डॉक्टर के सुसाइड अटेम्प्ट मामले में सख्ती: रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न के आरोपों पर मांगी 24 घंटे में रिपोर्ट
KHULASA FIRST
संवाददाता

खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज से जुड़े एमटीएच अस्पताल की पीजी जेआर -1 डॉक्टर के कथित आत्महत्या प्रयास और रैगिंग-मानसिक उत्पीड़न की शिकायत को नेशनल मेडिकल कमीशन (एनएमसी) ने गंभीरता से लिया है।
एनएमसी के एंटी-रैगिंग सेल ने कॉलेज प्रबंधन को 24 घंटे के भीतर पैरावाइज कमेंट और एक्शन टेकन रिपोर्ट (एटीआर) सौंपने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने मामले की तत्काल, निष्पक्ष और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर जांच करने को कहा है।
मामले की शिकायत पीजी डॉक्टर के भाई कुणाल यादव की ओर से एनएमसी को दी गई थी। शिकायत में सीनियर रेजिडेंट्स पर कथित रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न, सार्वजनिक अपमान, धमकी, अत्यधिक ड्यूटी और गैर-अकादमिक काम का दबाव बनाने जैसे आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
इंसुलिन ओवरडोज के मामले में भी मांगी जानकारी
एनएमसी ने कॉलेज से डॉक्टर द्वारा कथित रूप से इंसुलिन की अधिक मात्रा लेने की घटना की तारीख, समय और परिस्थितियों की जानकारी मांगी है।
साथ ही यह बताने को कहा है कि डॉक्टर किस स्थिति में मिली थीं, उनका इलाज कहां हुआ और वर्तमान मेडिकल स्थिति क्या है।
इससे पहले रिपोर्टों में सामने आया था कि डॉक्टर को उपचार के लिए एमवाय अस्पताल ले जाया गया था। पुलिस ने भी अस्पताल पहुंचकर उनका बयान दर्ज किया था।
14-15 घंटे की ड्यूटी के आरोप की होगी जांच
शिकायत में आरोप लगाया है कि डॉक्टर से निर्धारित रोस्टर से अधिक समय तक काम कराया गया और गैर-अकादमिक तथा कागजी काम भी सौंपे गए। एनएमसी ने इन आरोपों की जांच के लिए ड्यूटी रोस्टर, बायोमेट्रिक और अटेंडेंस रिकॉर्ड, हैंडओवर रजिस्टर तथा अवकाश रिकॉर्ड मांगे हैं।
आयोग ने कॉलेज से यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि वास्तविक ड्यूटी अवधि और आधिकारिक रोस्टर में कितना अंतर था तथा गैर-अकादमिक कार्य PG छात्रों के बीच किस तरह बांटे गए थे।
रैगिंग और मानसिक उत्पीड़न की शिकायतों पर जवाब
एनएमसी ने कॉलेज से पूछा है कि क्या डॉक्टर ने घटना से पहले रैगिंग, मानसिक उत्पीड़न, अपमान, धमकी, अत्यधिक कार्यभार या गैर-अकादमिक काम को लेकर कोई मौखिक या लिखित शिकायत की थी। यदि शिकायत की गई थी तो उसकी कॉपी और उस पर की गई कार्रवाई का रिकॉर्ड भी मांगा गया है।
शिकायत में जिन तीन सीनियर रेजिडेंट डॉक्टरों के नाम लिए गए हैं, उनसे जुड़े आरोपों की अलग-अलग जांच कर उनका पक्ष भी रिपोर्ट में शामिल करने को कहा गया है।
एचओडी की भूमिका और कार्रवाई की भी होगी जांच
आयोग ने यह भी पूछा है कि विभागाध्यक्ष को कथित शिकायतों की जानकारी कब और किस माध्यम से दी गई थी।
इसके बाद विभाग या कॉलेज स्तर पर काउंसलिंग, मध्यस्थता, चेतावनी या निगरानी जैसी कोई कार्रवाई की गई थी या नहीं, इसकी जानकारी भी मांगी गई है।
कॉलेज को यह भी बताना होगा कि पीजी छात्रों के लिए रैगिंग रोकने और शिकायतों के निवारण की संस्थागत व्यवस्था कितनी प्रभावी थी।
एंटी-रैगिंग कमेटी और स्क्वाड का रिकॉर्ड तलब
एनएमसी ने कॉलेज की एंटी-रैगिंग कमेटी और एंटी-रैगिंग स्क्वाड के गठन और कामकाज का विवरण मांगा है। इसमें कमेटी की संरचना, निरीक्षण एवं निगरानी रिकॉर्ड, प्राप्त शिकायतें और उन पर की गई कार्रवाई का ब्योरा शामिल है।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज की वेबसाइट पर भी एंटी-रैगिंग कमेटी और एंटी-रैगिंग हेल्पलाइन की जानकारी उपलब्ध है।
वॉट्सऐप चैट और डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखने के निर्देश
एनएमसी ने संबंधित वॉटसऐप चैट, मैसेज, ईमेल, शिकायतें, ड्यूटी रिकॉर्ड, अटेंडेंस, हैंडओवर रजिस्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने कहा है कि जांच से जुड़े किसी रिकॉर्ड को बदला, हटाया या नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।
आयोग ने पीजी छात्रों से सीनियर रेजिडेंट्स और फैकल्टी की मौजूदगी के बिना गोपनीय बातचीत के जरिए विभाग के माहौल की जानकारी लेने को भी कहा है, ताकि अन्य छात्रों की शिकायतें भी सामने आ सकें।
शिकायत करने वाली डॉक्टर को अकादमिक नुकसान न हो
एनएमसी ने कॉलेज को यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि जांच में शिकायत करने या सहयोग करने के कारण संबंधित डॉक्टर को प्रतिशोध, धमकी, उत्पीड़न या किसी प्रतिकूल अकादमिक कार्रवाई का सामना न करना पड़े। उनकी PG ट्रेनिंग, अटेंडेंस, मूल्यांकन, थीसिस और परीक्षा पात्रता प्रभावित न हो, इसका भी ध्यान रखने को कहा गया है।
24 घंटे में देनी होगी एटीआर
एनएमसी के एंटी-रैगिंग सेल ने पूरे मामले को ‘मोस्ट अर्जेंट’ बताते हुए कॉलेज प्रबंधन से दस्तावेजी साक्ष्यों के साथ पैरावाइज जवाब और एक्शन टेकन रिपोर्ट 24 घंटे के भीतर भेजने को कहा है। आयोग ने जांच में जानकारी देने वाले छात्रों और रेजिडेंट्स की पहचान कानून के अनुसार गोपनीय रखने के निर्देश भी दिए हैं।
इधर एमजीएम मेडिकल कॉलेज की ओर से मामले की आंतरिक जांच के लिए अलग-अलग टीमें गठित किए जाने और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की बात सामने आई है।
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