खुले बोरवेल पर सख्ती: इतने दिन में नहीं किया बंद तो लगेगा जुर्माना; हादसा हुआ तो FIR और जेल
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, भोपाल।
मध्यप्रदेश सरकार ने बोरवेल हादसों पर रोक लगाने के लिए नई बोरवेल नीति और मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू कर दी है। नई व्यवस्था के तहत खुले या असफल (सूखे) बोरवेल को 90 दिनों के भीतर सुरक्षित तरीके से बंद करना अनिवार्य होगा।
कार्रवाई की जाएगी
नियमों का उल्लंघन करने वालों पर अब केवल जुर्माना ही नहीं, बल्कि आपराधिक कार्रवाई भी की जाएगी। सरकार का कहना है कि प्रदेश में लगातार सामने आ रहे बोरवेल हादसों को रोकने और जन सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए यह सख्त कदम उठाया गया है।
90 दिन में बंद करना होगा सूखा बोरवेल
नई नीति के अनुसार यदि किसी बोरवेल में पानी नहीं निकलता है या उसका उपयोग नहीं हो रहा है, तो जमीन मालिक को 90 दिन के भीतर उसे मिट्टी, कंक्रीट या अन्य निर्धारित तकनीकी उपायों से पूरी तरह बंद करना होगा। इसके बाद पोर्टल पर फोटो अपलोड कर प्रमाण देना भी अनिवार्य रहेगा।
यदि कोई व्यक्ति पहली बार नियमों का उल्लंघन करते हुए पकड़ा जाता है तो उस पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। दूसरी बार लापरवाही पाए जाने पर 25 हजार रुपए का जुर्माना और कानूनी कार्रवाई दोनों का सामना करना पड़ेगा।
हादसा हुआ तो सीधे FIR
सरकार ने स्पष्ट किया है कि खुले बोरवेल के कारण यदि कोई दुर्घटना होती है, तो जमीन मालिक और संबंधित ड्रिलिंग एजेंसी दोनों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जाएगी। ऐसे मामलों में आपराधिक जिम्मेदारी तय की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी।
रेस्क्यू ऑपरेशन का खर्च भी दोषियों से वसूला जाएगा
अब तक बोरवेल हादसों में बचाव अभियान का पूरा खर्च सरकार वहन करती थी, लेकिन नई नीति में यह प्रावधान बदल दिया गया है। यदि किसी खुले बोरवेल के कारण रेस्क्यू ऑपरेशन चलाना पड़ता है, तो उस पर होने वाला लाखों रुपए का खर्च संबंधित जमीन मालिक और ड्रिलिंग एजेंसी से वसूला जाएगा।
परख एप से कर सकेंगे शिकायत
सरकार ने आम नागरिकों को भी निगरानी में भागीदार बनाया है। अब कोई भी व्यक्ति अपने आसपास खुले या असुरक्षित बोरवेल की फोटो लेकर 'परख एप' (PARAKH App) पर शिकायत दर्ज कर सकता है। शिकायत मिलने पर संबंधित विभाग जांच कर कार्रवाई करेगा।
अधिकारियों के लिए भी तय हुई जवाबदेही
नई नीति में हैंडपंप और पेयजल परियोजनाओं से जुड़े अधिकारियों के लिए भी समयसीमा तय की गई है। आवेदन प्राप्त होने के बाद तीन कार्यदिवस में फाइल आगे बढ़ानी होगी और निर्धारित समय में स्थल निरीक्षण व रिपोर्ट तैयार करनी होगी। समयसीमा का पालन नहीं करने पर अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई का प्रावधान रखा गया है।
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