शहर के मोह में जमे अमले को जाना होगा फील्ड में: वन मंडल में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल; चोरल के जंगलों में सुरक्षा व्यवस्था होगी सख्त
KHULASA FIRST
संवाददाता

खाली बीटों को भरने की प्रक्रिया आज अंतिम पड़ाव पर, 20-25 साल से जमे कर्मचारियों पर गिरेगी गाज
खुलासा फर्स्ट, इंदौर।
वन मंडल में इन दिनों प्रशासनिक सर्जरी का दौर चल रहा है। तबादलों की प्रक्रिया आज अपने अंतिम और निर्णायक पड़ाव पर है। वन मंडल के अंतर्गत डिप्टी रेंजर, वनपाल और वनरक्षकों के अंतर-मंडलीय स्थानांतरण की सूची तैयार कर ली गई है।
विभाग ने इस पूरी प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से अंजाम दिया है। अब यह फाइल कलेक्टर कार्यालय के माध्यम से सीएम कार्यालय भेजी जाएगी। चूंकि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव स्वयं इंदौर जिले के प्रभारी मंत्री हैं और वन विभाग की कमान भी उनके पास है, इसलिए इस सूची पर अंतिम निर्णय उनके स्तर से लिया जाएगा।
मैनेजमेंट को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में मंडल
यह पूरी प्रशासनिक कवायद ऐसे समय पर हो रही है जब चोरल रेंज, जो इंदौर वन मंडल का सबसे घना और संवेदनशील हिस्सा है, अपनी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवालों के घेरे में है। आंकड़ों के अनुसार, चोरल रेंज में वर्तमान में दर्जन भर से अधिक बीट लंबे समय से खाली पड़ी हैं, जिसके चलते सुरक्षा तंत्र पूरी तरह लचर हो चुका है।
विभाग की रिपोर्ट में यह बात सामने आई है कि एक-एक वन रक्षक पर कई-कई बीटों की जिम्मेदारी का अतिरिक्त भार है, जिससे विशाल वन क्षेत्र की निगरानी करना नामुमकिन हो गया है। बिना समुचित निगरानी के इन जंगलों में अवैध गतिविधियों और अतिक्रमण का खतरा लगातार बना हुआ है।
कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं... वन रक्षकों और वनपालों को चोरल रेंज भेजेंगे
डीएफओ लाल सुधाकर सिंह ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि अब व्यवस्था में कोई ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उन्होंने संकेत दिए हैं कि उन वन रक्षकों और वनपालों को सबसे पहले चोरल रेंज भेजा जाएगा, जो पिछले 20 से 25 वर्षों से इंदौर के शहरी या मैदानी इलाकों में जमे हुए हैं।
विभाग का लक्ष्य चोरल की सभी 11 बीटों को तुरंत प्रभाव से भरना है ताकि सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद किया जा सके।
विवादों के फंसे कर्मियों पर भी गिर सकती है गाज
प्रशासनिक स्तर पर हो रहे इस फेरबदल में उन कर्मचारियों पर भी गाज गिरनी तय है जो लंबे समय से विवादों के घेरे में हैं। डीएफओ के अनुसार, जिन भी कर्मियों पर गंभीर आरोप लगे हैं, उन्हें इंदौर रेंज से पूरी तरह बाहर कर दिया जाएगा।
हालांकि विभाग ने तात्कालिक कदम उठाते हुए चोरल रेंज में दो नए वन रक्षकों की नियुक्ति कर दी है, लेकिन वास्तविक सुधार तभी संभव है जब शहर में लंबे समय से जमे कर्मचारियों की तैनाती इन क्षेत्रों में सुनिश्चित की जाए।
अब यह तबादला सूची कर्मचारियों के नए कार्यक्षेत्र का आधार बनेगी, जिसके बाद ही वन विभाग की कार्यप्रणाली और चोरल की सुरक्षा व्यवस्था में वास्तविक बदलाव देखने को मिलेंगे।
कर्मचारियों की पहली पसंद सांवेर और देपालपुर
विभाग के भीतर की हकीकत यह है कि इंदौर, महू और मानपुर रेंज में पदस्थ अधिकांश वन रक्षक घने जंगलों में तैनाती से बचते नजर आ रहे हैं।
कर्मचारियों की पहली पसंद सांवेर और देपालपुर जैसे वे इलाके हैं, जहाँ जंगल न के बराबर है और शहर के नजदीक होने के कारण वे अपनी सुविधायुक्त जीवनशैली बनाए रख सकते हैं।
विभागीय अधिकारियों के लिए सबसे बड़ी चुनौती इन्हीं कर्मचारियों को जंगल की ओर रुख करने के लिए तैयार करना और व्यवस्था को पटरी पर लाना है।
वन कर्मियों की इस उदासीनता के कारण विभाग के सामने रिक्त बीटों को भरना एक बड़ी चुनौती बन गया है।
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