सख्ती: नहीं हटाई ये कॉलोनी तो रोजाना देना होगा इतना जुर्माना; आएगा नया कानून
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्य प्रदेश में अवैध और अनधिकृत कॉलोनियों पर लगाम लगाने के लिए सरकार 'मध्यप्रदेश कॉलोनी अधिनियम-2026' लाने जा रही है। नए कानून का मसौदा तैयार हो चुका है और इसे 20 जुलाई से शुरू होने वाले विधानसभा के मानसून सत्र में पेश किया जाएगा।
प्रस्तावित कानून का उद्देश्य अवैध प्लॉटिंग पर रोक लगाना, लोगों को फर्जी कॉलोनियों में निवेश से बचाना, वैध कॉलोनियों की अनुमति प्रक्रिया को सरल बनाना और नियमों का उल्लंघन करने वाले कॉलोनाइजरों के साथ लापरवाह अधिकारियों की जवाबदेही तय करना है। मसौदे में सख्त जुर्माने और जेल के प्रावधान भी शामिल किए गए हैं।
अवैध प्लॉटिंग और भ्रामक विज्ञापन होंगे अपराध
सरकार के अनुसार, हाईवे और सड़कों के किनारे सस्ते प्लॉट के नाम पर बिना डायवर्शन, टीएनसीपी मंजूरी और अन्य वैधानिक अनुमतियों के कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं।
कई मामलों में खेतों की अवैध प्लॉटिंग कर लोगों से निवेश कराया जाता है, लेकिन बाद में उन्हें सड़क, बिजली, पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलतीं। नया कानून ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई का रास्ता खोलेगा।
कॉलोनियों को चार श्रेणियों में बांटा जाएगा
प्रस्तावित अधिनियम में कॉलोनियों को उनकी कानूनी स्थिति के आधार पर चार श्रेणियों में विभाजित किया गया है।
1. नई कॉलोनियां: समयबद्ध और ऑनलाइन मंजूरी
सरकार वैध कॉलोनियों को बढ़ावा देने के लिए अनुमति प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन और समयबद्ध बनाने जा रही है।
आवेदन के 45 दिन के भीतर पंजीयन का निर्णय अनिवार्य होगा, अन्यथा पंजीयन स्वतः स्वीकृत माना जाएगा।
60 दिन के भीतर विकास अनुमति जारी करनी होगी। तय समय में निर्णय नहीं होने पर अनुमति स्वतः स्वीकृत मानी जाएगी।
अधिकारी अधिकतम तीन बार ही आपत्ति दर्ज कर सकेंगे।
किसी भी स्तर पर आवेदन 7 दिन से अधिक लंबित नहीं रखा जा सकेगा।
2 हेक्टेयर से बड़े प्रोजेक्ट अधिकतम तीन चरणों में विकसित किए जा सकेंगे। 500 वर्गमीटर तक की कॉलोनी या 8 फ्लैट तक की परियोजनाओं को कॉलोनी विकास अनुमति से छूट मिलेगी, हालांकि टीएनसीपी की मंजूरी आवश्यक रहेगी। विकास कार्य पूरा होने के 45 दिन के भीतर कम्प्लीशन सर्टिफिकेट जारी करना होगा, अन्यथा इसे स्वतः स्वीकृत माना जाएगा।
2. अनधिकृत (अनऑथराइज्ड) कॉलोनियां: सुधार का मौका, फिर कार्रवाई
बिना वैध विकास अनुमति के विकसित कॉलोनियों के लिए पहले सुधार का अवसर दिया जाएगा। कॉलोनाइजर को 15 दिन में अवैध निर्माण हटाकर भूमि को मूल स्थिति में लाना होगा।
ऐसा नहीं होने पर रहवासी रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) बनाकर विकास कार्य का प्रस्ताव दे सकेंगे। सड़क, पानी, नाली जैसी सुविधाओं का खर्च कॉलोनाइजर से वसूला जाएगा। आवश्यकता पड़ने पर जब्त जमीन की बिक्री या निर्धारित विकास शुल्क से राशि जुटाई जाएगी।
3. अविकसित कॉलोनियां: अधूरे विकास कार्य होंगे पूरे
जिन कॉलोनियों को वैध अनुमति तो मिली, लेकिन कॉलोनाइजर सड़क, सीवर, पानी और बिजली जैसी सुविधाएं अधूरी छोड़कर चला गया, वहां सरकार हस्तक्षेप करेगी।
ऐसी कॉलोनियों की पहचान कर RWA के माध्यम से विकास कार्य पूरे कराए जाएंगे। कॉलोनाइजर की गिरवी संपत्ति बेचकर खर्च की भरपाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर रहवासियों से अनुपातिक विकास शुल्क लिया जा सकेगा।
4. अवैध कॉलोनियां: नियमितीकरण नहीं, सीधे हटाने की कार्रवाई
सरकारी जमीन, सड़क, पार्क, नदी-नाले, तालाब, वन भूमि और अन्य प्रतिबंधित क्षेत्रों पर बनी कॉलोनियों को किसी भी स्थिति में वैध नहीं किया जाएगा। ऐसी कॉलोनियों को हटाने की कार्रवाई होगी। निर्माणकर्ताओं को 15 दिन का नोटिस दिया जाएगा। मामले की सुनवाई कलेक्टर न्यायालय में होगी। दोषियों पर जेल, जुर्माना और उनके खर्च पर अवैध निर्माण हटाने का प्रावधान रहेगा।
बिल्डर ही नहीं, अधिकारी और पुलिस भी होंगे जवाबदेह
नए कानून में पहली बार सरकारी अधिकारियों और पुलिस की जिम्मेदारी भी तय की गई है। यदि कोई अधिकारी अपने क्षेत्र में बन रही अवैध कॉलोनी की जानकारी छिपाता है या समय पर कार्रवाई नहीं करता, तो इसे अपराध माना जाएगा।
दोषी अधिकारी या कर्मचारी को 6 महीने तक की जेल और 10 लाख रुपए तक का व्यक्तिगत जुर्माना हो सकता है। समय पर कार्रवाई नहीं करने पर विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई भी होगी। अवैध निर्माण हटाने में सहयोग नहीं करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान रहेगा।
हर जिले में बनेगी निगरानी समिति
कानून के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए प्रत्येक जिले में कलेक्टर की अध्यक्षता में 'निगरानी एवं पर्यवेक्षण समिति' गठित की जाएगी। समिति हर महीने बैठक कर अवैध और अनधिकृत कॉलोनियों के खिलाफ हुई कार्रवाई की समीक्षा करेगी।
रोजाना 1 लाख रुपए तक जुर्माने का प्रावधान
प्रस्तावित मसौदे के अनुसार, आदेश के बावजूद यदि अनधिकृत कॉलोनी नहीं हटाई जाती है, तो संबंधित कॉलोनाइजर पर रोजाना 1 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इस सख्त प्रावधान से अवैध प्लॉटिंग और अनधिकृत कॉलोनियों पर प्रभावी रोक लगेगी।
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