रोक के बावजूद धरती को छीलना जारी: जिले के 73% इलाकों में जलस्तर बहुत नीचे
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
कलेक्टर शिवम वर्मा की रोक के बावजूद जिलेभर में पुलिस के साथ सेटिंग करके बोरिंग जारी हैं। इसका नतीजा ये है कि जिलेभर का 73 प्रतिशत हिस्सा ऐसा है, जहां की धरती की इतना छलनी कर दिया गया है कि जलस्तर काफी नीचे चला गया है। यही स्थिति रही तो इंदौर में आने वाले दिनों में भीषण संकट का सामना करना पड़ेगा।
खास बात ये है कि केंद्रीय भूजल बोर्ड द्वारा इंदौर को लेकर दी गई चेतावनियों का कोई पालन नहीं हो रहा है। धरती को छीलकर पानी निकालने के लिए बोरिंग जारी हैं। कलेक्टर शिवम वर्मा ने 30 जून तक इस पर रोक लगाई है लेकिन इसका कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा।
सूत्र बताते हैं कि क्षेत्रीय थाना पुलिस के साथ सेटिंग करके रात्रि के अंधेरे में बोरिंग जारी है। प्रशासन का अप्रैल लगभग बीतने के बावजूद अवैध बोरिंग और मशीनों के रजिस्ट्रेशन को लेकर कोई सख्त दिशा-निर्देश जारी नहीं करने का फायदा उठाया जा रहा है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, जिले में भूजल दोहन का स्तर 117' तक पहुंच गया है, यानी जितना पानी जमीन में रिचार्ज हो रहा है, उससे कहीं अधिक निकाला जा रहा है। जिले का 73 फीसदी हिस्सा ‘अति-दोहन’ की श्रेणी में आ चुका है और विशेषज्ञों का कहना है कि अब एक वर्ग किलोमीटर क्षेत्र भी सुरक्षित नहीं बचा है।
शहरी क्षेत्र की स्थिति भी ‘क्रिटिकल’ हो चुकी है। जनवरी में भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई मौतों के बाद लोगों में सुरक्षित पानी को लेकर चिंता बढ़ी है। यही कारण है कि शहर में बोरिंग की मांग तेजी से बढ़ रही है।
बोरिंग एजेंसियों को आउटर एरिया—बायपास, सुपर कॉरिडोर और एमआर-12 जैसे क्षेत्रों में लगातार बुकिंग मिल रही है। घरेलू बोरिंग की दर 140 से 150 रुपये प्रति फीट है, जबकि अनुमति के नाम पर अतिरिक्त राशि भी ली जा रही है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि जिले में भूजल का रिचार्ज मुख्यत: बारिश पर निर्भर है, लेकिन रिचार्ज के साधन बेहद सीमित हैं। पहले नवंबर तक 8-15 फीट पर पानी मिल जाता था, जो अब 18-35 फीट या उससे अधिक गहराई पर पहुंच गया है।
अनियंत्रित बोरिंग के कारण जल भंडार तेजी से घट रहा है, जिससे भविष्य में गंभीर संकट की आशंका है।
करीब 162-164 फीट दर्ज हुआ जलस्तर
प्रदेश के 51 जिलों में इंदौर का भूजल स्तर सबसे अधिक नीचे है। प्री-मानसून (मई 2024) में यहां जलस्तर 49.43 मीटर (करीब 162-164 फीट) दर्ज किया गया, जो पूरे प्रदेश में सबसे गहरा है। तुलना करें तो राजधानी भोपाल में यह स्तर करीब 1.2 मीटर (4 फीट) है, यानी इंदौर का जलस्तर लगभग 40 गुना ज्यादा गहराई पर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह आंकड़े निगरानी कुओं के औसत हैं, जबकि निजी बोरिंग 500 से 700 फीट तक पहुंच चुके हैं, जिससे वास्तविक स्थिति और भी गंभीर हो सकती है। प्रशासन यदि बोरिंग मशीनों के रजिस्ट्रेशन और अनुमति प्रक्रिया को सख्ती से लागू करे तो इस पर नियंत्रण संभव है।
फिलहाल इंदौर (ग्रामीण), देपालपुर और सांवेर ब्लॉक ‘अति-दोहन’ की श्रेणी में हैं, जबकि शहरी क्षेत्र ‘क्रिटिकल’ और महू ‘सेमी-क्रिटिकल’ स्थिति में है। यदि अनियंत्रित दोहन जारी रहा, तो आने वाले समय में इंदौर को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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