरोसे को हिलाकर रख दिया है। शहर की जानी-मानी ‘नाहटा प्रोफेशनल एकेडमी' पर आरोप है कि उसने सीए (सनदी लेखाकार) की प्रवेश परीक्षा में नाकाम रही एक छात्रा को न केवल उत्तीर्ण (पास) दिखाया, बल्कि उसे देश के शीर्ष दस मेधावियों में शामिल बताते हुए 'देश में नौवां स्थान' (ऑल इंडिया रैंक-9) मिलने का झूठा ढिंढोरा पीट दिया, जिसे बाद में बदल कर ‘एमपी स्टेट टॉपर’ घोषित कर दिया गया।
शिक्षा जगत में मचा हड़कंप
इस खुलासे के बाद पूरे प्रदेश के शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है। जानकार इसे सीधे तौर पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और आधुनिक संपादन कला (फोटो एडिटिंग) के जरिए किया गया डिजिटल जालसाजी का संगीन मामला मान रहे हैं। इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ, जब संस्थान की ओर से सामाजिक मंचों (सोशल मीडिया) पर बधाई का एक सचित्र विज्ञापन प्रसारित किया गया। इसमें संस्थान ने अपनी छात्रा हिबा अंसारी के चित्र के साथ दावा किया कि उसने परीक्षा में 340 अंक प्राप्त कर देश में नौवां स्थान हासिल किया है। जब इस दावे की तहकीकात की गई और आधिकारिक वेबसाइट से मूल अंकसूची का मिलान किया गया, तो सच्चाई इसके बिल्कुल विपरीत निकली। मूल अंकसूची के अनुसार, संबंधित छात्रा को परीक्षा में कुल 180 अंक ही मिले थे। परीक्षा के तय मापदंडों के अनुसार, इतने कम अंकों के कारण वह इस परीक्षा में ‘अनुत्तीर्ण' घोषित की गई थीं। यानी, जिस विद्यार्थी को परीक्षा में सफलता तक नहीं मिली, उसे संस्थान ने देश के शीर्ष छात्र-छात्राओं की सूची में लाकर खड़ा कर दिया।
चोरी पकड़े जाने पर हड़बड़ाहट
इस कथित फर्जीवाड़े को खुलासा करने में पुणे के एक अन्य छात्र की प्रामाणिक अंकसूची ने मुख्य भूमिका निभाई। पुणे के उस छात्र ने इस परीक्षा में सचमुच 340 अंक प्राप्त किए थे। सबसे बड़ी बात यह थी कि इतने अधिक अंक लाने के बाद भी उस छात्र को देश में कोई रैंक (स्थान) नहीं मिली थी, क्योंकि इस बार मेधावियों की सूची 343 अंकों पर ही बंद (क्लोज) हो गई थी। ऐसे में सवाल उठा कि जब 340 अंक लाने वाले वास्तविक छात्र को कोई स्थान नहीं मिला, तो नाहटा संस्थान उसी 340 अंक का झूठा दावा कर अपनी छात्रा को नौवें स्थान पर कैसे दिखा सकता है?
पकड़े जाने के बाद की कहानी
जैसे ही इंटरनेट पर लोगों ने इस विसंगति को लेकर सवाल उठाने शुरू किए, संस्थान प्रबंधन में अफरा-तफरी मच गई। अपनी चोरी छिपाने के लिए संस्थान ने आनन-फानन में मुख्य चित्र को तो बदल दिया। नए चित्र में ‘देश में नौवां स्थान' हटाकर छात्रा को 'मध्य प्रदेश टॉपर' लिख दिया गया, लेकिन जल्दबाजी में वे चित्र के नीचे लिखे जाने वाले मुख्य विवरण (डिस्क्रिप्शन) को बदलना भूल गए। उस विवरण में काफी देर बाद तक ‘देश में नौवां स्थान' का ही दावा लिखा रहा, जिसने संस्थान की नीयत को पूरी तरह उजागर कर दिया।
"मेहनत और विश्वास का सौदा’
इस घटना को लेकर इंदौर के नागरिकों और जागरूक पालकों में भारी नाराजगी है। शिक्षाविदों का कहना है कि जब दशकों पुराने और नामी संस्थान अपनी साख बढ़ाने के लिए इस तरह के हथकंडे अपनाते हैं, तो बच्चों का मनोबल टूटता है। दिन-रात एक करके अपने बच्चों को पढ़ाने वाले माता-पिता के भरोसे का यह सीधा कत्ल है। यह भ्रामक प्रचार नहीं, बल्कि बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। अब इस मामले में प्रशासन और संबंधित नियामक संस्थाओं से दखल देने की मांग की जा रही है। छात्र संगठनों का कहना है कि इस पूरे प्रकरण की किसी निष्पक्ष एजेंसी से उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। भ्रामक विज्ञापन और डिजिटल दस्तावेजों में हेरफेर करने के आरोप में संस्थान पर सख्त कानूनी कार्रवाई हो।
प्रबंधन का रुख
इस पूरे विवाद और गंभीर आरोपों पर अब तक नाहटा प्रोफेशनल एकेडमी के संचालकों या प्रबंधन की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या सफाई जारी नहीं की गई है। शहर के मुख्य कोचिंग केंद्र में हुआ यह वाकया अब पूरे देश के शैक्षणिक गलियारों में चर्चा और निंदा का विषय बना हुआ है।
आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग: अंकसूची में हाईटेक हेरफेर
इस मामले को करीब से देखने वाले विशेषज्ञों का कहना है कि यह कोई अनजानी भूल या मानवीय गलती नहीं है। इसके पीछे सोची-समझी साजिश का अंदेशा है। संस्थान ने संभवतः कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) टूल्स का उपयोग करके मूल अंकसूची के अंकों (180) और परीक्षा परिणाम (अनुत्तीर्ण) को इतनी सफाई से बदला कि पहली नजर में वह बिल्कुल असली दिखाई दे। सरकारी या आधिकारिक दस्तावेजों में इस तरह का बदलाव करना सीधे तौर पर धोखाधड़ी और कानूनी अपराध के दायरे में आता है।
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