प्रभावित परिवारों के घरों में चूल्हे तक नहीं जले, राहत सामग्री से मिटाई भूख: सड़क चौड़ीकरण के नाम पर सामान समेत ढहाए आशियाने
KHULASA FIRST
संवाददाता

जूना रिसाला और सदर बाजार में 100 मकान-दुकानों पर कार्रवाई
खुलासा फर्स्ट...इंदौर।
सड़कों को चौड़ा करने और मास्टर प्लान को अमलीजामा पहनाने के नाम पर कल सुबह शहर के सदर बाजार, जूना रिसाला और किला मैदान गुटकेश्वर मंदिर क्षेत्र में हंगामा मच गया। सूरज की पहली किरण के साथ ही निगम का अमला और पुलिस बल जेसीबी व पोकलेन मशीनों के साथ मौके पर पहुंच गया। लोग नींद से जागे ही थे कि मशीनों की आवाज से पूरा इलाका दहल उठा। देखते ही देखते 60 फीट चौड़ी सड़क का मार्ग प्रशस्त करने के लिए 100 से अधिक मकानों और दुकानों के हिस्सों को ढहा दिया गया। निगम की इस अचानक हुई कार्रवाई से क्षेत्र में हड़कंप मच गया और लोग अपनी गृहस्थी बचाने के लिए सड़कों पर आ गए।
कार्रवाई का नेतृत्व अपर आयुक्त आकाश सिंह, प्रखर सिंह, अभय राजनगांवकर, रिमूवल अधिकारी अंकेश बिरथरे, भवन अधिकारी पल्लवी पाल और रिमूवल सहायक बबलू कल्याणे कर रहे थे। निगम की टीम ने जैसे ही गुटकेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र से विध्वंस की शुरुआत की विरोध के स्वर उठने लगे। मौके पर पहुंचे स्थानीय पार्षद और कांग्रेस शहर अध्यक्ष ने भी अफसरों से गुहार लगाई, लेकिन प्रशासन का रुख बेहद सख्त था। अफसरों का स्पष्ट कहना था कि यह मास्टर प्लान का हिस्सा है और सड़क निर्माण के लिए बाधक हर निर्माण को हटाना अनिवार्य है। जूना रिसाला में कार्रवाई का असर सबसे अधिक दिखा, जहां लोग अपने आशियानों को मलबे में तब्दील होते देख बेबस नजर आए।
विकास की भेंट चढ़ गया हमारा आशियाना
कार्रवाई के दौरान मानवीय संवेदनाओं को झकझोर देने वाली कई तस्वीरें सामने आईं। जूना रिसाला के निवासी हैदर खान का परिवार हरदा में एक शादी समारोह में गया हुआ था। घर पर ताला लगा था और परिवार तीन दिन से बाहर था। निगम की टीम ने ताला लगा देख बिना किसी इंतजार के पूरे मकान को जमींदोज कर दिया। पड़ोसी जुबेर कुरैशी ने बताया कि घर के अंदर रखा टीवी, फ्रिज, पंखे और राशन-पानी सब कुछ मलबे के नीचे दबकर नष्ट हो गया। वहीं, मोहम्मद अनीस ने अपने परदादा मुंशी मुसब्बर खान के समय के दस्तावेजों का हवाला देते हुए बताया कि एक रुपए के स्टाम्प पर हुई रजिस्ट्री वाली जमीन को अब अतिक्रमण बताकर उजाड़ा जा रहा है। उनका कहना है कि अब घर में केवल शौचालय बचा है, बाकी सब कुछ विकास की भेंट चढ़ गया।
मकानों को निशान से 10 फीट अंदर तक तोड़ दिया
विध्वंस का शिकार सिर्फ निजी मकान ही नहीं, बल्कि सरकारी स्कूल का एक हिस्सा भी हुआ। गली नंबर 3 में स्थित सरकारी स्कूल के बाधक हिस्से से रात के अंधेरे में जनरेटर की रोशनी में सरिये काटकर हटाए गए। ठेकेदार जीतू ठाकुर के मातहत काम करने वाले कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें क्षतिग्रस्त हिस्से को पुनर्गठित करने का ठेका मिला है। इसी गली के दीपक मेहर, खुमान सिंह, हेमंत सिरोही, सीमा देलवार और आरती देलवार के मकानों को निशान से 10 फीट अंदर तक तोड़ दिया गया, जिससे सटे हुए अन्य मकान भी खतरनाक स्थिति में आ गए हैं। इस कार्रवाई के बाद प्रभावित परिवारों के घरों में चूल्हा तक नहीं जल सका। मानवीय आधार पर एआईएमआईएम के कार्यकर्ता मोहम्मद रफीक और रेहान कादरी की टीम ने प्रभावितों के लिए भोजन के पैकेट बांटे, वहीं भाजपा नेता यूसुफ अंसारी के समर्थकों द्वारा भी राहत सामग्री वितरित की गई।
बिना ठोस विस्थापन योजना के घरों को ढहा देना न्यायोचित है?
नगर निगम की इस कार्रवाई ने एक बार फिर विकास की गति और नागरिकों के अधिकारों के बीच एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या मास्टर प्लान के नाम पर बिना किसी ठोस विस्थापन योजना के घरों को ढहा देना न्यायोचित है? जिन गरीबों के पास न तो कोई बड़ा राजनीतिक रुतबा है और न ही अदालती लड़ाई लड़ने की आर्थिक क्षमता, वे अब खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। प्रभावित निवासियों का कहना है कि प्रशासन को कम से कम मोहलत तो देना चाहिए थी ताकि वे अपना कीमती सामान तो निकाल पाते।
छावनी और जिंसी क्षेत्र के बाद अब जूना रिसाला और सदर बाजार में हुई इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि नगर निगम प्रशासन किसी भी हाल में सड़क निर्माण के काम को रोकने के मूड में नहीं है। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में चल रही यह कार्रवाई न केवल एक सड़क निर्माण का हिस्सा है, बल्कि उन परिवारों के लिए एक गहरी त्रासदी बन गई है, जिन्होंने दशकों से इस जमीन को अपनी पहचान और जीवन माना था। विकास की इस दौड़ में अब उन परिवारों को मुआवजे और पुनर्वास की दरकार है, जो एक झटके में बेघर हो गए हैं।
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